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जहरीले केपी ओली, बाबूराम भट्टाराई… नेपाल में ‘अखंड भारत’ पर बवाल, निशाने पर भारतीय संसद, दी चेतावनी

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काठमांडू

भारतीय संसद में अखंड भारत का नक्‍शा लगाए जाने पर नेपाल में बवाल मच गया है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली तथा एक और पूर्व पीएम बाबूराम भट्टाराई ने अखंड भारत के नक्‍शे पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है और चेतावनी भी दी है। बाबूराम भट्टाराई ने तो यहां तक कह दिया कि भारत की संसद में लगे अखंड भारत के भित्ति-चित्र से दोनों देशों के बीच संबंध रसातल में चले जाएंगे। उन्‍होंने चेतावनी दी कि इस अखंड भारत के भित्ति-चित्र से नेपाल समेत पड़ोसी देशों के साथ अनावश्‍यक और नुकसान पहुंचाने वाला विवाद पैदा होगा। यह विवाद तब पैदा हुआ है जब नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड भारत के पहले दौरे पर आ रहे हैं।

चीन के इशारे पर नाचने वाले केपी ओली ने मांग की है कि नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड लुंबिनी और कपिलवस्‍तु को ‘अखंड भारत’ के भित्तिचित्र में शामिल करने के खिलाफ निश्चित रूप से विरोध दर्ज कराएं। लुंबिन भगवान बुद्ध की जन्‍मस्‍थली है। यह वही ओली हैं जो अक्‍सर भारत के खिलाफ जहरीले बयान देते रहते हैं। वहीं नेपाल समाजवादी पार्टी के चेयरमैन बाबूराम भट्टाराई ने एक ट्वीट करके यह भी कहा कि भारतीय नेताओं को इस भित्तिचित्र को लगाए जाने की मंशा और उसके प्रभाव के बारे में रियल टाइम जानकारी देना चाहिए।

आज भारत के दौरे नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड
इस अखंड भारत के भित्तिचित्र में लुंबिनी और कपिलवस्‍तु के अलावा पाकिस्‍तान के तक्षशिला को भी शामिल किया गया है। उन्‍होंने कहा कि भारतीय नेताओं को इस पूरे मामले में सफाई देना चाहिए। अखंड भारत के इस भित्तिचित्र को भारत की संसद भवन की नई इमारत में लगाया गया है। इस बीच नेपाल के प्रधानमंत्री प्रचंड अपने पहले विदेशी दौरे पर आज भारत आ रहे हैं। उनके साथ एक भारी भरकम प्रतिनिधिमंडल है। इस यात्रा के दौरान अखंड भारत का मुद्दा भी गरमा सकता है।

प्रचंड ने कहा है कि उनकी इस भारत यात्रा से लंबे समय के लिए बिजली के व्‍यापार का रास्‍ता साफ होगा। उन्‍होंने आशा जताई कि सभी तरह की बाधाएं दूर हो जाएगी और नेपाल अपनी ज्‍यादा बिजली को आसानी से बेच सकेगा। प्रचंड इस दौरे पर पीएम मोदी, विदेश मंत्री और कई अन्‍य नेताओं से मुलाकात करेंगे। उनका यह दौरा 4 दिन का है। वामपंथी प्रचंड की मंद‍िर भी जाने की योजना है। उन्‍होंने यह भी कहा है कि वह भारतीय नेतृत्‍व से कालापानी सीमा विवाद का मुद्दा भी उठाएंगे। नेपाली पीएम भारत के बाद चीन के दौरे पर भी जाएंगे। इस वजह से इस यात्रा को काफी अहम माना जा रहा है।

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