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शिंदे के इस फैसले से बेचैन हुए शरद पवार, सामने आई 35 मिनट लंबी मुलाकात की असल वजह

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मुंबई

महाराष्ट्र की सियासत में जब से शिंदे- फडणवीस सरकार का उदय हुआ है तब से लेकर अबतक सत्ता पक्ष, महाविकास अघाड़ी को झटके पर झटके दे रहा है। एक बार फिर से शिंदे फडणवीस सरकार ने एमवीए को तगड़ा झटका दिया है। आगामी लोकसभा चुनाव के पहले यह झटका काफी अहम माना जा रहा है। दरअसल महाराष्ट्र की एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस सरकार ने तत्कालीन उद्धव ठाकरे सरकार के एक फैसले को पलट दिया है। नए आदेश के मुताबिक अब सहकारी समितियों में केवल सक्रिय सदस्यों को मतदान करने का अधिकार होगा। शिंदे-फडणवीस सरकार के इस फैसले ने एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार सहित कांग्रेस और उद्धव ठाकरे गुट की मुसीबत बढ़ा दी है। कुछ दिन पहले 1 जून को अचानक शरद पवार सीएम आवास यानी वर्षा पर जाकर मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से मिले थे। महाराष्ट्र में फिलहाल इस बात की चर्चा है कि वह मुलाकात इसी फैसले की वजह से हुई थी।

सरकार ने सहकारिता विभाग के नियमों में फेरबदल करने से महाराष्ट्र की राजनीति में नया ट्विस्ट आ गया है। राज्य की शिंदे-फडणवीस सरकार चाहती है कि सहकारी चीनी कारखानों, डेयरियों और कृषि ऋण समितियों में अब वही सदस्य वोट करें। जो बीते पांच सालों में सक्रिय रहे हों। सरकार के इस फैसले से बाजार समिति में बने हुए निष्क्रिय सदस्य का वोट करने का अधिकार छिन गया है।

…तो इसलिए रखे जाते थे वोटर
फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने को-ऑपरेटिव एक्ट 1960 में जो बदलाव किया है। उससे हाउसिंग सोसाइटी, कमर्शियल प्रिमाइसेस को दूर रखा है। इस क्षेत्र के जानकारों की माने तो कई सहकारिता संस्थाओं में वोटरों के नाम चुनावी फायदा उठाने के लिए रखे जाते थे। जिनका सहकारिता क्षेत्र से रोजमर्रा का कोई संबंध नहीं होता था। महाराष्ट्र में माना जाता है कि सहकारिता क्षेत्र पर शरद पवार की मजबूत पकड़ है। ऐसे में शरद पवार की पकड़ को कमजोर करने के लिए चला गया यह दांव एनसीपी के लिए मुसीबत का सबब बन सकता है।

एकनाथ शिंदे से पवार के मिलने की असल वजह क्या?
आंकड़ों पर यकीन करें तो महाराष्ट्र के सहकारिता क्षेत्र में कुल 5 करोड़ 70 लाख के करीब मेंबर हैं। ग्रामीण महाराष्ट्र में सहकारिता क्षेत्र के सदस्यों का लोकसभा और विधानसभा चुनाव में रोल काफी अहम होता है। राज्य की यह एक सच्चाई है कि ग्रामीण महाराष्ट्र में अधिकतर चीनी मिलें, डेयरी, को-आपरेटिव बैंक पर कांग्रेस-एनसीपी का कब्जा है। लिहाजा शिंदे सरकार के फैसले से परेशान शरद पवार ने गुरुवार की देर रात एकनाथ शिंदे के घर जाकर मुलाकात की थी।

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