नई दिल्ली
देश की सियासी फिजा में धीरे-धीरे लोकसभा चुनाव का रंग घुलना शुरू हो गया है। पक्ष-विपक्ष दोनों अपने तरकश में ऐसे तीर रखने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे 2024 की लड़ाई ज्यादा मुफीद हो। भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने पसमांदा मुसलमानों का जिक्र कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट बैंक की राजनीति करने वालों ने पसमांदा मुसलमानों का जीना मुहाल कर रखा है। अब पीएम के ही बयान का सिरा पकड़ बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) चीफ मायावती ने नया दांव चल दिया है। बीएसपी चीफ ने पीएम मोदी के एजेंडे का समर्थन तो किया है लेकिन साथ ही एक ऐसा सियासी दांव चला है जो बीजेपी के नहले पर दहला के जैसा है। माया के इस दांव से बीजेपी और समाजवादी पार्टी (एसपी) चीफ अखिलेश यादव के लिए नई मुसीबत खड़ी होने वाली है। अखिलेश फिलवक्त पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) के फॉर्म्युला पर काम कर रहे हैं लेकिन माया के दांव के कारण बीजेपी और एसपी दोनों को नई चाल चलनी पड़ेगी।
माया ने चल दिया बड़ा सियासी दांव
दरअसल, आज मायावती के दो ट्वीट ने सियासी चौसर पर जलजला ला दिया है। मायावती का ट्वीट देखने से तो लग रहा है कि उन्होंने बीजेपी का समर्थन किया है लेकिन दूसरे ही ट्वीट में उनका सियासी दांव पर साफ दिख रहा है। पहले ट्वीट में मायावती ने लिखा है कि पीएम नरेंद्र मदी ने भोपाल में बीजेपी के कार्यक्रम में सार्वजनिक तौर पर कहा है कि भारत में रहने वाले 80 फीसदी मुसलमान पसमांदा, पिछड़े, शोषित हैं। उन्होंने लिखा है कि यह उस कड़वी जमीनी हकीकत को स्वीकार करने जैसा है जिससे उन मुस्लिमों के जीवन में सुधार के लिए आरक्षण की जरूरत को समर्थन मिलता है।
अगले ही ट्वीट में बीजेपी को घेरा
पसमांदा मुसलमानों पर बीजेपी का समर्थन करने के बाद मायावती ने अगले ही ट्वीट में एक ऐसा सियासी दांव चल दिया है, जो न केवल दहला जैसा है बल्कि बीजेपी और अखिलेश दोनों के लिए नई मुसीबत खड़ी कर सकती है। दरअसल, माया ने अगले ट्वीट में लिखा कि अब ऐसे हालात में बीजेपी को पिछड़े मुस्लिमों को आरक्षण मिलने का विरोध बंद करके अपनी सभी राज्य सरकारों को अपने यहां आरक्षण को ईमानदारी से लागू करना चाहिए। साथ ही बैकलॉग भर्ती को पूरी करके यह साबित करना चाहिए कि वो इस मामले में अन्य पार्टियों से अलग हैं।
दरअसल, पसमांदा मुस्लिम अचानक ही भारतीय राजनीति के फलक पर नहीं छाया है। इसके पीछे एक बीजेपी की रणनीति है। देश के 80 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान पसमांदा हैं। बीजेपी जहां 2024 से पहले इस समुदाय को अपने से जोड़ने की कोशिश कर रही है। पीएम हर बड़ी रैली या समारोह में पसमांदा मुसलमानों के खराब आर्थिक हैसियत और उनके पिछड़ेपन का जिक्र करते हैं। अब माया ने दो ट्वीट के जरिए एक ऐसा दांव चला है जिसके जरिए उन्होंने बीजेपी के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है।
एसपी में बढ़ रही छटपटाहट
उधर, एसपी के अंदर भी छटपटाहट बढ़ रही है। वोटों का गणित बदलता जा रहा है। अब सभी दल उसी के हिसाब से समीकरण बना रहे हैं। एसपी के संभल से सांसद डॉ शफीकुर्रहमान के बाद मुरादाबाद से सांसद एसटी हसन ने बीएसपी प्रेम का आजकल खूब दिख रहा है। इसके पीछे का सियासी समीकरण भी समझ लीजिए। 2019 में बीएसपी के सहारे चुनाव जीतने वाले सांसदों को अब साफ लग रहा है कि बिना दलित वोटों के वो 2024 का चुनाव नहीं जीत पाएंगे। उल्लेखनीय है कि 2019 में बीएसपी और एसपी ने यूपी में मिलकर चुनाव लड़ा था। उधर, मुस्लिम वोट भी फिलहाल अब किसी एक दल की बपौती नहीं दिख रही है। रामपुर और स्वार जैसे सीटों से एसपी की हार इस बात की तस्दीक कर रही है।
बीजेपी जमीन पर उतरी
बीजेपी 2024 चुनाव के लिए पसमांदा मुसलमान पर दांव यूं ही नहीं लगा रही है। रामपुर में बीजेपी का फॉर्म्युला कामयाब रहा था और उसे जीत मिली थी। अब इसी दांव को भगवा दल आगे भी आजमाना चाहती है। इस वोट बैंक की राजनीति में एसपी के लिए मुश्किल बढ़ने वाली है। अखिलेश PDA की बात जरूर कर रहे हैं लेकिन मायावती के दांव ने उनके लिए ऐसी मुसीबत खड़ी कर दी है कि उन्हें अपने घर को फिर से दुरुस्त करना होगा।
