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43 साल बाद फिर कराह उठा मोरबी, तब इंदिरा गांधी को रखना पड़ा था रुमाल

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अहमदाबाद

मोरबी में मच्छु नदी के ऊपर बने केबल ब्रिज हादसे 43 साल की पहले की त्रासदी की काली यादों को ताजा कर दिया है। 11 अगस्त, 1979 को मच्छु नदी पर बना डैम टूट गया था। तब उस त्रासदी में 1800 से 25,000 के बीच लोगों के मारे जाने का अनुमान लगाया गया था। मच्छु नदी पर बनाए गए दूसरे डैम के टूटने के बाद मोरबी शहर कराह उठा था और श्मशान जैसी स्थिति बन गई थी। इस हादसे की त्रासदी इतनी भयावह थी कि इसे गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था, इस हादसे के बाद जब इंदिरा गांधी मोरबी पहुंची थीं तो दुर्गंध के चलते उन्हें मुंह पर रुमाल रखना पड़ा था।

15 मिनट में आई थी तबाही
सौराष्ट्र में सुरेंद्र नगर, राजकोट और मोरबी में एक नदी बहती है। इस नदी का नाम है मच्छु नदी। इस नदी पर 1959में एक बांध बनाया गया, जिस मच्छु-1 नाम से जाना गया। 10 साल बाद 1969 में इसी नदी पर एक और बांध बनाया गया जो 1972 में बनकर तैयार हुआ। यह बांध 12 हजार 700 फीट लंबा और अधिकतम 60 फीट ऊंचा था। 11 अगस्त, 1979 लगातार बारिश के बीच मच्छु बांध टूट गया। इसके बाद देखते ही देखते मोरबी पानी में डूब गया। उस वक्त राज्य में जनता मोर्चा की सरकार थी बाबू भाई पटेल दूसरी बार मुख्यमंत्री बने थे और केंद्र में चरण सिंह प्रधानमंत्री। 15 अगस्त के अगले दिन 16 अगस्त को इंदिरा गांधी मोरबी के दौरे पर पहुंची तो तबाही देखकर स्तब्ध रह गईं। शमशान में तब्दील हुए मोरबी में उन्हें बदबू के चलते मुंह पर रुमाल रखना पड़ा। उनके दौरे की तस्वीरें मीडिया में छपी। सरकार ने इस हादसे को एक्ट ऑफ गॉड करार दिया। इंदिरा गांधी की इसको लेकर आज भी आलोचना होती है। माेरबी में 1979 में बांध टूटा था, तो 2001 में भूकंप में तबाही हुई थी। इसमें 236 लोगों की मौत हुई थी। 50 हजार मकान के करीब मकानों को नुकसान पहुंचा था और 82 गांव प्रभावित हुए थे। इनमें 70 फीसदी गांवों में बड़ा नुकसान देखा गया था। अब 2022 में ब्रिज हादसा हो गया।

पांच साल बाद जाएंगे मोदी
1979 से 43 साल बाद मोरबी एक बार फिर कराह उठा है इसकी वजह है मच्छु नदी पर बना ऐतिहासिक सस्पेंशन ब्रिज। कुछ साल पहले तक मोरबी जाने वाले हर किसी का वेलकम करने वाला यह ब्रिज सरकारी उदासीनता के चलते मौत का पुल बन गया। इस समय राज्य की कमान भूपेन्द्र पटेल के हाथों में है और केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पांच साल के अंतराल के बाद मोरबी जाएंगे। 2017 के गुजरात चुनावों में वे 29 नवंबर को मोरबी पहुंचे थे और उन्होंने सभा को संबोधित किया था तब पीएम मोदी ने कहा था कि मेरा मोरबी से पुराना नाता है, सुख दुःख में मैंने मोरबी को हमेशा याद किया है। मच्छु घटना के वक़्त मैं सीधे केरल से आया था, कई आरएसएस कार्यकर्ता मदद के लिए पहुंचे थे। इससे पहले पीएम मोदी 2014 के लोकसभा चुनाव में मोरबी गए थे।

सेरेमिक सिटी है मोरबी
ठाकोर राजाओं की नगरी रही मोरबी को पहले कवेलू को लिए जाना जाता था लेकिन अभी यह सेरेमिक की टाइल्स के लिए जाना जाता है। वक्त के साथ जरूरत बदली तो मोरबी ने पहचान बदल दी। यहां सभी प्रकार की टाइल्स का उत्पादन होता है। इस शहर को सिरेमिक सिटी (चीनी मिट्टी के उत्पाद) से भी जाना जाता है। यहां सेरामिक के कई उत्पाद बनते हैं। यही वजह है कि कजारिया, ओरिएंट, जोन्सन कंपनियों ने भी यहां अपनी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाई हुई हैं।

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