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पेट्रोल 200 रुपये, जरूरी दवाओं की कमी, ATM खाली … हिंसा के बाद मणिपुर के कैसे हैं हालात?

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नई दिल्ली

मणिपुर में हिंसक संघर्ष के बाद लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहां के हाईवे ब्लॉक होने के कारण जरूरी चीजों के दाम महंगे हो गए हैं। पेट्रोल की कमी है और इसी कारण जिन पेट्रोल पंपों पर उपलब्ध है, वहां पर लंबी-लंबी कतारें लगी हुई हैं। पेट्रोल ब्लैक में 200 रुपये प्रति लीटर में बिक रहे हैं।

पिछले कई हफ्तों से ऐसा ही है। यही नहीं मणिपुर में जीवन रक्षक दवाओं की भारी कमी है और ATM भी खाली हैं, जिसके कारण लोगों के पास कैश रुपये नहीं है। दुकानें भी कुछ घंटे के लिए ही खुलती हैं। मणिपुर में मेइती और कुकी समुदायों के बीच हिंसा भड़की थी और इसके कारण काफी नुकसान हुआ सरकार के आंकड़ों के अनुसार हिंसा में मरने वालों की संख्या 98 है और 310 लोग इसमें घायल हुए हैं।

दोनों समुदायों के सदस्यों (मेइती और कुकी समुदाय) ने अपने घरों को खो दिया और उन्हें मणिपुर, दिल्ली, दीमापुर या गुवाहाटी स्थित राहत शिविरों में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा। मणिपुर में लोग एक महीने से इंटरनेट कनेक्शन के बिना दुनिया से कटे हुए हैं और हर दिन कुछ घंटों के लिए कर्फ्यू हटने के बाद छोटे-छोटे अंतराल में सामान्य जीवन जी रहे हैं।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक मणिपुर में जरूरी सामानों की कीमत रातोंरात दोगुनी हो गई क्योंकि नागरिक निकायों ने राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 को ब्लॉक कर दिया और मालवाहक ट्रकों को राजधानी इंफाल में प्रवेश करने से रोक दिया गया।

चावल की औसत कीमत पहले के 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है। वहीं सब्जियों की कीमत पर आसमान छू रहा है। प्याज जो पहले 35 रुपये प्रति किलो था, वह अब 70 रुपये और आलू की कीमत 15 रुपये से बढ़कर 40 रुपये हो गई है। अंडे की कीमत अब 6 रुपये प्रति पीस से बढ़कर 10 रुपये प्रति पीस हो गई है। रिफाइंड तेल भी महंगा हो गया है। 220 रुपये का रिफाइंड अब लगभग 250 रुपये से 280 रुपये तक बिक रहा है।

मणिपुर में लोग पेट्रोल ब्लैक में 200 रुपये प्रति लीटर के दाम पर खरीद रहे हैं क्योंकि ज्यादातर पेट्रोल पंपों पर तेल खत्म हो गया है। वहीं जो कुछ पेट्रोल पंप खुले हैं, वहां पर गाड़ियों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। राहत शिविरों में शरण लेने वाले दोनों प्रभावित समुदायों के सदस्यों ने कहा कि सभी के लिए भोजन उपलब्ध नहीं है और उन्हें भूखे पेट सोना पड़ता था। कई राहत शिविरों में लोग बीमार पड़ रहे हैं और उन्हें कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल रही है।

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