केनबरा
ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु पनडुब्बी के बाद अब ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है। ये हेलीकॉप्टर पुराने हो चुके एमआरएच-90 ताइपन मिलिट्री हेलीकॉप्टरों की जगह लेंगे। अमेरिका से 40 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए ऑस्ट्रेलिया को 1.97 बिलियन डॉलर खर्च करने होंगे। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने बुधवार को कहा कि अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन कॉर्प के यूएच-60एम ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर ऑस्ट्रेलिया के एमआरएच-90 ताइपन हेलीकॉप्टरों के बेड़े की जगह लेगा। उन्होंने बताया कि ताइपन हेलीकॉप्टर लंबे समय से महंगे मेंटिनेंस और कम उपलब्धता के लिए बदनाम रहा है। इससे पहले 2021 में ऑस्ट्रेलिया ने अमेरिका और ब्रिटेन के साथ परमाणु पनडुब्बियों के लिए ऑकस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
एयरबस बनाती है ताइपन हेलीकॉप्टर
ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्री मार्लेस ने कहा कि ताइपन की उड़ान के लिए उपलब्धता काफी कम रही है। हमें विश्वास है कि ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर इस कमी को पूरा कर सकते हैं। यह एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिससे हम पहले से ही परिचित हैं। ताइपन का निर्माण यूरोपीय एयरोस्पेस कंपनी एयरबस करती है। एयरबस में फ्रांसीसी सरकार की एक महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है। ऐसे में फ्रांसीसी सरकार ने ऑस्ट्रेलिया से ताइपन हेलीकॉप्टर के 40 यूनिट को बनाए रखने का अनुरोध किया है। मार्लेस ने कहा कि उन्होंने अपने फ्रांसीसी समकक्ष के साथ कई बार बात की थी और उन्हें विश्वास था कि अमेरिकी हेलीकॉप्टर सौदा फ्रांस के साथ नए संबंधों को बाधित नहीं करेगा।
फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया संबंध फिर दांव पर
इसके बाद एयरबस ने कहा कि वह ऑस्ट्रेलिया के इस निर्णय को स्वीकार करता है और मानता है कि यह देश उसके लिए अब भी प्रमुख बाजार बना रहेगा। ताइपन हेलीकॉप्टर को सर्विस से हटाना ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस के बीच तनाव की नई वजह बन सकता है। इससे पहले 2021 में अमेरिका और ब्रिटेन के बनाए गए परमाणु पनडुब्बियों को पाने के लिए ऑस्ट्रेलिया ने फ्रांस के साथ 62 बिलियन डॉलर की अपनी पनडुब्बी डील को रद्द कर दिया था। तब फ्रांस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पीठ में छूरा घोंपना करार दिया था।
फ्रांस को सांत्वना दे रहा ऑस्ट्रेलिया
विवाद के चरम पर पहुंचने पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन पर सौदे के बारे में झूठ बोलने का आरोप लगाया और पेरिस ने कैनबरा से अपने राजदूत को वापस बुला लिया। हालांकि, वर्तमान रक्षा मंत्री मार्लेस ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि हेलीकॉप्टर सौदे से फ्रांस के साथ ऑस्ट्रेलिया के संबंध खराब नहीं होंगे, जो कि पनडुब्बी विवाद के बाद से कुछ हद तक ठीक हो गए हैं। उन्होंने राष्ट्रीय प्रसारक एबीसी को बताया कि ऑस्ट्रेलिया के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात फ्रांस के साथ ईमानदारी से व्यवहार करना है।
ऑस्ट्रेलिया को चीन से है युद्ध का खतरा
ऑस्ट्रेलिया और चीन के संबंध पिछले तीन साल में सबसे ज्यादा खराब हुए हैं। चीन ने ऑस्ट्रेलिया के कोरोना महामारी को लेकर दिए गए बयान पर काफी नाराजगी जताई है। इसके अलावा क्वॉड और ऑकस समझौते से भी चीन चिढ़ा हुआ है। ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना को लेकर तीन पर सीधा आरोप लगाया था। इसके बाद चीन ने ऑस्ट्रेलिया के कई उत्पादों पर भारी-भरकम टैक्स और कई अन्य पर प्रतिबंध लगाया है। चीनी नौसेना अक्सर ऑस्ट्रेलियाई जलक्षेत्र के आसपास गश्त लगा रही है। इतना ही नहीं, चीन ने ऑस्ट्रेलिया को घेरने के लिए उसके आसपास के छोटे देशों को अपना आर्थिक गुलाम बनाकर सैन्य अड्डा बनाने की तैयारी भी तेज कर दी है।
