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Wednesday, April 22, 2026
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रोटी-रोटी को तरस रहा यह मुस्लिम देश, मस्जिदों पर पानी की तरह से बहा रहा है पैसा, उठे सवाल

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काहिरा

पिरामिड और ममी के लिए मशहूर मिस्र इस समय कुछ अलग वजहों से सुर्खियों में है। मिस्र का खाना दुनिया के कई पर्यटकों की जुबां पर चढ़ा है। पास्‍ता, चावल, दाल, चने, फ्राइ किए हुए प्‍याज, मसालेदार टमाटर का सॉस से मिलाकतर बनाई गई कोशारी डिश सबकी फेवरिट है। लेकिन इस समय देश में इतना भयंकर खाद्यान्‍न संकट है कि रेस्‍टोरेंट्स से ग्राहक तक लौट रहे हैं। पाकिस्‍तान के बाद अब मिस्र भयानक आर्थिक संकट में है। लोगों के पास रोटी तक खरीदने को पैसे नहीं हैं। देश की स्थिति ऐसी हो चुकी है कि गरीब से लेकर अमीर इंसान तक परेशान है। इसके बावजूद देश की मस्जिदों के निर्माण पर पानी की तरह रकम खर्च की जा रही है।

मस्जिद निर्माण से नागरिक परेशान
देश के नागरिकों को समझ नहीं आ रहा है कि जब आर्थिक संकट है तो फिर मस्जिदों का निर्माण या फिर उनका रेनोवेशन क्‍यों कराया जा रहा है। 20 साल के एक युवा महमूद अब्‍दू ने वेबसाइट अल मॉनिटर को बताया है कि पहले घर के लोग कहते थे कि अगर गरीबी है तो धन को मस्जिदों पर खर्च नहीं करना चाहिए। अब्‍दू का कहना है कि मस्जिदों के बाहर डोनेशन बॉक्‍स रखकर मस्जिदों के निर्माण और दूसरे कामों के लिए रकम इकट्ठा करनी चाहिए।

देश में लाखों मस्जिदें
पिछले साल नवंबर में देश के धार्मिक अनुदान मंत्रालय ने डोनेशन बॉक्‍स का आइडिया कैंसिल कर दिया था। मंत्रालय ने कहा कि डोनेशन बॉक्‍स की जगह लोग अपने बैंक अकाउंट से पैसे ट्रांसफर करें। सितंबर 2020 में धार्मिक अनुदान मंत्री मोहम्‍मद मुख्‍तार गोमा ने बताया था कि मिस्र में मस्जिदों की कुल संख्‍या 1 लाख 40 हजार तक पहुंच गई है जिसमें से एक लाख बड़े मस्जिद भी शामिल हैं। मिस्र में कई मस्जिद ऐसे हैं जहां पर सिर्फ शुक्रवार को ही भीड़ होती है या फिर रमजान के महीने में ये फुल होते हैं। ऐसे में क्‍यों नई मस्जिदों का निर्माण हो रहा है।

मस्जिदों पर खर्च 404 मिलियन डॉलर
पिछले महीने ही देश में 9600 मस्जिदों का या तो निर्माण हुआ है या फिर इन्‍हें रेनोवेट कराया गया। साल 2013 में जब अब्‍देल फतह अल-सीसी ने राष्‍ट्रपति पद संभाला था तब से ही देश में मस्जिदों पर तेजी से खर्च हो रहा है। अब तक 404 मिलियन डॉलर मस्जिदों पर खर्च कर डाले गए हैं। सीसी के रवैये पर देश के युवा अब सवाल उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि प्रार्थना तो कहीं भी की जा सकती है। लेकिन पढ़ाई के लिए स्‍कूल और इलाज के लिए अस्‍पताल की भी जरूरत होती है।

क्‍यों हुई देश की यह हालत
अमेरिकी मैगजीन सीईओवर्ल्‍ड के मुताबिक मिस्र वह अरब देश है जहां पर एक व्‍यक्ति औसतन 219 डॉलर प्रतिमाह ही कमाता है। महामारी के बाद जब मिस्र उबरने की कोशिशें कर रहा था, रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया। महामारी ने देश के पर्यटन उद्योग को बुरी तरह से चौपट किया तो जंग ने हालात और खराब कर दिए। पर्यटन उद्योग पूरी तरह से ठप पड़ा है। विदेशी निवेशकों ने जंग के कुछ ही हफ्तों के अंदर अरबों डॉलर वापस खींच लिए। इसका अर्थव्‍यवस्‍था पर बुरा असर पड़ा। मिस्र, रूस और यूक्रेन से गेहूं आयात करता है। गेहूं की कीमतें भी जंग के साथ बढ़ने लगीं जबकि पर्यटन कम होने लगा। देश का पर्यटन उद्योग लंबे समय तक रूस और यूक्रेनी पर्यटकों पर ही निर्भर रहा है।

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