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नदी किनारे पड़ा था छोटे बच्चे का जूता… मोरबी हादसे का सबसे दर्दनाक मंजर

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नई दिल्ली,

एक के बाद एक निकाले जा रहे शव… नदी में चारों ओर एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की नारंगी रंग की बोटें… नदी किनारे पड़े जूते-चप्पल… और आसपास खड़े मायूसी भरे चेहरे… ये मंजर गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी में रविवार शाम से ही है.

ये खतरनाक मंजर इसलिए क्योंकि रविवार शाम को साढ़े 6 बजे के आसपास मच्छु नदी पर बना केबल ब्रिज टूट गया था. पुल के टूटते ही लोग नदी में आ गिरे. कुछ लोगों ने टूटे हुए पुल का हिस्सा पकड़कर अपनी जान बचाने की कोशिश जरूर की, लेकिन ये पकड़ ज्यादा देर तक नहीं रही और वो भी नदी में जा गिरे.जानकारी के मुताबिक, अब तक 134 शव निकाले जा चुके हैं. माना जा रहा है कि नदी में अभी और शव हो सकते हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है. सैकड़ों घायल तो अस्पताल में भी भर्ती हैं.

जिन लोगों ने रविवार को ये पुल टूटता हुआ देखा था, उन्होंने इसे ‘दिल दहलाने वाला’ बताया है. हादसे से कुछ सेकंड पहले का भी एक सीसीटीवी वीडियो सामने आया है. इसमें दिख रहा है कि लोग पुल को झुला रहे हैं और फिर पुल एक तरफ से टूट जाता है. पुल के टूटते ही लोग नदी में जा गिरे.
मोरबी हादसे के बाद नदी किनारे पड़ा छोटे बच्चे का जूता.पुल के टूटने के बाद ही स्थानीय लोग भी मदद के लिए आगे आए और नदी में गिरे लोगों को बचाने लगे. लोगों ने बताया कि वो मंजर कितना खतरनाक था. कैसे वो अपने हाथों में छोटे-छोटे बच्चों के शवों को ले जा रहे थे.

नदी के पास चाय बेचने वाले एक चश्मदीद ने न्यूज एजेंसी को इस बारे में बताया है. उसने बताया कि पुल पर लोग लटके हुए थे. उसने बताया, ‘सबकुछ सेकंड में हो गया. मैंने देखा कि लोग पुल पर लटके हुए थे और थोड़ी देर बाद पकड़ ढीली होते ही वो नदी में जा गिरे.’ उसने बताया कि इस हादसे में 7 महीने की गर्भवती महिला की भी मौत हो गई.

उसने कहा कि हर जगह लोग सिर्फ मर ही रहे थे. मुझसे जितना हो सका, उतनी मदद की. लोगों को अस्पताल लेकर गया. उसने कहा, ‘मैंने ऐसा खतरनाक मंजर कभी नहीं देखा था. वो एक छोटी बच्ची थी. हमने उसे बचाया. उसने बहुत सारा पानी उगल दिया था और हमें उम्मीद थी कि वो बच जाएगी. लेकिन उसने मेरे सामने ही दम तोड़ दिया.’

हसीना बेन की नाम की स्थानीय महिला भी लोगों की मदद में जुटी हुईं हैं. उन्होंने अपनी दोनों गाड़ियां घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए दे दी है. उनके बच्चे भी लोगों की मदद कर रहे हैं. उन्होंने बताया, ‘मैंने बच्चों को अस्पताल ले जाने का सोचा, लेकिन वो मर चुके थे. इसने मुझे तोड़ दिया. उस बारे में मैं बता भी नहीं सकती.’

इस हादसे में मारे गए लोगों में ज्यादातर छोटे बच्चे हैं. हादसे में राजकोट से लोकसभा सांसद मोहन कुंदरिया के भी 12 रिश्तेदारों की मौत हो गई है. कुंदरिया ने न्यूज एजेंसी को बताया कि हादसे में उनके बड़े भाई के साले की चार बेटियां, उनमें से तीन के पति और 5 बच्चे मारे गए हैं. रेस्क्यू ऑपरेशन में एनडीआरएफ की 5 टीम, एसडीआरएफ की 6 प्लाटून, वायुसेना की एक टीम, सेना के दो कॉलम और नौसेना की दो टीमें लगी हैं. इनके अलावा स्थानीय लोग भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगे हैं.

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