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Tuesday, April 7, 2026
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फ्लैट बायर्स को रुलाने वाले बिल्डरों की अब खैर नहीं, इस फैसले को पढ़कर हो जाएंगे गदगद

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नई दिल्ली

दिल्ली-एनसीआर में बिल्डर के सताए लोगों के लिए ये खबर राहत देने वाली है। आप अपनी गाढ़ी कमाई से अपने लिए सपनों का घर खरीदते हैं, लेकिन जब बिल्डर आपको सालों-साल घर का हैंडओवर नहीं करता तो उस दर्द को बयां करना आसान नहीं होता। जिस घर के लिए आपने अपनी सारी सेविंग लगा दी, लोन लेकर ईएमआई भर रहे हैं, लेकिन घर का सपना सपना ही रह जाता है। बिल्डर के दफ्तरों का चक्कर लगाकर लोग थक जाते हैं, लेकिन उनके काम पर जूं तक नहीं रेंगता है। दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए ये फैसला कि किसी खुशखबरी से कम नहीं है। ये रिपोर्ट ऐसे फ्लैट बायर्स को राहत देगी। घर खरीदारों से वादाखिलाफी करना रायगड जिले के बिल्डरों को महंगा पड़ गया है।

महाराष्ट्र रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण (महारेरा) की पहल से राज्य में पहली बार ग्राहकों के नुकसान की भरपाई के लिए डिवेलपर्स की प्रॉपर्टी की नीलामी होने जा रही है। रेरा में दर्ज 27 मामलों के आधार पर 20 जनवरी को पनवेल तहसीलदार कार्यालय में नीलामी की प्रक्रिया को अंजाम दिया जाएगा। रेरा के अनुसार, 20 जनवरी को होने वाली नीलामी के माध्यम से 6.77 करोड़ रुपये की वसूली की जाएगी। रायगड जिले में घर खरीददारों के नुकसान की भरपाई के लिए रेरा की तरफ से कुल 74 मामलों में 15.11 करोड़ रुपये का वॉरंट जारी किया गया था। 74 मामलों में से 27 मामलों की वसूली के लिए शुक्रवार को नीलामी होने वाली है। रायगड जिलाधिकारी और निवासी उप जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।

मामलों का जल्द होगा निपटारा
घर खरीदारों के हितों की रक्षा के लिए सरकार द्वारा रेरा का गठन किया गया है। ग्राहकों को जल्द उनके नुकसान की भरपाई हो सके, इसके लिए रेरा पहले से अधिक सतर्क हो गया है। वसूली के लिए रेरा द्वारा जारी वॉरंट पर आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रखने का काम रेरा के मॉनिटरिंग सिस्टम द्वारा किया जा रहा है। जारी वॉरंट पर वसूली की प्रक्रिया पूरी करने के लिए राज्य के 13 जिलाधिकारियों को कहा गया है। रायगड जिला अधिकारी द्वारा राज्य में पहली बार रेरा के वॉरंट पर पर नीलामी की प्रक्रिया को अंजाम दिया जा रहा है।

यह है प्रक्रिया
घर की बुकिंग के दौरान बिल्डर ग्राहक से जो वादा करता है, उसे पूरा करना बिल्डर के लिए अनिवार्य होता है। तय समय पर घर का पजेशन नहीं देने, प्रॉजेक्ट का काम बीच में रोकने समेत अन्य शिकायतों को लेकर ग्राहक रेरा में मामला दर्ज करवा सकते हैं। ग्राहकों की शिकायत पर रेरा में सुनवाई होती है। सुनवाई के बाद ग्राहक का नुकसान पूरा करने का समय बिल्डर को दिया जाता है। निर्धारित समय में बिल्डर द्वारा रकम जमा नहीं करने पर वसूली करने में जिलाधिकारी की अहम भूमिका होती है। इस कारण वसूली के लिए रेरा की तरफ से जिलाधिकारी को वसूली का वॉरंट भेजा जाता है।

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