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गुजरात: पहले चरण में कम वोटिंग, BJP की बढ़ी चिंता, कई इलाकों में लोग वोटिंग से रहे दूर

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अहमदाबाद,

गुजरात में पहले चरण में 1 दिसंबर को वोटिंग हुई. जिसमें चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण में सौराष्ट्र और कच्छ में 63% वोटिंग हुई है. ये वोटिंग पिछले चुनावों यानी 2017 से 5 प्रतिशत कम है. ऐसे में अब चर्चा आम हो गई है कि क्या गुजरात में कम वोटिंग बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकती है?

सभी सीटों का गिनती को देखें तो आदिवासी इलाके में 14 सीटों पर मतदान हुआ है. वहां सब से ज्यादा 70% तक मतदान दर्ज हुआ है. माना जा रहा है कि आदिवासी इलाके में ज्यादा मतदान कांग्रेस के लिए फायदा पहुंचा सकता है. तो वहीं अगर पाटीदार इलाके की बात करें तो सौराष्ट्र में पाटीदार सीट जो कि 12 सीट है, उन सभी सीटों पर मतदान 5 से 9 प्रतिशत तक कम हुआ है.

2017 में इसलिए ज्यादा लोगों ने डाले थे वोट
वरिष्ठ पत्रकार चिंतन आचार्या का कहना है कि 2017 में पाटीदार आंदोलन की वजह से पाटीदार घरों से निकल कर परिवर्तन के लिए वोट दे रहे थे, लेकिन इस बार कोई ऐसा मुद्दा नहीं था. मुद्दा न होने की वजह से और पाटीदारों में बीजेपी के लिए नाराजगी को लेकर इस बार वोट नहीं किया.

इस बार वोट डालने कम निकले लोग
वहीं ये भी माना जा रहा है कि 27 साल से गुजरात में बीजेपी की सरकार है. गुजरात के लोग जो बीजेपी को वोट नहीं देना चाहते थे. वहीं लोग विपक्ष के तौर पर कांग्रेस को भी नहीं लाना चाहते हैं. वैसे ये माना जा रहा है कि लोग भी वोटिंग के लिए कम निकले. अहमदाबाद के वरिष्ठ पत्रकार अजय उमठ का कहना है कि सौराष्ट्र में पाटीदार फैक्टर भी काफी महत्वपूर्ण है. साथ ही आम आदमी पार्टी भी वोट को डिवाइड करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है.

AAP ने दी अच्छी फाइट
राजनीति के जानकार का कहना है कि बीजेपी, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच हो रहे इस त्रिकोणीय मुकाबले में बीजेपी को आम आदमी पार्टी ने अच्छी फाइट दी है. लेकिन इस फाइट का नतीजा क्या होगा यह कह पाना काफी मुश्किल हैं.

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