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Tuesday, June 23, 2026
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सरकार ‘न्यायपालिका’ पर कब्जा करना चाहती है, पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ऐसा क्यों बोल रहे हैं

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नई दिल्ली

राज्यसभा सदस्य और पूर्व कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने रविवार को आरोप लगाया कि सरकार न्यायपालिका पर ‘कब्जा’ करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसी स्थिति बनाने की पूरी कोशिश कर रही है, जिसमें एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में ‘दूसरे स्वरूप’ में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) का परीक्षण किया जा सके। 74 वर्षीय कपिल सिब्बल ने मौजूदा समय में केशवानंद भारती के फैसले के बुनियादी ढांचे के सिद्धांत को बहुत महत्वपूर्ण बताते हुए सरकार को खुले तौर पर यह कहने की चुनौती दी कि यह त्रुटिपूर्ण है।

एनजेएसी का ‘दूसरे स्वरूप’ में परीक्षण की कोशिश
उन्होंने दावा किया कि सरकार ने इस तथ्य से सामंजस्य नहीं बैठा पा रही है कि उसके पास उच्च न्यायपालिका में नियुक्तियों में उसकी बात अंतिम नहीं है। सिब्बल ने इंटरव्यू में कहा, ‘वे (सरकार) ऐसी स्थिति बनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, जिसमें एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट में ‘दूसरे स्वरूप’ में राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग (एनजेएसी) का परीक्षण किया जा सके। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की उस हालिया टिप्पणी के बाद सिब्बल की यह प्रतिक्रिया सामने आई है। अपनी टिप्पणी में धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनजेएसी को रद्द करने के फैसले की आलोचना की थी।

उपराष्ट्रपति ने ऐतिहासिक फैसले पर उठाया था सवाल
धनखड़ ने 1973 के केशवानंद भारती मामले के ऐतिहासिक फैसले पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा था कि इस फैसले ने एक गलत मिसाल कायम की और वह सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से असहमत हैं कि संसद संविधान में संशोधन कर सकती है, लेकिन इसकी मूल संरचना में नहीं। सुप्रीम कोर्ट ने एनजेएसी अधिनियम को 2015 में असंवैधानिक करार दिया था, जिसका उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति की कॉलेजियम प्रणाली को बदलना था।

धनखड़ की राय व्यक्तिगत या सरकार की?
धनखड़ की टिप्पणी के बारे में पूछे जाने पर सिब्बल ने कहा, ‘जब एक उच्च संवैधानिक प्राधिकारी और कानून के जानकार व्यक्ति, इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो सबसे पहले यह सवाल पूछना चाहिए कि क्या वह व्यक्तिगत राय रख रहे हैं या सरकार की ओर से बोल रहे हैं।’ सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ने कहा, ‘इसलिए, मुझे नहीं पता कि वह किस हैसियत से बोल रहे हैं,…सरकार को इसकी पुष्टि करनी होगी। अगर सरकार सार्वजनिक रूप से कहती है कि वह उनके विचारों से सहमत है, तो इसका एक अलग अर्थ है।’

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