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पाकिस्तान पहुंचा रूसी कच्चे तेल से भरा पहला जहाज, भारत के दुश्मन के साथ पुतिन की दोस्ती तो देखें

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इस्लामाबाद

पाकिस्तान को रूस से कच्चे तेल की सीधी आपूर्ति शुरू हो गई है। आज पहली बार एक रूसी तेल टैंकर 45000 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर कराची पहुंचा है। यह कच्चा तेल पाकिस्तानी रिफाइनरियों को परीक्षण के लिए दिया गया है। अगर पाकिस्तान को तेल की गुणवत्ता संतोषजनक लगी तो भविष्य में रूस से और ज्यादा तेल टैंकर पाकिस्तान भेजे जाएंगे। इससे चंद दिनों पहले ही एक रूसी कार्गो शिप पहली बार सीधा पाकिस्तान पहुंचा था। रूस ने अभी तक भारत से दोस्ती के खातिर पाकिस्तान से दूरी बना रखी थी, लेकिन हाल के वैश्विक घटनाक्रम ने पूरे भू-राजनीतिक परिदृश्य को ही बदल दिया है।

हली बार पाकिस्तान पहुंचा रूसी तेल
पाकिस्तानी अधिकारियों ने बताया है कि रूसी कच्चे तेल का पहला बैच कराची पहुंचा है। इस बैच में लगभग 45,000 मीट्रिक टन कच्चा तेल है। इसे कच्चे तेल को परीक्षण के लिए पाकिस्तानी रिफाइनरियों को सौंपा जाएगा। अगर यह सफल रहता है तो पाकिस्तान सरकार को ऊर्जा मूल्य कम करने में बड़ी मदद मिल सकती है। इस हफ्ते एक और तेल टैंकर से 50,000 मीट्रिक टन रूसी कच्चा तेल पाकिस्तान पहुंचने की उम्मीद है। पाकिस्तान इन कच्चे तेल का भुगतान रूबल या रुपये में न कर चीनी मुद्रा युआन में करेगा।

मजबूरी में एक हुए रूस और पाकिस्तान
रूस और पाकिस्तान दोनों हालात के मारे हैं। रूस जहां यूक्रेन युद्ध के कारण पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। वहीं, पाकिस्तान गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है। ऐसे में दोनों देश मुश्किल हालात में एक दूसरे का साथ देकर बेड़ा पार लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान का ऊर्जा संकट दूर हो सकता है। वहीं, रूस को दक्षिण एशिया में एक नया व्यापारिक साझेदार और दोस्त मिल सकता है। अभी तक पाकिस्तान और रूस के बीच व्यापार काफी कम मात्रा में होता है। इसका प्रमुख कारण भारत के साथ रूस की नजदीकी है।

क्या भारत को धोखा दे रहा है रूस
रूस का शुरू से ही कहना है कि चीन या पाकिस्तान के साथ उसकी दोस्ती की तुलना भारत के साथ संबंधों से नहीं की जा सकती है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी कह चुके हैं कि भारत के साथ रूस का ऐतिहासिक संबंध हैं, जो किसी दूसरे देश के रिश्तों से प्रभावित नहीं होने वाले हैं। भारत भी समझता है कि रूस को इस वक्त व्यापारिक साझेदार की जरूरत है, ताकि वह प्रतिबंधों के असर को कम कर सके। रूस ने पाकिस्तान के साथ दोस्ती जरूर की है, लेकिन यह इतनी मजबूत नहीं है कि उसकी तुलना भारत के साथ की जा सके।

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