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Wednesday, April 1, 2026
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सांप के काटने से हुई चीता ‘उदय’ की मौत? एक्सपर्ट का खुलासा सुन हिल जाएंगे

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भोपाल

क्या चीता ‘उदय’ की मौत सांप के काटने से हुई है? कूनो नेशनल पार्क में 6 साल के चीते ‘उदय’ की अचानक मौत को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है। अभी तक की जांच में जो बातें सामने आई हैं वो कई सवालों को जन्म दे रहीं। सबसे बड़ी टेंशन यही है कि आखिर चीतों की सुरक्षा कैसे होगी। ये सवाल इसलिए अहम है क्योंकि अफ्रीकी देशों से कूनो में शिफ्ट किए गए चीतों में से दो की जान जा चुकी है। 27 मार्च को नमीबिया से आए ‘साशा’ नाम के चीते की जान गई थी। अब चीते ‘उदय’ की मौत से एक्सपर्ट परेशान हो उठे हैं। वो इस बात की जांच कर रहे कि आखिर ‘उदय’ की जान गई कैसे?

एक्सपर्ट्स को है पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
कूनो नेशनल पार्क में चीता ‘उदय’ की मौत को लेकर एक्सपर्ट्स ने कई संभावनाओं का जिक्र किया है। वो इस बात की जांच कर रहे कहीं सांप के काटने से तो चीता ‘उदय’ की जान नहीं गई। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, उन्हें उम्मीद है कि ऑटोप्सी रिपोर्ट से स्थिति साफ हो जाएगी। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के महानिरीक्षक अमित मल्लिक ने सोमवार को कूनो का दौरा किया। उनकी मौजूदगी में ‘उदय’ के शव का पोस्टमार्टम किया गया। फॉरेंसिक जांच के लिए ब्लड सैंपल भेजे गए।

कूनो में चीता उदय को हुआ क्या, सस्पेंस गहराया
‘उदय’ दक्षिण अफ्रीका के वॉटरबर्ग इलाके में स्थित मतलाबास नदी के पास पकड़ा गया मेल चीता था। उसकी उम्र करीब 6 साल थी। अफ्रीका से 18 फरवरी को लाए गए 12 चीतों के बैच में उदय भी शामिल था। ‘उदय’ की सेहत को लेकर चीतों की निगरानी करने वाले वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट्स उस समय परेशान हो गए जब उन्होंने रविवार को उसे डगमगाते हुए देखा। ‘उदय’ की गर्दन नीचे झुकी हुई थी और वो ठीक से चल भी नहीं पा रहा था। उसे तुरंत इलाज के लिए ट्रैंकुलाइज किया गया लेकिन कुछ ही घंटों में उसकी मौत हो गई।

दो चीतों की मौत तो प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों में हड़कंप
प्रोजेक्ट चीता से अधिकारी अचानक हुए इस घटनाक्रम से सन्न रह गए। ऐसा इसलिए क्योंकि चीता ‘उदय’ को पिछले दिनों ही अच्छे स्वास्थ्य को लेकर क्लीन चिट दिया गया था। एक महीने के भीतर लगातार दो चीतों की मौत ने एक्सपर्ट की चिंता बढ़ा दी है। चीता कंजर्वेशन फंड (CCF) के कार्यकारी निदेशक लॉरी मार्कर ने टीओआई को बताया कि साइंटफिक तौर पर हम निष्कर्ष पर आने से पहले नेक्रोप्सी के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं। ‘उदय’ की मौत अचानक हुई है, ये बेहद परेशान करने वाली वजह है। जिस तरह से ‘उदय’ की तबीयत बिगड़ने पर उसे जरूरी इलाज मुहैया कराया गया। बावजूद इसके जैसे उसकी मौत हुई ये सारे प्वाइंट्स हमें अलर्ट कर रहे हैं।

उदय की मौत में नेक्रोप्सी रिजल्ट का इंतजार​
लॉरी मार्कर ने ये भी कहा कि हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि चीतों की सेहत को लेकर जरूरी बातों को समझें। उनकी तबीयत बिगड़ने पर तुरंत ही उन्हें स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करा सके। फिलहाल ‘उदय’ की मौत को लेकर बस यही कहूंगी कि हम वास्तव में ज्यादा कुछ नहीं जानते। हम आगे टिप्पणी करने से पहले नेक्रोप्सी के रिजल्ट देखेंगे उसके बाद ही कुछ कह सकेंगे। चीतों की सुरक्षा एक लॉन्ग टर्म प्रयास है। हमारे पास अभी कई चीता शावक हैं। ये इस प्रोजेक्ट की व्यवहार्यता का प्रारंभिक संकेत भी हैं।

कूनो में शिफ्ट चीतों की सुरक्षा को लेकर एक्सपर्ट्स परेशान
लॉरी मार्कर ने टीओआई से बातचीत में ये भी बताया कि नामीबिया से आए चीते जल्दी ही इस क्षेत्र के अनुकूल हो गए। वो स्वतंत्र रूप से शिकार कर रहे हैं। यही नहीं भारत में शिकार के साथ फल-फूल रहे हैं। उनकी सुरक्षा को लेकर अच्छी टीम मौजूद है। ये लगातार सीख रही है। हमें भारतीय टीम पर भरोसा है और प्रोजेक्ट चीता की सफलता के प्रति आश्वस्त हैं।

चीता उदय की मौत को लेकर जताई जा रही ये भी आशंकाएं
जर्नल ऑफ द साउथ अफ्रीकन वेटरनरी एसोसिएशन के एडिटर और एक्सपर्ट प्रोफेसर एड्रियन एस डब्ल्यू टोरडिफ ने भी कहा कि कुछ चीतों की मौत दुखद है। लेकिन ये इस बात का संकेत नहीं है कि प्रोजेक्ट फेल हो रहा। एक नई आबादी को कहीं शिफ्ट करते हुए अकसर ऐसा होता है कि कुछ जानवरों के लिए वो इलाका अनुकूल होगा। ऐसे में वो जीवित रहेंगे तो कुछ के अनुकूल नहीं होने पर उन्हें मुश्किल आएगी। यह जीवन का सिर्फ एक हिस्सा है। फिलहाल चीता उदय की मौत को लेकर सस्पेंस बना हुआ है। कुछ जानकारों का कहना है कि ‘उदय’ की मौत हार्ट और लिवर के काम बंद करने से हुई। कुछ एक्सपर्ट के मुताबिक, खराब खाना भी उसके मौत की वजह हो सकती है।

 

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