6.5 C
London
Sunday, April 19, 2026
Homeराष्ट्रीयगांधी हत्या का मुकदमा शुरू होते ही सावरकर ने की थी खास...

गांधी हत्या का मुकदमा शुरू होते ही सावरकर ने की थी खास डिमांड, जज ने फौरन पूरी कर दी थी मांग

Published on

नई दिल्ली

मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या के बाद 13 मई, 1948 को सरकारी अधिसूचना जारी कर लाल किले को विशेष अदालत में तब्दील किया गया था। मामले की सुनवाई औपचारिक रूप से 27 मई, 1948 को शुरू हुई थी।गांधी हत्या मामले में नाथूराम गोडसे और विनायक दामोदर सावरकर समेत नौ लोग अभियुक्त थें। सावरकर को सुनवाई शुरू होने से दो दिन पहले 25 मई को हवाई जहाज से मुंबई से दिल्ली लाया गया था। मुकदमा शुरू होने के ठीक एक दिन सावरकर का जन्मदिन था। वह 28 मई, 1948 को पैंसठ साल के हुए थे।

मुकदमा शुरू होने से पहले सावरकर की मांग
27 मई, 1948 के दिन लाल किला में मुकदमा शुरू होने को था। दिल्ली में झुलसा देने वाली गर्मी थी, लेकिन कोर्ट रूम में लोग भरे हुए थे। अभी सुनवाई शुरू होती उससे पहले ही सावरकर के वकील एलबी भोपटकर ने जज आत्मा चरण के सामने एक विशेष डिमांड रख दी।

भोपटकर ने सावरकर के खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए कहा, मेरे मुवक्किल के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें लकड़ी के तख्ते पर बैठाने की बजाए आरामदेह कुर्सी उपलब्ध कराई जाए।दरअसल किले की सबसे ऊपरी मंजिल को अदालती कक्ष का रूप दिया गया था। लकड़ी का एक चबूतरा जज और अदालत के रिपोर्टर की सीट थी। कमरे में बाईं ओर खड़े होकर गवाहों को अपने बयान दर्ज कराने थे। वहीं दाईं ओर लकड़ी के तख्तों पर अभियुक्तों के बैठने की व्यवस्था की गई थी।

लेकिन सावरकर के वकील की मांग थी कि उनके मुवक्किल को आरामदेह कुर्सी दी जाए। पेंगुइन से दो खंडों में प्रकाशित सावरकर की जीवनी के लेखक विक्रम संपत ने अपनी किताब में बताया है कि जज ने सावरकर के कमजोर स्वास्थ्य को देखते हुए वकील भोपटकर की प्रार्थना तुरंत स्वीकार कर ली।

कोर्ट में खामोश रहते थे सावरकर
विक्रम संपत ही लिखते हैं कि सावरकर कोर्ट में धोती, कमीज और खुले कॉलर वाला कोट, ऊंची टोपी, चश्मा और चप्पल पहनकर पहुंचते थे। सुनवाई के दौरान वह कभी-कभार ही अपने वकीलों भोपटकर या गणपत राय से बात करते थे, बाकी समय खामोश बैठे रहते थे। वहीं दूसरे अभियुक्त अक्सर एक दूसरे से हंसी-मजाक करते नजर आते थे।

लाल किला और ऐतिहासिक मुकदमें
दिल्ली का ऐतिहासिक लाल किला मुगलों के पतन के बाद कई महत्वपूर्ण मुकदमों का गवाह बना। वहां 1857 की क्रांति के बाद आखिरी मुगल बहादुरशाह जफर पर मुकदमा चला। 1945 में अंग्रेजों के खिलाफ सशस्त्र आंदोलन छेड़ने वाले सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज के पकड़े गए सिहापियों पर केस चला। आजादी के बाद लाल किला में पहला मुकदमा मोहनदास मोहनदास करमचंद गांधी की हत्या का चला था।

Latest articles

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...

छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी को 50 लाख की प्रोत्साहन राशि, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने किया सम्मानित

रायपुर। भारत को कबड्डी विश्वकप और एशियन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक दिलाने वाली छत्तीसगढ़...

राजस्थान की बेटियां हर क्षेत्र में बना रही हैं अपनी विशिष्ट पहचान : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की छात्राओं के साथ वर्चुअल संवाद के माध्यम...

77वें राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने की शिरकत

जयपुर। राजस्थान पुलिस के 77वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित राज्य स्तरीय समारोह...

More like this

महिला आरक्षण बिल पास नहीं हुआ, PM बोले- माफी मांगता हूं

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राष्ट्र को संबोधित किया। इस दौरान पीएम...

54 वोट से गिरा महिला आरक्षण से जुड़ा बिल: पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298

मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम नई दिल्ली। महिला आरक्षण बिल से...

गेल (इंडिया) ने उप्र और महाराष्ट्र में लगाएगी 700 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता का सोलर प्लांट

नई दिल्ली। गेल (इंडिया) लिमिटेड ने उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में 700 मेगावाट सौर...