– स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी और गंदगी का साम्रराज्य
– इंदौर तर्ज पर नहीं बन सका दूसरा सुपर मॉडल स्पेशलिस्ट अस्पताल
– सरकार की बेरूखी के चलते श्रमिक वर्ग परेशान
भोपाल
एक दशक से प्रदेश सरकार के श्रम विभाग और केन्द्र सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम ईएसआईसी के नुमाइन्दों की बेरूखी के चलते भेल के सोनागिरी राज्य कर्मचारी बीमा अस्पताल बदहाल है । न तो यहां कोई सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं और न ही मरीजों की जांच के लिये बेहतर मशीनें हैं साफ जाहिर है कि यहां का श्रमिक वर्ग बजाय इस चिकित्सालय के बाहर रेफर किये जा रहे हैं। इंदौर की तर्ज पर इस अस्पताल को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाने का प्रस्ताव राज्य और केन्द्र सरकार की आपसी लड़ाई के चलते ठंडे बस्ते में बंद होता दिखाई दे रहा है । इसके लिये गोविंदपुरा विधान सभा क्षेत्र की विधायक श्रीमती कृष्णा गौर ने ऐड़ी से चोटी तक का जोर लगा लिया लेकिन उनकी भी कोई सुनने वाला नहीं ।
ऐन चुनाव के वक्त वह बार-बार सरकार से कह रही हैं कि इस सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल के बनने से करीब ढ़ाई लाख से ज्यादा श्रमिक वर्ग और उनके परिवार को लाभ पहुंचेगा लेकिन न तो श्रम विभाग ध्यान दे रहा है और न ही केन्द्र सरकार । उनके विधान सभा क्षेत्र में इस अस्पताल को सुपर स्पेशलिस्ट बनाया जाता है तो साफ जाहिर है कि इसका फायदा उनकी पार्टी को भी मिलेगा ।
आज स्थिति यह है कि ईएसआई एक्ट में कवर होने वाले कर्मचारी और श्रमिक के परिजनों को मुफ्त ईलाज मुहैया कराने वाले बीमा अस्पताल की व्यवस्था चर्मा गई है । यूं तो ईएसआईसी कमेटी ने प्रदेश के कर्मचारियों को बेहतर ईलाज कराने के लिये बीमा अस्पतालों को निगम में मर्ज कराने का फैसला लिया था जिस पर आज भी अमल नहीं हो पा रहा है । सिर्फ उनके बीच पत्राचार की फेरिश्त भी देखी जा सकती है जबकि एमओयू भी हो चुका है ।
एक नजर में देखा जाये तो राज्य सरकार के 6 बीमा अस्पताल व 20 डिस्पेंसनरियां ईएसआईसी में मर्ज होना है ईएसआईसी के पास कर्मचारी व नियोक्ता से मिलने वाले अंश दान के चलते करीब कई करोड़ रूपये सरप्लस में है इतनी बड़ी राशि से निगम मर्जर के बाद इन अस्पतालों में भी सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं के साथ इन्हें अपग्रेड कर सकता है । इससे अस्पताल के कर्मचारी और डॉक्टरों को भी निगम से अच्छा वेतन व बेहतर सुविधायें मिल सकेंगी ।
लेकिन नौकर शाही के चलते उनका यह सपना पूरा नहीं हो सका आज भी केन्द्र सरकार की हरी झंडी के बाद मप्र का श्रम विभाग इस अस्पताल को केन्द्र सरकार को सौंपनेें को तैयार नहीं है । यही कारण है कि करीब ढ़ाई लाख से ज्यादा मजदूर सही स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम में सोनागिरी के बीमा अस्पताल को 6 जून 2022 को ही सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल बनाने के लिये अप्रुवल दे चुका था ।
100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में लगातार न तो स्पेशलिस्ट डॉक्टर दिखाई देते है और न ही बेहतर ईलाज के लिये अत्याधुनिक मशीने साफ सफाई का तो दूर-दूर तक पता नहीं है 1965 में बने इस अस्पताल को अत्याधुनिक बनाने के लिये पहले राज्य सरकार फिर केन्द्र सरकार ने अप्रुवल दिया । खास बात यह है कि इस अस्पताल के बन जाने से जहां मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिलेगा वहां राज्य सरकार ने करीब 80 से 85 करोड़ बचेगा ।
आज स्थिति यह है कि जहां श्रम एवं रोजगार मंत्रालय भारत सरकार के कर्मचारी राज्य बीमा निगम खर्च के लिये करीब तीन सौ करोड़ दे रहा है उसका आधा भी इन अस्पतालों पर खर्च नहीं कर पा रहा है श्रमिक वर्ग को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें भी नहीं मिल पा रही है । यही कारण है कि इंदौर के बाद मप्र में दूसरा सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल भोपाल में शुरू हो जाये तो श्रमिकों को काफी लाभ मिलेगा।
इनका कहना है:-
गोविंदपुरा विधान सभा क्षेत्र में राज्य बीमा चिकित्सालय को सुपर स्पेशलिस्ट अस्पताल का दर्जा मिलना है लेकिन कुछ अफसरों की मनमानी के चलते लंबे समय से इसे केन्द्र सरकार के हैंड ओवर नहीं किया जा रहा है । इस संबंध में मुख्यमंत्री और श्रम मंत्री से अनुरोध है कि गरीब श्रमिकों के हित में इस अस्पताल को जल्द ही केन्द्र सरकार के हैंड ओवर किया जाये ताकि ढ़ाई लाख श्रमिकों के परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें मिल सके।
श्रीमती कृष्णा गौर
विधायक गोविंदपुरा विधान सभा क्षेत्र
