नई दिल्ली
जंगल में सन्नाटा पसरा है, यह कैसा मातम है… अगर हम जंगल की आबोहवा को महसूस कर पाते तो शायद इस समय यह सवाल हमारे जेहन में होता। इस साल एक महीने में ही भारत ने अपने 24 टाइगर खो दिए। यह आंकड़े चिंतित करने वाले हैं। 1 जनवरी से 8 फरवरी 2023 के बीच बिग कैट का इतना बड़ा नुकसान पर्यावरण प्रेमियों और जंगल-जानवरों के महत्व को समझने वाले हर इंसान को दुखी कर रहा है। टाइगरों का परिवार भी दुखी होगा। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण का डेटा TOI को मिला है। इससे पता चलता है कि पिछले साल इसी अवधि में 16 बाघों की मौत हो गई थी। उससे पहले 2021 में 20 टाइगर मारे गए थे। ऐसे समय में जब देश चीतों की आबादी बढ़ाने के लिए विदेश से उन्हें विशेष विमान से ला रहा है, अपने बाघों की लगातार मौत गंभीर चिंता की वजह है।
जी हां, इस साल बाघों की सबसे ज्यादा मौतें मध्य प्रदेश (9) में हुई हैं। यह वही राज्य है, जहां के कुनो नेशनल पार्क में विदेश से लाए गए चीतों को छोड़ा गया था। उस समय एमपी काफी चर्चा में रहा था। अब यह दुखद आंकड़ा भी एमपी से ही आया है। इसके बाद महाराष्ट्र में 6, राजस्थान में 3, कर्नाटक में 2, उत्तराखंड में 2 और असम-केरल में 1-1 बाघ की मौत हुई है।
जनवरी का किलर महीना
इसे संयोग कहें या कुछ और! पिछले दशक में जनवरी के महीने में ही सबसे ज्यादा टाइगरों की मौत दर्ज की गई है। NTCA का डेटा बताता है कि 2012-2022 के बीच जनवरी में 128 बाघों की मौत हुई जबकि मार्च के महीने में 123 और मई में 113 बाघों की जान गई। अगर कारणों की पड़ताल करें तो पता चलता है कि ज्यादातर मौतों की वजह प्राकृतिक थी। इसमें क्षेत्रीय संघर्ष और उम्र भी अहम कारण बना। अधिकारियों का कहना है कि वे डेटा की जांच कर रहे हैं और शिकार वाले एंगल को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।
टाइगरों का घर है भारत
एक एनटीसीए अधिकारी ने कहा कि देशभर में 3,000 से ज्यादा टाइगर हैं। कुछ की मौत तो सामान्य है लेकिन ज्यादा बाघों की मौत होना चिंता की बात और ऐसे में प्रोटोकॉल के तहत जांच की जा रही है। दुनिया में सबसे ज्यादा टाइगर भारत में ही रहते हैं। जंगल की जैव-विविधता को बनाए रखने के लिए भी बाघ महत्वपूर्ण हैं। मध्य प्रदेश में सबसे ज्यादा बाघ पाए जाते हैं। यह आंकड़ा 600 के करीब है लेकिन अब इस बिग कैट की जान बचाने के लिए भी विशेष योजना बनानी होगी। शायद, जंगल में बाघों का कुनबा भी राह देख रहा होगा, जिससे मौतों का यह सिलसिला थम जाए।
