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MP में किसे मिलेगी जीत? ओपिनियन पोल में कांटे की टक्कर का अनुमान, ये पार्टी रह सकती है आगे

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नई दिल्ली,

इस साल के अंत में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं. जनादेश के आने में सिर्फ छह महीने का वक्त और रह गया है, ऐसे में यहां चुनावी बिसात बिछने लगी है. नेता, जनता को लुभाने निकल पड़े हैं. क्षेत्रों-इलाकों का दौरा होने लगा है. मुद्दों पर मुखर होकर बातें होने लगी हैं तो वहीं सियासी हलकों में जोड़-तोड़ की राजनीति भी होने लगी है.

पीएम मोदी ने फूंका चुनावी बिगुल
कांग्रेस का लक्ष्य है कि उसे सत्ता में वापसी करनी है तो बीजेपी का उद्देश्य है कि उसे सत्ता में बने रहना है. दोनों की तैयारियां भी इसी के आसपास हैं. पीएम मोदी ने मंगलवार को राजधानी भोपाल में ‘मेरा बूथ, सबसे मजबूत’ कार्यक्रम को संबोधित किया और कार्यकर्ताओं इस रण में जी-जान से जुट जाने के लिए प्रेरित करते हुए चुनावी बिगुल भी फूंक दिया.

सर्वे में ली गई है 17 हजार से अधिक लोगों की राय
इन सबके बीच, जनता का मूड क्या है? उसने पांच साल में सियासत के जो रंग देखे हैं उसके अनुसार वो किसे सत्ता सौंपना चाहती है, कौन नेता उसके मन का है और कौन लोगों के बीच जगह नहीं बना पाया है? ये जानने के लिए ABP न्यूज के लिए सी वोटर ने राज्य में सर्वे किया है. ओपिनियन पोल में जो परिणाम यहां रखे जा रहे हैं वह पूरी तरह से लोगों से की गई बातों और उनकी दी गई राय पर आधारित हैं. सर्वे में 17, 113 लोगों की राय ली गई है. इसमें मार्जिन ऑफ एरर प्लस माइनस 3 से प्लस माइनस 5 फीसदी है.

आइए जानते हैं क्या कहता है सी वोटर का सर्वे
सर्वे में सबसे पहले और जरूरी सवाल का जवाब जानते हैं, जो कि कांग्रेस से जुड़ा हुआ है. असल में साल 2018 में जब चुनाव हुए थे जीत तो कांग्रेस की हुई थी, लेकिन, ज्योतिरादित्य सिंधिया की बगावत की वजह से बीजेपी यहां फिर से सत्ता पाने में सफल हो गई थी, लिहाजा कमलनाथ जो कि कांग्रेस की ओर से सीएम बने थे वह साल भर से भी कम समय में पूर्व सीएम हो गए. शिवराज सिंह चौहान के हाथों में एक बार फिर बीजेपी की कमान सौंपी गई. अब जब चुनाव का मौका आ रहा है तो कमलनाथ इस बार जीत के लिए सारे घोड़े दौड़ा रहे हैं, वहीं बीजेपी सत्ता बचाए रखने के लिए जोर आजमाइश शुरू कर चुकी है.

पूर्व सीएम कमलनाथ पर क्या है लोगों की राय
ऐसे में कांग्रेस और कमलनाथ पर लोगों की क्या राय है? सर्वे में 31 प्रतिशत लोगों के मुताबिक, वे कमलनाथ के काम से बहुत संतुष्ट हैं जबकि 36 प्रतिशत ने असंतुष्ट बताया है. सर्वे में शामिल 17,113 लोगों में से 28 प्रतिशत ने कहा कि वे पूर्व सीएम कमलनाथ के काम से संतुष्ट नहीं हैं. जबकि 5 प्रतिशत लोगों ने ‘पता नहीं’ में जवाब दिया है. हालांकि कांग्रेस ने सीएम चेहरे को लेकर अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं, लेकिन कमलनाथ ही चुनाव की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मौजूदा वक्त में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह राज्यभर में घूमकर कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं और असंतुष्ट कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को समझाने-बुझाने में लगे हैं.

बतौर पीएम, जनता को कौन पसंद है?
एबीपी के लिए सी वोटर सर्वे ने मध्य प्रदेश की जनता से पीएम पद के लिए भी उनकी पसंद जानने की कोशिश की है. इसके जवाब में सर्वे में शामिल लोगों में से 57 फीसदी ने नरेंद्र मोदी को ही पीएम पद की पहली पसंद बताया है. 18 प्रतिशत लोगों की पसंद कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी हैं, जबकि 8 प्रतिशत लोगों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर भी अपनी पसंद जाहिर की है. 3 प्रतिशत लोगों ने आप के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और 14 प्रतिशत लोगों ने अन्य को पीएम पद की पसंद बताया.

पीएम की पसंद कौन?
नरेंद्र मोदी- 57%
राहुल गांधी-18%
योगी- 8%
केजरीवाल- 3%
अन्य- 14%

चुनावी राज्य में सबसे अहम सवाल यह रहा कि आखिर प्रदेश में किसे कितनी सीटें मिलेंगी. बीजेपी को बढ़त मिलेगी या कांग्रेस का झंडा बुलंद होगा. मध्य प्रदेश में वोट शेयर को लेकर लोगों ने चौंकाने आंकड़े दिए हैं. उनके मुताबिक राजनीतिक दलों का वोट शेयर कुछ इस तरह होगा.
बीजेपी-44%
कांग्रेस-44%
बीएसपी-2%
अन्य-10%

मध्य प्रदेश में कुल सीट- 230
बीजेपी-106-118
कांग्रेस-108-120
बीएसपी-0-4
अन्य-0-4

सिंधिया की बगावत ने गिरा दी थी कमलनाथ की सरकार
बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में विफल रहने के बावजूद, कांग्रेस 15 साल बाद राज्य में सत्ता में लौट आई और कमल नाथ ने सत्ता संभाली। हालांकि, सिर्फ एक साल से अधिक समय के बाद कमलनाथ को ज्योतिरादित्य सिंधिया के नेतृत्व में तख्तापलट का सामना करना पड़ा, जो उनके समर्थन में 22 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गए। सिंधिया की इस बगावत से कमलनाथ सरकार गिर गई और शिवराज सिंह चौहान चौथी बार सीएम बने।

वहीं कांग्रेस ने इस साल मध्य प्रदेश में सत्ता में लौटने की कसम खाई है। विपक्ष दलों की एकजुटता को भी इस बार देखना खाफी दिलचस्प होगा। वहीं आम आदमी पार्टी और समाजवादी पार्टी भी कांग्रेस और भाजपा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। हालांकि, बिहार के सीएम नीतीश कुमार द्वारा प्रस्तावित 2024 के लोकसभा चुनावों के लिए तीनों विपक्षी दल एकजुट विपक्ष के मंच पर आने की कोशिश कर रहे हैं। 2018 के मध्य प्रदेश चुनावों में, भाजपा ने 109 सीटें जीतीं और जादुई आंकड़े से सात सीटें कम रह गईं। दूसरी ओर, कांग्रेस 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और बहुमत से दो सीटें पीछे रह गई।

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