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Wednesday, April 1, 2026
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‘द केरल स्‍टोरी’ पर बैन की मांग, विपुल शाह बोले- फिल्‍म लव जिहाद पर नहीं, पीड़‍ितों की कहानी है

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सुदीप्‍तो सेन के डायरेक्‍शन में बनी फिल्‍म ‘द केरल स्‍टोरी’ रिलीज से पहले ही विवादों का सामना कर रही है। फिल्‍म के ट्रेलर की रिलीज के साथ ही अब इसकी आलोचना हो रही है। कांग्रेस समेत मार्क्‍सवादी कम्‍यूनिस्‍ट पार्टी की यूथ विंग डीवाईएफआई और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) की यूथ लीग ने इस फिल्‍म की रिलीज पर बैन लगाने की मांग की है। फिल्‍म की कहानी चार महिलाओं की है, जो धर्म परिवर्तन कर हिंदू से मुसलमान बन जाती हैं और आतंकी संगठन ISIS में भर्ती हो जाती हैं। फिल्‍म के टीजर में यह दिखाया गया कि केरल में 32,000 महिलाओं ने कथित तौर पर इस्लाम कबूल किया और उन्हें आतंकी संगठन द्वारा भर्ती किया गया। राजनीतिक महकमों में जहां फिल्‍म को लेकर विरोध के सुर तेज हो रहे हैं, वहीं ‘द केरल स्‍टोरी’ अगले महीने 5 मई को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है। इसके निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने अब ताजा व‍िवाद पर साफ शब्‍दों में कहा है कि उनकी फिल्‍म ‘लव जिहाद’ के बारे में नहीं है। वह कहते हैं कि यह फिल्‍म पीड़‍ित महिलाओं और लड़कियों की कहानी है।

राजनीतिक दलों ने फिल्‍म की रिलीज का विरोध करते हुए आरोप लगाया कि यह केरल राज्य की नकारात्मक छवि को दिखाने की कोश‍िश है। सीपीआई-एम और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने फिल्म को केरल में रिलीज होने से प्रतिबंधित करने की मांग की है। उनका आरोप है कि यह फिल्‍म संघ परिवार के एजेंडे को पूरा करने के लिए बनाई गई है। इस पूरे विवाद पर फिल्‍ममेकर Vipul Shah ने हमारे सहयोगी ‘ईटाइम्‍स’ से खास बातचीत की है।

‘हमारी फिल्‍म पीड़‍ित लड़कियों की सच्‍ची कहानी है’
वह कहते हैं, ‘The Kerala Story एक लड़की की सच्ची कहानी पर आधारित है, जो धर्म परिवर्तन कर सीरिया जा रही थी। रास्ते में, उसे एहसास हुआ कि यह एक गलती थी और वह भाग निकली। आज, वह अफगानिस्तान की जेल में है। अफगानिस्तान की जेलों में कई लड़कियां हैं। कम से कम चार रिकॉर्ड में हैं। तो, इस तरह हमें इस कहानी के बारे में पता चला और फिर हमने अपनी र‍िसर्च शुरू की। अंत में हमने फिल्‍म में तीन ऐसी लड़कियों की कहानी ली है, जो चालाकी से धर्मांतरण की शिकार हो गईं और उनका जीवन व्यावहारिक रूप से बर्बाद हो गया। यह एक ऐसी कहानी है, जो आपको सुनाने पर करती है। क्योंकि जब हम रिसर्च कर रहे थे तब हमने महसूस किया कि यह संख्या असल में बहुत बड़ी है। हम कम से कम 100 से ज्यादा लड़कियों से मिले। यह एक बड़ा मुद्दा है। हमने पूरी ईमानदारी और पूरी सच्चाई से कहानी कहने की कोश‍िश की है।’

‘लव जिहाद राजनीतिक शब्‍द है, हम बस सच दिखा रहे’
विपुल शाह से पूछा गया कि लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि यह फिल्म लव जिहाद को बढ़ावा देती है? इस पर उन्‍होंने कहा, ‘ये लोगों द्वारा गढ़े गए राजनीतिक शब्द हैं। हमारी फिल्म इन पीड़ित लड़कियों के जीवन के बारे में है। हम सच दिखा रहे हैं। अब आप इसके लिए कौन सा शब्द चुनना चाहते हैं, यह आपकी मर्जी है। हम फिल्‍म के जरिए यही कहना चाह रहे हैं कि हमें इस सच के बारे में, इन पीड़‍ितों के लिए कुछ करना चाहिए।’

‘जब अपराधी सांप्रदायिक सद्भाव की बात नहीं करते, तो हम क्‍यों’
क्या पर्दे पर ऐसी कहानी दिखाना मुश्किल है, जिसका कोई राजनीतिक हित हो और जो सांप्रदायिक सद्भाव को चोट पहुंचाता हो? इस सवाल के जवाब में विपुल शाह कहते हैं, ‘हमें यह कहकर छिपना बंद करना होगा कि यह बहुत संवेदनशील है और इसलिए हमें ऐसा नहीं करना चाहिए। या यह कि इससे सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ेगा। जब अपराधी ऐसा करते हैं तो क्या वे सांप्रदायिक सद्भाव के बारे में सोचते हैं? वे जाते हैं और वही करते हैं जो उनका एजेंडा है। तो, हमें इसके बारे में चिंता क्यों रहना चाहिए? संवेदनशीलता एक तरफा सड़क नहीं हो सकती। इसे दो-तरफा होना होगा। अगर वे ऐसा करने जा रहे हैं, तो कोई न कोई सामने आएगा और इसका भी पर्दाफाश करेगा।’

‘उम्‍मीद है मुसलमान बिरादरी आगे आएगी’
विपुल शाह आगे कहते हैं, ‘उदाहरण के लिए, हिंदू धर्म में सती प्रथा एक बुरी प्रथा थी, इसलिए हमने इसे मिटा दिया, है ना? हिंदुओं ने ही इसे मिटाने का काम किया था, है ना? आज मैं मुस्लिम बिरादरी के आगे आने की उम्मीद कर रहा हूं, क्योंकि मैं जानता हूं कि इस देश और दुनिया में करोड़ों मुसलमान हैं। आगे आइए, इन लोगों को सलाखों के पीछे डालिए और इसे रोकिए। सही काम करने के लिए एक फिल्म बनाने की नौबत क्यों आनी चाहिए? यह संभव नहीं है कि उन्हें जानकारी न हो। मुझे लगता है कि एक देश के तौर पर हम काफी मैच्‍योर हैं और हमें पता है कि इस तरह की फिल्म से कैसे निपटना है। मुझे इसकी चिंता नहीं है। मुझे लगता है कि यह बताया जाने वाला एक बहुत ही जरूरी विषय था और हम यही करने जा रहे हैं।’

फिल्‍म के राजनीतिकरण से कोई समस्‍या नहीं
फिल्‍मों पर राजनीति का होना कोई नई बात नहीं है। ऐसे में क्‍या मेकर्स इस बात से कैसे बचते हैं कि उनकी फिल्‍म का राजनीतिकरण हो? इस सवाल के जवाब में विपुल शाह कहते हैं, ‘हर राजनीतिक दल की एक विचारधारा होती है। जिस भी विषय को वे अपनी विचारधारा में फिट देखते हैं, उस पर बात करते हैं। मुझे नहीं लगता कि राजनीतिकरण हमेशा एक बुरी चीज है। जब तर्क मुद्दे से हट जाता है तो वह बुरा हो जाता है। अभी तक मैंने ऐसा कुछ नहीं देखा है, जो मुख्य मुद्दे से भटक रहा हो। इसलिए, राजनीतिक दलों द्वारा इस पर एक नजरिया अपनाने से मुझे कोई समस्या नहीं है। उनकी विचारधारा कुछ भी हो। बस पीड़ितों को नहीं भूलना चाहिए।’

‘अब तक नहीं मिली है कोई FIR की कॉपी’
सोशल मीडिया पर लगातार यह बात हो रही है कि फिल्‍म के ख‍िलाफ कुछ लोग कानूनी कार्रवाई करना चाहते हैं। विपुल शाह कहते हैं, ‘मैंने भी यह सुना है कि केरल में हमारे खिलाफ एक FIR के बारे में किसी ने ट्वीट किया है। लेकिन अभी तक हमारे पास इसकी कोई कॉपी नहीं आई है। यदि वाकई ऐसा हुआ है, तो हम कानूनी आधार पर इससे निपटेंगे।’

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