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महिलाओं के पेट पर चल रहे ‘भगत’, 4G वाले स्मार्टफोन से दकियानूसी परंपरा क्यों चमक रही?

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रायपुर

देश के कई शहर में 4G के बाद अब 5G सेवा शुरू कर दी गई है। आधुनिक युग में जो महिलाएं किसी कारण से मां नहीं बन पानी हैं वो मेडिकल साइंस का सहारा लेती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए अनोखी परंपरा का पालन करती हैं। बड़ी बात ये है कि इस परंपरा को निभाने वाली में पढ़ी-लिखी महिलाएं भी शामिल होती हैं। जिनके हाथों में स्मार्टफोन होता है। दरअसल, दिवाली के बाद पड़ने वाले पहले शुक्रवार को धमतरी जिले में एक मेले का आयोजन किया जाता है। ये मेला अंगारमोती माता के मंदिर में लगाया जाता है और इस मेले में करीब 52 गांवों के लोग शामिल होते हैं। लेकिन संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं जो परंपरा निभाती हैं वो खतरनाक होती है। जिस कारण से कई महिलाएं भी घायल भी हो जाती हैं।

क्या है संतान प्राप्ति के लिए परंपरा
छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आयोजित होने वाले मड़ई मेले में संतान प्राप्ति की इच्छा लेकर आई महिलाएं पीठ के बल लेट जाती हैं और उनके ऊपर से बैगा चलकर जाते हैं। यहां ऐसी मान्यता है कि बैगा के ऊपर देवी का वास होता है और जो महिला बैगा के पैरों से कुचली जाती है उसे देवी का आशीर्वाद मिलता है। उसके संतान प्राप्ति की इच्छा पूरी होती है। महिलाओं को पैरों से रौंदा जाता है और इसके साथ ही उनके पेट पर भगत (स्थानीय लोकगीत) भी गाए जाते हैं।

52 गांव की महिलाएं होती हैं शामिल
अंगारमोती माता को आसपास के 52 गांवों के देवी-देवताओं का प्रमुख माना जाता है। जिस कारण से इस मेले में 52 गांव के देवी-देवता शामिल होते हैं। संतान प्राप्ति के लिए महिलाएं दूर-दूर से आती हैं। यहां कई तरह के धार्मिक आयोजन भी किए जाते हैं। इस मेले में आदिवासी सभ्यता के नृत्य के साथ-साथ रोचक खेल भी दिखाए जाते हैं।

शुक्रवार को करीब 300 महिलाएं हुई शामिल
परंपरा के अनुसार, दिवाली के बाद पड़ने वाले पहले शुक्रवार को मड़ई मेले का आयोजन होता है। इस बार शुक्रवार को करीब 300 महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए इस मेले में शामिल हुईं। बड़ी बात ये थी कि इन महिलाओं में बड़ी लिखी महिलाएं भी शामिल हैं लेकिन इस परंपरा का निर्वाहन करती हैं। कई महिलाओं का कहना है कि ये हमारे लिए आस्था और विश्वास की परंपरा है इसका अधुनिकता से कोई संबंध नहीं है।

टेक्नोलॉजी के दौर में ये कैसी आस्था?
21वीं सदी के युग को टेक्नोलॉजी का दौर कहा जाता है। ऐसे में जब किसी कारण से महिलाओं को संतान प्राप्ति नहीं होती है तो वो मेडिकल साइंस की टेस्ट ट्यूब बेबी और आईवीएफ तकनीक का सहारा लेती हैं लेकिन इसके बाद भी छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले की ये महिलाएं इस तरह की परंपरा का निर्वाहन करती हैं। महिलाओं का मामना है कि महिलाएं इस तरह परंपरा का पालन करती हैं तो उनकी कामना पूरी होती है। बड़ी बात ये है कि मड़ई मेले का आनंद उठाने यहां धमतरी, गंगरेल समेत अंचल से हजारों की संख्या में लोग पहुंचते हैं। ये लोग अपने परिवार की सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

छत्तीसगढ़ में और भी अनोखी परंपरा
छ्त्तीसगढ़ में कई आदिवासी परंपराएं हैं जिन्हें आज भी निभाया जाता है। धमतरी जिले में सेमरा गांव में दिवाली का त्योहार अनोखे तरीके से मनाया जाता है। यहां रहने वाले लोग एक हफ्ते तक इस पर्व को बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। ऐसा बताया जाता है कि हफ्तेभर दिवाली मनाई की परंपरा यहां काफी पुरानी है। इस परंपरा को मौजूदा पीढ़ी के लोग भी आगे बढ़ा रहे हैं। यहां के लोगों की मान्यता है कि अगर एक सप्ताह पहले से इस त्यौहार को मनाने की परंपरा को तोड़ा गया तो किसी तरह की अनहोनी हो सकती है।

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