अहमदाबाद
गुजरात विधानसभा चुनावों के लिए पूरा जोर झोंक रही आम आदमी पार्टी (आप) ने दहेगाम सीट से युवराज सिंह जाडेजा पर दांव खेला है। गांधीनगर की दहेगाम सीट के अतीत को देखें तो इस सीट पर किसी एक पार्टी का प्रभुत्व नहीं रहा है, अभी इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है तो 2012 में कांग्रेस और इसके पहले बीजेपी का कब्जा था, हालांकि 1985 से लेकर 2002 तक लगातार बीजेपी का कब्जा रह चुका है। गोंडल से आने वाले युवराज सिंह जाडेजा गुजरात में युवाओं के बीच चर्चित चेहरे हैं। 2019 में बिन सचिवालय क्लर्क की भर्ती आंदोलन को लेकर चर्चा में आए जाडेजा ने हाल ही में हेडक्लर्क के पर्चा लीक को उठाया था, इसके बाद सरकार को झुकना पड़ा था और परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। अपने आंदोलन के जरिए कई बार सरकार को झुका चुके जाडेजा क्या दहेगाम से विधानसभा पहुंच पाएंगे? यह तो नतीजों में स्पष्ट होगा। अगर बीजेपी यहां से फिर मौजूदा विधायक बलराज सिंह चौहान रिपीट करती हैं तो युवराज का मुकाबला बलराज सिंह से होगा। छात्र और युवा नेता की पहचान रखने वाले युवराज सिंह जाडेजा विवादों में भी खूब रह चुके हैं।
क्षत्रिय बहुल है सीट
दहेगाम विधानसभा गांधीनगर जिले में आती है और लोकसभा के हिसाब से यह सीट अहमदाबाद नार्थ में लगती है। यह ग्रामीण विस्तार की सीट है। शहरी आबादी काफी कम है। युवराज सिंह जाडेजा क्षत्रिय हैं और इसी के चलते पार्टी ने उन्हें दहेगाम से उतारा है। तो वहीं कांग्रेस की तरफ से इस बार पूर्व विधायक और 2012 में बीजेपी को हराने वाली कामिनीबेन राठौड़ को फिर टिकट मिल सकता है। तेजतर्रार नेता कामिनी बने पहले टिकट नहीं मिलने पर इस्तीफा देने का ऐलान कर चुकी हैं। ऐसे में युवराज सिंह मुकाबला बलराज सिंह और कामिनीबेन राठौड़ से होगा। कुछ दिन पहले यह चर्चा भी सामने आई थी कि कांग्रेस के मौजूदा प्रमुख जगदीश ठाकोर यह से लड़ सकते हैं, ठाकोर पूर्व में दो बार जीत चुके हैं, हालांकि उनके चुनाव में उतरने की संभावना नहीं है। ऐसे में कामिनीबेन राठौड़ को प्रबल उम्मीदवार माना जा रहा है।
सौराष्ट्र से है ताल्लुक
युवराज सिंह जाडेजा गुजरात के सौराष्ट्र के रहने वाले हैं। सौराष्ट्र में भी वह गोंडल से ताल्लुक रखते हैं। जाडेजा बड़े सपने लेकर करके कुछ साल पहले वे गांधीनगर आए थे। इसके बाद खुद तैयारी करने के और सरकारी भर्ती परीक्षाओं के छात्रों को कोचिंग देने लगे। इसके जडेजा ने सरकारी भर्ती परीक्षा की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच लोकप्रिय हो गए। 2019 में गुजरात में बिन सचिवालय क्लर्क की भर्ती परीक्षा हुई। इसमें लाखों लोगों ने आवेदन दिया, लेकिन पेपर लीक हो गया। पेपर लीक को लेकर युवराज सिंह जाडेजा ने सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया। पहले सरकार ने हल्के में लिया, लेकिन बाद में सरकार को झुकना पड़ा और फिर परीक्षा रद्द करनी पड़ी। इसके बाद से युवराज सिंह जाडेजा लगातार युवाओं के मुद्दों को लेकर सक्रिय हैं। युवराज सिंह जाडेजा युवा नवनिर्माण सेना नाम एक संगठन भी चालते हैं।
एक साल से ‘आप’ में
2021 की शुरुआत से युवराज सिंह जाडेजा आम आदमी पार्टी के करीब आए, लेकिन उन्होंने पार्टी ज्वाइन नहीं की। सितंबर, 2021 में गांधीनगर नगर पालिका चुनावों के वक्त उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदस्यता ली। दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मौजूदगी में पार्टी ज्वाइन की।
गाड़ी चढ़ाने का लगा आरोप
छात्रों और युवाओं से जुड़े आंदोलन की वजह से युवराज सिंह जाडेजा पर कई केस दर्ज हैं। इनमें सबसे चर्चित केस अप्रैल, 2022 का है, जब जाडेजा के ऊपर पुलिसकर्मियों के ऊपर गाड़ी चढ़ाने का केस दर्ज किया है। इस मामले में जाडेजा की गिरफ्तारी भी हुई थी। युवराज सिंह गुजरात अभी तक करीब 10 पेपर लीक के मुद्दे उजागर कर चुके हैं। इसके चलते वे हाल के वर्षों में युवाओं के बीच खूब चर्चा में रहे हैं।
