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चुनावों से पहले क्या फिर गरमाएगा कालेधन का मुद्दा? पनामा पेपर्स लीक पर भारत को मिल गया है मदद का भरोसा

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नई दिल्ली

क्या पनामा पेपर्स का जिन्न फिर से बाहर निकलेगा? 2016 में सामने आए इस खुलासे ने भारत समेत दुनिया के कई देशों को हिलाकर रख दिया था। भारत के भी कई बड़े नाम इस खुलासे में सामने आए थे। पनामा पेपर्स खुलासे में वैसे लोगों, कंपनियों के नाम सामने आए थे, जिनका गुप्त विदेशी अकाउंट या कंपनियां थीं। भारत के कई मशहूर और बिजनेसमैन का नाम इसमें सामने आया था। अब पनामा ने कहा कि वह 2016 के इस मामले की जांच में भारत की मदद करने को तैयार है।

टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में पनामा की विदेश मंत्री जूनाइमा ट्यूने ने कहा कि पनामा भारत को जानकारी देने के लिए तैयार है और इसके लिए भारतीय अधिकारियों को बताया भी गया है। उन्होंने बताया कि भारतीय अधिकारियों को वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता को लेकर जानकारी दी गई है। उन्होंने भारत की कालेधन के खिलाफ संघर्ष की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने इस बारे में भारतीय समकक्ष एस जयशंकर को भी इसकी जानकारी दी है। गौरतलब है कि पनामा की तरफ से भारत को पहली उच्च स्तरीय आश्वासन पनामा पेपर्स मामले में दिया गया है। भारत को पनामा पेपर्स लीक और पैराडाइज पेपर्स लीक में कुल 20 हजार 353 करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति के बारे में जानकारी मिली थी।

भारतीय मूल की तेवने प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन में बतौर विशेष अतिथि के तौर पर शामिल हुई थीं। वो भारत में आयोजित ग्लोबल साउथ सम्मेलन में भी शामिल हुई थीं। मनी लॉन्ड्रिंग पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था FATF ने पनामा को अपनी मॉनिटरिंग लिस्ट में रखा है। यह अंतरराष्ट्रीय संस्था पनामा से विदेशी टैक्स अपराध मामले में कार्रवाई करने के लिए प्रभावकारी तंत्र बनाने की मांग करता रहा है।

तेनवे ने हालांकि कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह समझेगी कि पनामा का FATF लिस्ट में होना किसी के लिए भी ठीक नहीं है। जिस तरीके से पनामा पेपर्स लीक मामले में हमारे देश को निशाना बनाया गया ये नाइंसाफी थी। आज मैं ये गर्व के साथ ये कह सकती हूं कि पनामा दूसरे देशों की तुलना में इस मामले में ज्यादा पारदर्शी है।

गौरतलब है कि 2016 में हुए पनामा पेपर्स लीक का खुलासा खोजी पत्रकारों के अंतरराष्ट्रीय गठबंधन इंटरनैशनल कंसोर्सियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) ने किया था। संस्था की वेबसाइट पर उन भारतीय कंपनियों की पहचान और पता तक सार्वजनिक किए गए थे। हालांकि संस्था ने कहा था कि उनका ये नहीं कहना है कि जिसका भी नाम इसमें आया है, उन्होंने कोई कानून तोड़ा है या गलत व्यवहार किया है। भारत सरकार ने इस खुलासे के बाद एक जांच दल का गठन किया था।

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