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Monday, March 30, 2026
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मोरबी में 134 मौतों का गुनहगार कौन? इन 5 सवालों का जवाब मिलना बाकी है

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मोरबी

गुजरात के मोरबी जिले में केबल पुल टूटने से 134 की दर्दनाक मौत हो चुकी है। 100 से अधिक अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। सर्च ऑपरेशन का काम फिलहाल रोक दिया गया और मंगलवार सुबह इसे दोबारा शुरू किया जाएगा। 143 साल पुराने पुल को पांच दिन पहले ही रेनोवेशन के बाद दोबारा खोला गया था। रविवार को छुट्टी वाले दिन पुल पर क्षमता से अधिक भीड़ जुटी और हादसा हो गया। मामले में एसआईटी जांच जारी है लेकिन इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं जिनके जवाब मिलना बाकी है।

इंजीनियरिंग का चमत्कार कहे जाने वाले इस पुल का उद्घाटन 1879 में हुआ था। पिछले सात महीने से मरम्मत के चलते पुल बंद था। मरम्मत का काम घड़ी निर्माता कंपनी अंजता मैन्युफैक्चरिंग (ओरेवा ग्रुप) को मिला था। यह कंपनी घड़ियां, एलईडी, सीएफएल बल्ब, ई-बाइक वगैरह बनाती है।

फिलहाल सर्च ऑपरेशन रोका गया
हालांकि अब जानकारी है कि अजंता ने पुल के टेक्निकल पार्ट की मरम्मत का जिम्मा देवप्रकाश सॉल्यूशन नाम की कंपनी को दे दिया था। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट मिले ही पुल को 26 अक्टूबर को आम लोगों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया था और पांच दिन बाद ही हादसा हो गया।

मच्छू नदी में सर्च ऑपरेशन रोक दिया गया है। कल सुबह फिर से शुरू होगा। करीब 100 अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। फरेंसिक लैब के सूत्रों के अनुसार, मच्छू नदी के ऊपर बना मोरबी केबल पुल भारी भीड़ के चलते गिरा था। यह ऐतिहासिक पुल पिछले सात महीने से मरम्मत के कार्य के लिए बंद था।

पहला सवाल- क्या मरम्मत में लगी ओरेवा कंपनी ने अपने मन से हैंगिंग ब्रिज को आवाजाही के लिए खोला?
जवाब- मोरबी पुल हादसे से जुड़ा यह सवाल लगातार बना हुआ है। दरअसल 26 अक्टूबर को इस पुल को मरम्मत के बाद दोबारा खोला गया था। इसी साल मार्च महीने में अंजता कंपनी को दोबारा 15 साल के लिए पुल का रखरखाव सौंपा गया था। आरोप है कि समझौते के तहत कंपनी को रखरखाव और रेनोवेशन के लिए 8 से 12 महीने का समय लेना चाहिए था लेकिन पुल को समय से पहले ही खोल दिया गया।

दूसरा सवाल- दिवाली के बाद पांच दिन पहले पुल खुला तो स्थानीय प्रशासन ने कोई कार्रवाई क्यों नहीं की?
जवाब- मोरबीनगर निकाय का कहना है कि ओरेवा ने अधिकारियों को पुल को दोबारा खोलने के बारे में सूचित नहीं किया था। उन्होंने कहा कि कंपनी को ऐसा करने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिला था। ओरेवा के अधिकारियों ने आरोपों पर कोई जवाब नहीं दिया।

तीसरा सवाल- रविवार यानी छुट्टी के दिन भीड़ ज्यादा होने का अनुमान था, इसके बावजूद क्राउड मैनेजमेंट का इंतजाम क्यों नहीं था?
जवाब- कहा जा रहा है कि पुल की क्षमता 100 लोगों की थी लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दुर्घटना के वक्त करीब 500 लोग इसमें सवार थे। पुलिस और प्रशासन प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के चलते व्यस्त था। फरेंसिक लैब के सूत्रों के अनुसार, पुल पर रविवार के चलते ज्यादा भीड़ मौजूद थी जिसके कारण हाल ही में मरम्मत के बाद पुल इतना वजन सह नहीं पाया और टूट गया।

चौथा सवाल- कॉन्ट्रैक्ट अजंता मैन्युफैक्चरिंग यानी ओरेवा को मिला था तो फिर दूसरी कंपनी देवप्रकाश सॉल्यूशन को क्यों सौंपा मरम्मत का जिम्मा?
जवाब- बताया जा रहा है कि पुल की मरम्मत का काम थर्ड पार्टी को दिया गया था। वॉचमेकर कंपनी ने नवीनीकरण के तकनीकी पहलू का काम एक छोटी कंपनी देवप्रकाश सॉल्यूशंस को आउटसोर्स किया था। यानी अजंता मैनुफैक्चरिंग ने पहले कॉन्ट्रैक्ट लिया और फिर मरम्मत के काम का जिम्मा देवप्रकाश सॉल्यूशन को दे दिया।

पांचवां सवाल- समझौते के तहत रेनोवेशन और मरम्मत के लिए 8 से 12 महीने लगने चाहिए फिर आपाधापी में 7 महीने पहले क्यों खोला गया पुल?
जवाब- नगर निकाय और कंपनी के बीच समझौते के तहत मरम्मत के लिए 8 से 12 महीने का वक्त लगना चाहिए लेकिन इसे 7 महीने में ही आम जनों के लिए खोल दिया गया। कांग्रेस ने इस हादसे को चुनावी मोड़ दे दिया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव की जल्दबाजी में बीजेपी ने पुल को लोगों के लिए जल्दी में खोल दिया जिससे यह हादसा हुआ।

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