तेहरान
पाकिस्तानी नौसेना की एक पनडुब्बी और एक नेवल वेसल को हाल में ही ईरानी बंदरगाह पर देखा गया है। यह पनडुब्बी ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर कई दिनों तक खड़ी रही। बंदर अब्बास बंदरगाह फारस की खाड़ी में होर्मुज जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। इसे वैश्विक ट्रेड रूट में काफी अहम माना जाता है। भारत भी इसी बंदरगाह के जरिए रूस से नया व्यापारिक रूट शुरू किया है। ऐसे में पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी के इस बंदरगाह पर मौजूदगी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। पाकिस्तान शुरू से ही इस ट्रेड रूट पर अपनी नौसेना की पकड़ बनाकर रखना चाहता था, लेकिन ईरान के साथ संबंधों में कड़वाहट ने अभी तक उसे रोक रखा था। अब ईरान अमेरिकी प्रतिबंधों को कमजोर करने के लिए नए दोस्त बनाने की कोशिश में है। माना जा रहा है कि यही कारण है कि उसने पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बियों को अपने बंदरगाह के इस्तेमाल की इजाजत दी है।
कौन सी पाकिस्तानी पनडुब्बी ईरानी बंदरगाह पहुंची
ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह पर दिखी पनडुब्बी का नाम पीएनएस हशमत है। यह फ्रांसीसी मूल की अगोस्ता क्लास की पनडुब्बी है। इस पनडुब्बी को फ्रांस ने दक्षिण अफ्रीका के लिए बनाया था, लेकिन संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों के कारण मजबूरी में पाकिस्तान को बेचना पड़ा था। यह पनडुब्बी 1979 से पाकिस्तानी नौसेना में तैनात है। इसकी लंबाई 67 मीटर और बीम 6 मीटर का है। इसमें दो डीजल इलेक्ट्रिक एसईएमटी पिलस्टिक 16 पीए4 185 वीजी डीजल इंजन लगा हुआ है। ये इंजन 3600 हॉर्स पावर की ताकत पैदा करते हैं। इसमें दो अल्टरनेटर्स भी लगे हुए हैं, जो 1.7 मेगावॉट के मोटर के जरिए 4600 हॉर्स पावर की ताकत पैदा करते हैं। समुद्र की सतह पर यह पनडुब्बी 22 किलोमीटर प्रति घंटा और पानी के अंदर 37 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकती है। पीएनएस हशमत की रेंज 13700 किलोमीटर तक है।
बंदर अब्बास में पाक पनडुब्बी से भारत को कैसे खतरा
बंदर अब्बास ईरान का एक प्रमुख व्यापारिक और नौसैनिक बंदरगाह है। ईरानी नौसेना इसी बंदरगाह के जरिए फारस की खाड़ी पर नजर रखती है। भारत इस बंदरगाह के जरिए रूस से नया व्यापारिक मार्ग खोले हुए है। यूक्रेन युद्ध के शुरू होने के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) का इस्तेमाल कर रूस से व्यापार के समय को लगभग आधा कर लिया है। यह नया ट्रेड रूट 7200 किलोमीटर लंबा है। इसने पाकिस्तान और अफगानिस्तान को बॉयपास कर दिया है। अभी तक भारत से रूस तक माल पहुंचाने के लिए स्वेज नहर के रास्ते 16112 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है। ऐसे में भविष्य में अगर यह ट्रेड रूट एक्टिव हो जाता है तो भारत का व्यापार रूस और दूसरे मध्य एशियाई देशों के साथ कई गुना बढ़ सकता है। इस कारण अगर पाकिस्तानी नौसेना की पनडुब्बी इस बंदरगाह पर पहुंचती है तो इससे भारत के हितों को नुकसान हो सकता है।
बंदर अब्बास से कौन-कौन देशों से व्यापार कर सकता है भारत
अंतरराष्ट्रीय उत्तर दक्षिण परिवहन कॉरिडोर (INSTC) के रास्ते में भारत, रूस और ईरान के अलावा कजाकिस्तान भी आता है। इससे भारत के माल को मध्य एशियाई देशों तक पहुंचाने में काफी सहूलियत मिल सकती है। हालांकि, भारत से बंदरअब्बास बंदरगाह तक का रास्ता पाकिस्तानी जल क्षेत्र के पास से होकर गुजरता है। ऐसे में इस रूट से होने वाले व्यापार पर पाकिस्तानी नौसेना करीबी नजर रखती है।
