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Thursday, May 14, 2026
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कांग्रेस की हरी झंडी मिलते ही सक्रिय हुए नीतीश कुमार, जानिए आगे का प्लान

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पटना

बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर इन दिनों विपक्षी एकता की धुन सवार है। विपक्षी एकता की योजना तब बनी थी, जब नीतीश ने एनडीए से अलग होकर महागठबंधन से हाथ मिला लिया था। लालू यादव की सलाह थी कि नीतीश को राष्ट्रीय राजनीति में फिर से उतरना चाहिए। तब आरजेडी की ओर से नीतीश को यह प्रलोभन भी दिया गया था कि वे महागठबंधन की ओर से पीएम का फेस बनेंगे। अंदरखाने लालू-नीतीश के बीच हुई बातचीत का ब्योरा किसी सूत्र ने नहीं, बल्कि आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने ही मीडिया को दिया था। लालू ने किडनी ट्रांसप्लांट के लिए सिंगापुर जाने से पहले ही नीतीश की सोनिया गांधी से मुलाकात भी करा दी थी। उसके बाद नीतीश चुप्पी साध गए थे। वे बार-बार दो बातें दोहरा रहे थे। पहला यह कि वे पीएम का फेस नहीं बनेंगे। दूसरा, कांग्रेस विपक्षी एकता की पहल करे। कांग्रेस की चुप्पी देख नीतीश भी शांत हो गए थे।

कांग्रेस की हरी झंडी मिलते ही सक्रिय हुए नीतीश
कांग्रेस की जैसे ही उन्हें हरी झंडी मिली, उनमें तेजी आ गई। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नीतीश को फोन किया तो वे दिल्ली पहुंच गए। अब चूंकि यह साफ हो गया है कि राहुल गांधी के चुनाव लड़ने पर संशय है तो कांग्रेस को भी विपक्षी दलों की जरूरत महसूस होने लगी है। काफी समय से नीतीश कांग्रेस नेताओं से पहल की गुजारिश कर रहे थे, लेकिन राहुल को लेकर कांग्रेस दुविधा में थी। कांग्रेस को लगता था कि राहुल ही पार्टी के पीएम फेस होंगे तो दूसरे दलों से बातचीत की अभी कोई जरूरत नहीं है। लेकिन मानहानि केस में राहुल को सजा हो जाने के बाद उनकी दावेदारी प्रायः खत्म हो चुकी है। यही वजह है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने नीतीश कुमार और शरद पवार को सबसे पहले फोन किया। इन दोनों पर कांग्रेस को भरोसा इसलिए है कि शरद पवार ने ममता बनर्जी के कांग्रेस रहित विपक्षी एकता का प्रस्ताव ठुकरा दिया था तो नीतीश ने विपक्षी एकता की पहल के लिए कांग्रेस से गुजारिश की थी।

राहुल-खरगे से मिलने के बाद उत्साह बढ़ा है
खरगे और राहुल गांधी से मुलाकात के बाद नीतीश कुमार का उत्साह बढ़ा है। दिल्ली दौरे में ही उन्होंने आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल और सीपीएम लीडर सीताराम येचुरी से भी नुलाकात की थी। नीतीश को सुनने या मिलने के लिए अब शायद किसी दल को इसलिए भी आपत्ति नहीं हो सकती, क्योंकि वे पीएम फेस बनने से मना कर चुके हैं। यानी जिन विपक्षी दलों के नेताओं के मन में पीएम बनने की महत्वाकांक्षा हिलोरें मारती रही हैं, उन्हें भी नीतीश से बात करने में अब कोई हिचक नहीं है। ममता बनर्जी और अखिलेश यादव से नीतीश की मुलाकात भी हो चुकी है।

पीएम पद की लालसा नहीं तो बेचैनी क्यों ?
किसी को यह बात समझ में नहीं आ रही कि नीतीश कुमार जब खुद पीएम फेस बनने को तैयार नहीं तो दूसरों के लिए वे इतनी मेहनत क्यों कर रहे हैं। सच यह है कि नीतीश कुमार के दोनों हाथ में लड्डू है। एक तो 2025 तक उन्होंने आरजेडी से बिहार में सीएम बने रहने का समय ले लिया है। उन्होंने घोषणा कर दी है कि 2025 का बिहार विधानसभा चुनाव तेजस्वी यादव के नेतृत्व में होगा। यानी 2025 तक उनकी कुर्सी खतरे में नहीं दिखती। विपक्षी एकता की मुहिम अगर कामयाब हो जाती है तो संभव है कि दो के झगड़े में तीसरे को लाभ हो जाए। यानी पीएम पद के लिए जब कई नाम सामने आएंगे तो समन्वय के काम में जुटे नीतीश को कहीं मौका न मिल जाए।

बीजेपी की ताकत और विपक्ष का हश्र पता है
नीतीश कुमार की विपक्षी एकजुटता मुहिम में यहां-वहां घूमने को लेकर बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी का कहना है कि नीतीश राजनीतिक पर्यटन कर रहे हैं। शायद उनके दिमाग में पर्यटन की बात इसलिए आई हो कि नीतीश चार्टडर्ड विमान से एकता की मुहिम चला रहे हैं। बहरहाल, नीतीश की विपक्षी एकता की कामयाबी पर इसलिए संदेह होता है कि 2019 में विपक्षी दलों का इससे भी बड़ा जुटान हुआ था, लेकिन कामयाबी न के बराबर मिली थी। खुद नीतीश की पार्टी को बीजेपी की मदद से ही कामयाबी मिल पाई थी। वर्ना 2014 में तो उन्हें दो ही सीटों से संतोष करना पड़ा था। यह भी संभव है कि नीतीश को इस बात का एहसास हो गया हो कि विपक्षी एक होकर भी बीजेपी का कुछ बिगाड़ नहीं पाएंगे। अव्वल तो विपक्षियों का एकजुट हो जाना और पीएम पद के लिए आपस में न उलझना सबसे बड़ी चुनौती है। टिकटों का बंटवारा दूसरी चुनौती है। सच यही है कि नीतीश अपनी उम्र का जिस तरह हवाला देते रहते हैं, उससे लगता है कि अब वे और सक्रिय राजनीति में नहीं रह पाएंगे। विधानसभा चुनाव के दौरान अनायास ही उन्होंने कह भी दिया था कि यह उनका आखिरी चुनाव है। बिहार में अपने सहयोगी दल आरजेडी की इच्छा का पालन करते हुए उन्होंने विपक्षी एकता का बीड़ा उठाया है, ताकि 2025 तक उनके कार्यकाल में कोई बाधा उत्पन्न न हो।

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