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Wednesday, April 1, 2026
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पांच साल में खत्म होंगी करोड़ों नौकरियां लेकिन भारत के हिस्से में आएगी खुशखबरी

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नई दिल्ली

दुनियाभर में AI यानी आर्टिफिशियल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। इससे दुनियाभर में करोड़ों नौकरियों पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि इससे टेक्नोलॉजी और साइबरसिक्योरिटी एक्पर्ट्स की नौकरियों के लिए अवसर पैदा होंगे लेकिन इनके मुकाबले नौकरी खोने वाले लोगों की संख्या ज्यादा होगी। माना जा रहा है कि इससे दुनिया के लेबर मार्केट्स में उथलपुथल का नया दौर देखने को मिलेगा। वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम (WEF) की एक रिपोर्ट के मुताबिक एआई, डिजिटाइजेशन, ग्रीन एनर्जी शिफ्ट और सप्लाई चेन के बदलवों के कारण अगले पांच साल में करीब एक चौथाई नौकरियां शिफ्ट हो जाएंगी। यह बात एक सर्वे के आधार पर कही गई है।

इस सर्वे में करीब 800 कंपनियों को शामिल किया गया था जिनमें 1.1 करोड़ से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। इसमें 67.3 करोड़ जॉब्स के डेटासेट का इस्तेमाल किया गया। रिपोर्ट में कहा गया है कि टेक्नोलॉजी और डिजिटाइजेशन से रोजगार पैदा भी होंगे और इससे नौकरियों पर गाज भी गिरेगी। रिपोर्ट के मुताबिक इस कारण 2027 तक 8.3 करोड़ नौकरियां खत्म हो जाएंगी लेकिन 6.9 करोड़ नई नौकरियां पैदा होंगी। कुल मिलाकर टेक्नोलॉजी और डिजिटाइजेशन के कारण 1.4 करोड़ नौकरियां खत्म हो जाएंगी जो टोटल वर्कफोर्स का दो फीसदी है।

किस सेक्टर पर होगा सबसे ज्यादा असर
रिपोर्ट के मुताबिक नौकरियों का सबसे ज्यादा नुकसान बैंक टेलर्स और कैशियर्स जैसे सेक्रेटेरियल और क्लेरिकल जॉब्स का होगा। इसे ऑटोमैटेड किया जा सकता है। लेकिन एआई मशीन लर्निंग स्पेशलिस्ट्स और साइबरसिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की नौकरियों में भारी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। एआई के कारण ChatGPT जैसी वेबसाइट्स उभरकर आई हैं। इससे कई तरह की नौकरियों पर खतरा है। इससे पहे इनवेस्टमेंट बैंक Goldman Sachs की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि एआई से दुनियाभर में 30 करोड़ नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है। यह अमेरिका और यूरोप में एक चौथाई तरह के काम कर सकता है। लेकिन साथ ही इससे नई तरह की नौकरियां मिल सकती हैं और प्रॉडक्टिविटी में उछाल आ सकती है।

डब्ल्यूईएफ के एनालिसिस में दावा किया गया है कि डिजिटल क्रांति से डिजिटल कॉमर्स के क्षेत्र में रोजगार बढ़ोतरी पर सबसे ज्यादा असर होगा। इससे डिजिटल कॉमर्स इंडस्ट्री में दुनियाभर में 20 लाख नई नौकरियां मिलने की संभावना है। इसी तरह सस्टैनिबिलिटी स्पेशलिस्ट्स और एनवायरमेंटल प्रोटेक्शन प्रोफेशनल्स की नौकरियों में 33 फीसदी तेजी आने की संभावना है। हालांकि इस रिपोर्ट के मुताबिक खेती और एजुकेशन में सबसे ज्यादा नौकरियां मिलेंगी। यह भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए अच्छी खबर है। एजुकेशन सेक्टर में रोजगार में 10 फीसदी तेजी आने की उम्मीद है। यूनिवर्सिटी और हायर एजुकेशन से जुड़े इंस्टीट्यूट्स में 30 लाख नौकरियां मिलने की उम्मीद है।

भारत के लिए अच्छी खबर
साथ ही दुनियाभर में एग्रीकल्चर सेक्टर में 40 लाख अतिरिक्त नौकरियां मिलने की उम्मीद है। खासकर मशीन ऑपरेटर, ग्रेडर और सॉर्टर की नौकरियों में खूब इजाफा होगा। इससे एग्रीकल्चर सेक्टर में 15 से 30 फीसदी नौकरियां पैदा होने की उम्मीद है। भारत और ब्राजील उन सात देशों में शामिल हैं जहां महामारी के बाद केयरगिविंग, टीचिंग और हेल्थकेयर जैसी नौकरियों की रफ्तार सुस्त रही है। भारतीय एम्प्लॉयर्स के मुताबिक देश में 22 परसेंट नौकरियों में बदलाव की संभावना है जबकि दुनिया में यह 23 परसेंट है। भारत के कॉरपोरेट सेक्टर को उम्मीद है कि वह नौकरियों की संख्या बरकरार रखने में सफल रहेगा। यानी देश में जितनी नौकरियां खत्म होंगी, उतनी ही नई नौकरियां पैदा होंगी।

बिजनस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 1,287 स्टार्टअप कंपनियां एआई पर काम कर रही हैं। हर कोई कंपनी आज एआई का इस्तेमाल करना चाहती है। फरवरी, 2023 के आंकड़ों के मुताबिक देश में एआई सेक्टर में 45,000 नौकरियां निकली थीं। सबसे ज्यादा मांग डेटा साइंटिस्ट्स और मशीन लर्निंग इंजीनियर्स की है। देश में एआई सेक्टर में काम करने वाली स्टार्टअप कंपनियां अब तक 2.9 अरब डॉलर जुटा चुकी हैं। देश में सबसे ज्यादा वैल्यूएबल एआई स्टार्टअप कंपनी Uniphore है। इसका वैल्यूएशन 250 करोड़ डॉलर है। दूसरे नंबर पर Gupshup (140 करोड़ डॉलर) और तीसरे नंबर पर (100 करोड़ डॉलर) है।

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