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पेशावर हमले के बाद दहशत में पाकिस्तान, अब तालिबान से ही लगा रहा मदद की गुहार

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नई दिल्ली,

पाकिस्तान इन दिनों संकट के दौर से गुजर रहा है. हाल ही में पेशावर की मस्जिद में हुए आत्मघाती बम धमाके के बाद पाकिस्तान की सरकार ने प्रतिबंधित तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) पर लगाम लगाने के लिए तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा से दखल देने की मांग की है.

पाकिस्तान की मीडिया के मुताबिक शुक्रवार को पेशावर में शीर्ष समिति की बैठक हुई थी. इसमें फैसला लिया गया था कि TTP को रोकने के लिए तालिबान के प्रमुख नेता हिबतुल्लाह अखुंदजादा के हस्तक्षेप की मांग की जाएगी. इस मामले को अफगानिस्तान की वर्तमान सरकार के साथ प्रमुखता से उठाया जाएगा. बैठक में कहा गया कि पाकिस्तान अब “सीमा पार” आतंकवाद बर्दाश्त नहीं करेगा.

वहीं, टोलो न्यूज के मुताबिक अफगानिस्तान के अधिकारियों ने अब तक इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है. लेकिन वे पहले भी साफ कर चुके हैं कि मौजूदा सरकार अन्य देशों खासकर पाकिस्तान को अफगानिस्तान से खतरा नहीं होने देगी.

दरअसल, पेशावर अटैक की शुरुआती जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान यानी टीटीपी की ओर ली गई थी, टीटीपी ने कहा है कि उन्होंने पिछले साल अगस्त में अपने नेता उमर खालिद खुरासनी की हत्या का बदला लिया लिया है. टीटीपी ने खुले आम ये दावा कर पाकिस्तान की सरकार को खुली चुनौती दे दी है.

हालांकि बाद में टीटीपी ने इस घटना से खुद को अलग कर लिया था. साथ ही अपनी संलिप्तत से इनकार करते हुए इस हमले की निंदा की थी. खैबर पख्तूनख्वा के आईजी मौज्जम जाह अंसारी ने कहा था कि TTP ने इस हमले में शामिल होने से इनकार कर दिया है. इसके बाद और पुलिस को संदेह है कि जमातुल अहरार इस घटना में शामिल हो सकता है.

क्या हुआ था पेशावर में?
पाकिस्तान के पेशावर में पुलिस लाइन में स्थित मस्जिद में एक आत्मघाती हमला हुआ था. इसमें 100 से ज्यादा लो मारे गए थे. जबकि घायलों को पेशावर के लेडी रीडिंग हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. गंभीर रूप से कई घायलों का अभी भी इलाज किया जा रहा है. मरने वालों में ज्यादातर पुलिसकर्मी शामिल थे.

कौन है टीटीपी?
पाकिस्तानी तालिबान को तहरीक ए तालिबान (TTP) नाम से भी जाना जाता है. यह अफगानिस्तानी तालिबान का हिस्सा नहीं है, लेकिन उससे जुड़ा हुआ है. पिछले 14 साल से टीटीपी का पाकिस्तान में कई हमलों के पीछे हाथ रहा है. टीटीपी लंबे समय से पाकिस्तान में इस्लामी कानूनों को सख्ती से लागू करने के लिए संघर्ष कर रहा है. टीटीपी की मांग है कि उसके सभी नेताओं को जेल से छोड़ा जाए. साथ ही पाकिस्तान के आदिवासी क्षेत्रों में तैनात फौज को कम किया जाए.

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