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… तो मान लें कि नोटबंदी फेल हो गई! 2000 के जाली नोटों ने खोली सिस्टम की पोल

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नई दिल्ली

RBI ने एक बड़ा फैसला लेते हुए 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर करने का आदेश दे दिया। इस एक आदेश के बाद से ही देश की जनता को आठ नवंबर 2016 का वो दिन याद आया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए नोटबंदी का ऐलान किया था। उस समय पीएम मोदी ने कहा था कि इस एक कदम से आतंकवाद का नेटवर्क ध्वस्त होगा। उन्होंने देश को बताया था कि दुश्मन नकली नोटों का इस्तेमाल अपने ऑपरेशन्स को अंजाम देने में कर रहे हैं। यानी कि नोटबंदी का एक बड़ा उदेश्य जाली नोटों के कारोबार को खत्म करना था, लेकिन क्या ऐसा हो पाया?

सरकार के दावों पर भारी असल आंकड़े
RBI, NCRB और सरकार के ही कुछ आंकड़े हैं जो बताते हैं कि जाली नोट देश में बढ़े हैं, 2000 वाले नोट की तो आसानी से नकल कर ली गई है। नोटबंदी के 6 साल बाद यानी कि 2022 में सरकार ने लोकसभा में एक आंकड़ा रखा था। तब एक लिखित जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा था कि 2019 से 2020 के बीच में 2000 के जाली नोटों में 170 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली। उसी जवाब में सरकार ने बताया कि 2016 में 2000 के दो हजार 272 जाली नोट पकड़े गए, 2017 में 74 हजार 898, 2018 में 54 हजार 776, 2019 में 90 हजार 566 और 2020 में 2 लाख 44 हजार 834, यानी कि साल दर साल ये आंकड़ा बढ़ता गया, जैसे-जैसे नोटबंदी का असर कम हुआ, 2000 नोटों के जाली नोटों का कारोबार बढ़ता चला गया।

2000 के जाली नोटों का भंडार, कैसे सफल नोटबंदी?
एक और आंकड़ा नोटबंदी की विफलता की कहानी बताता है। 2021 में NCRB की एक रिपोर्ट आई थी, उसमें बताया गया कि नोटबंदी के बाद से अब तक जितने भी जाली नोट पकड़े गए हैं, उसमें 60 फीसदी 2000 के नोट रहे। अकेले 2021 में जो 20.39 करोड़ के जाली नोट पकड़े थे, उनमें भी 2000 रुपये वाले नोटों की संख्या 12 करोड़ से ज्यादा रही। NCRB ने उस रिपोर्ट में ये भी खुलासा किया कि सबसे ज्यादा 2000 के जाली नोट तमिलनाडु से पकड़े गए, दूसरे नंबर पर केरल रहा और तीसरे पायदान पर आंध्र प्रदेश।

इससे पहले जो NCRB की एक रिपोर्ट छपी थी, उसमें दावा हुआ कि नोटबंदी के बाद जाली नोटों का सबसे बड़ा गढ़ गुजरात बन गया था। तब पूरे देश के 2000 जाली नोटों का 26 फीसदी हिस्सा गुजरात से ही था, यानी कि आंकड़े बदल सकते हैं, कभी कोई राज्य आगे तो कभी कोई दूसरा राज्य आगे निकल सकता है, लेकिन ये ट्रेंड समान रहा है- देश में नोटबंदी के बाद भी जाली नोटों का कारोबार धड़ल्ले से जारी है। आज भी तमाम रिपोर्ट बता रही हैं कि पाकिस्तान से सबसे ज्यादा जाली नोट भारत आ रहा है, आज भी आतंकवाद में इन्हीं जाली नोटों का इस्तेमाल हो रहा है।

सरकार सही तो 2000 के नोट वापस क्यों?
सरकार दावा करती है कि जाली नोटों के कारोबार को खत्म करने के लिए उसने कई कदम उठाए हैं। उसकी तरफ से टेरर फंडिंग एंड फेक करेंसी सेल का गठन किया गया है। ये सेल NIA के साथ मिलकर उन मामलों की जांच करता है जहां पर टेरर फंडिंग और फेक करेंसी की बात रहती है। सरकार का ये भी तर्क रहा है कि उसने सीमा पर कई और ऑफिसरों को तैनात कर दिया है, पैट्रोलिंग को भी बढ़ा दिया गया है। लेकिन इन सभी दावों के बीच ये सच्चाई सरकार की कई रिपोर्ट ही बता रही हैं कि 2000 रुपये के कई जाली नोट सर्कुलेशन में हैं। कहा जा रहा है कि अब जो 2000 रुपये के नोटों को चलन से बाहर किया गया है, उसका एक बड़ा कारण ये भी है।

काम नहीं आए 2000 रुपये के नोट के सुरक्षा फीचर?
वैसे 2000 रुपये को लेकर तो ये भी दावा किया गया था कि इसमें जो सुरक्षा के फीचर रखे गए हैं, उस वजह से इसकी नकल करना काफी मुश्किल रहेगा। लेकिन यहां भी दावों के सामने आंकड़ों की सच्चाई है ज्यादा हावी है। कहा गया था कि 2000 रुपये के नोट को झुकाने पर धागे का रंग बदलेगा, इसी तरह कहा गया कि नोट पर पोर्ट्रेट और इलेक्ट्रोटाइप वॉटरमार्क होगा। लेकिन आज के समय में जाली और असली नोटों के बीच की पहचान करना फिर चुनौती बन गया है, ऐसे में नोटबंदी के उदेश्यों पर सवाल उठना लाजिमी है।

 

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