9.7 C
London
Tuesday, January 20, 2026
Homeराज्यनेपाल सीमा से सटे जिलों में 'अज्ञात' फंडिंग से चल रहे कई...

नेपाल सीमा से सटे जिलों में ‘अज्ञात’ फंडिंग से चल रहे कई मदरसे, योगी सरकार ने दिए जांच के आदेश

Published on

लखनऊ

यूपी में मदरसों के सर्वे के बाद योगी सरकार ने नेपाल सीमा से सटे जिलों सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, महाराजगंज में मदरसों की फंडिंग की जांच का आदेश दिया है। दरअसल इस इलाके में यूपी सरकार के सर्वे के दौरान कई ऐसे गैर रजिस्टर्ड मदरसे हैं, जिन्होंने बताया है कि वह जकात और चंदे की धनराशि से चलते हैं। वहीं सर्वे टीमों ने पाया कि ये इलाके पिछड़े हुए हैं और यहां के लोग जकात और चंदे में इतनी धनराशि नहीं दे सकते। यही नहीं आदेश दिया गया है कि ऐसे मदरसों की एक बार फिर जांच की जाए ताकि पता चल सके कि उन्हें फंडिंग कहां से हो रही है?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा है कि इन मदरसों से ये नहीं बताया कि जकात और चंदे की राशि दे कौन रहा है? उन्होंने कहा कि ऐसे मदरसों की संख्या काफी ज्यादा है। साफ लग रहा है कि इन मदरसों को बाहर से चंदा मिल रहा है। तो सवाल ये है कि बाहर से आखिर क्यों इन्हें चंदा भेजेगा? मंत्री कहा कि हम अपने बच्चों का गलत इस्तेमाल होने नहीं दे सकते, जिसकी संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल, जानकारी इकट्‌ठा कर ली गई है और फंडिंग का सोर्स की फिर से जांच की जा रही है।

बता दें पिछले साल अगस्त में योगी सरकार ने प्रदेश के सभी जिलों में मदरसों का सर्वे करने का निर्देश दिया था। 10 सितंबर को ये सर्वे शुरू हुआ और जिलाधिकारियों ने 15 नवंबर तक अपनी सर्वे रिपोर्ट शासन को भेज दी थी। दो महीने चले इस सर्वे में 8449 मदरसे ऐसे मिले, गैर मान्यता प्राप्त थे, यानी उत्तर प्रदेश के मदरसा एजूकेशन बोर्ड से संबद्ध नहीं थे। इसमें मुरादाबाद में सबसे ज्यादा 550, सिद्धार्थनगर में 525 और बहराइच में 500 मदरसे मिले। जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में करीब 25 हजार मदरसे हैं। इन गैर मान्यता प्राप्त मदरसों में प्रमुख रूप से तीन श्रेणियां सामने आई हैं। पहली श्रेणी में ऐसे मदरसे हैं, जो सारे मानक पूरे करते हैं लेकिन उनका प्रबंधन मदरसा बोर्ड से संबद्ध नहीं होना चाहता। उनकी अपनी फंडिंग है और वो अपने बनाए नियम पर चलते हैं। वहीं दूसरी श्रेणी में ऐसे मदरसे हैं, जो मानकों पर खरे नहीं उतरते लेकिन मदरसा बोर्ड में रजिस्टर्ड होने के इच्छुक हैं। वहीं तीसरी श्रेणी ऐसे मदरसों की है, जो मनमाने ढंग से चल रहे हैं और उनका कोई रोडमैप नहीं है।

‘बेसिक के नियमों के तहत मदरसों में हो काम’
अल्पसंख्यक कल्याण धर्मपाल सिंह ने पिछले दिनों मदरसा परिषद के अध्यक्ष और सदस्यों के साथ बैठक में कहा था कि मदरसे के छात्र-छात्राओं के हितों को ध्यान में रखते हुए मदरसा शिक्षा परिषद पाठ्यक्रम, समय सारिणी का निर्धारण, अवकाश और परीक्षा प्रक्रिया का काम नियमानुसार किया जाए। इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि मदरसा बोर्ड द्वारा बेसिक शिक्षा परिषद के नियमों के आधार पर ही काम किया जाए। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राएं शिक्षा के क्षेत्र में श्रेष्ठता की ओर बढ़ें। पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन करने वालों को पुरस्कृत किया जाए, जिससे साथ में पढ़ने वाले अन्य बच्चों का भी मनोबल बढ़े। अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र-छात्राएं परंपरागत शिक्षा के साथ ही आधुनिक शिक्षा ग्रहण करें।

Latest articles

Babar Azam T20 World Cup 2026 Out? बाबर आज़म ने अपने ही पैरों पर मार ली कुल्हाड़ी! क्या वर्ल्ड कप से कटेगा पत्ता?

T20 World Cup 2026: पाकिस्तानी क्रिकेट के 'पोस्टर बॉय' कहे जाने वाले बाबर आज़म...

नववर्ष मिलन समारोह 2026 में सांस्कृतिक और प्रतिभा सम्मान का आयोजन—उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक परिषद में नवीन कार्यकारिणी का गठन

भोपाल।उत्तर प्रदेश सांस्कृतिक परिषद के तत्वाधान में नववर्ष मिलन समारोह 2026 का भव्य आयोजन...

बीएचईएल ने जारी किए दिसंबर तिमाही के अनऑडिटेड वित्तीय नतीजे

भेल नई दिल्ली।भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही...

More like this

आयकर विभाग का गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर के ठिकानों पर छापा

इंदौर।इंदौर स्थित बीओआर गोयल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के कार्यालय और कंपनी के डायरेक्टर्स के आवासों...

परीक्षाएं होंगी पारदर्शिता 1 लाख भर्तियों का कैलेंडर जारी : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर  ।मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से वादा...

युवा देश का भविष्य और राजस्थान का गौरव: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर ।मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और...