उदयपुर ,
राजस्थान में केंद्रीय नेताओं की एक के बाद एक सभाओं ने प्रदेश के नेताओं की व्यस्तताएं बढ़ा दी हैं। जोधपुर और भरतपुर में लगातार दो दिन बड़ी सभाओं के बाद शुक्रवार को उदयपुर में अमित शाह की रैली हुई। इस रैली में मंच संभाल रहे वरिष्ठ नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ से बड़ी चूक हो गई। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे काे दरकिनार करते हुए सीधे गृहमंत्री अमित शाह को संबोधन के लिए आमंत्रित कर दिया। इसे राठौड़ की भूल कहें या ताबड़तोड़ सभाओं की थकान, मंच पर जो हुआ वो चर्चा का विषय बन गया। हालांकि मंच पर ही ‘बात का बतंगड़’ बनता उससे पहले खुद अमित शाह ने बात को संभाल लिया। उन्होंने अपने नाम की घोषणा के बाद भी कुर्सी नहीं छोड़ी और वसुंधरा को मौका देते हुए संबोधन के लिए भेजा। दरअसल, कांग्रेस की ओर से लगातार बीजेपी में गुटबाजी के तंज कसे जाते रहे हैं। यदि वसुंधरा राजे का संबोधन नहीं होता तो विरोधियों को एक और मौका मिल जाता। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, शाह ने खुद माैके पर बात संभालते हुए पूर्व मुख्यमंत्री को आमंत्रित किया।
राजेंद्र राठौड़ ने जोश जोश में कर दी ये भूल
अमित शाह की रैली में हजारों की संख्या में समर्थक और स्थानीय लोगों का जमावड़ा था। केंद्रीय मंत्री, सांसद, विधायक सभा को एक-एक कर संबोधित कर रहे थे। शाह की सभा में एंट्री के साथ ही मंच का संचालन कर रहे नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने जोशीला संबोधन शुरू किया। मंच पर अमित शाह के पहुंचने पर पहले सीपी जोशी ने पगड़ी पहनाकर अभिनंदन किया। फिर जोशी ने सभा को संबोधित करते हुए शाह का स्वागत किया। इसके बाद राजेंद्र राठौड़ को तय कार्यक्रम के अनुसार वसुंधरा राजे को संबोधन के लिए आमंत्रित करना था। हालांकि अमित शाह की अगुवाई में जोशीला भाषण देते हुए राठौड़ वसुंधरा काे बुलाना भूल गए।
अमित शाह ने संभाली बात, इशारों से समझाया, फिर भेजा
राजेंद्र राठौड़ की भूल को अमित शाह भांप गए। उन्होंने नाम बोलने पर भी कुर्सी नहीं छोड़ी। उधर, वसुंधरा राजे कुर्सी से उठने ही वाली थी लेकिन नाम नहीं बोले जाने पर असहज नजर आईं। अमित शाह वसुंधरा को देख, उन्हें हाथों के इशारे से समझाते नजर आए। इसके बाद राठौड़ भी समझ गए कि उनके क्या भूल हो गई। उन्होंने तपाक से वसुंधरा राजे को आमंत्रित किया। इस दौरान भी वो पूर्व मुख्यमंत्री की जगह जल्दबाजी में भूतपूर्व मुख्यमंत्री बोल बैठे। हालांकि उन्होंने फिसली जुबान को तत्काल दुरुस्त कर लिया।
मोदी के बाद शाह की रैली में भी वसुंधरा को तवज्जो
अजमेर में पीएम मोदी की सभा के मंच पर लगे पोस्टर में वसुंधरा राजे को जगह दी गई थी। चुनावी साल की सबसे बड़ी सभा में वसुंधरा को इतनी तवज्जो मिलने पर उनके समर्थकों में खास उत्साह देखा गया। ऐसी तवज्जो उदयपुर में गृहमंत्री अमित शाह की रैली में दिखी। मंच पर तमाम नेताओं के बीच अमित शाह के पास वाली कुर्सी वसुंधरा राजे के लिए रिजर्व की गई। दूसरी ओर प्रदेशाध्यक्ष सीपी जोशी बैठे। हो गईं वसुंधरा, अमित शाह ने होशियारी से सब संभाल लिया
‘गहलोत जी ने जितने वादे किए थे, सब तोड़ दिए’
उधर, अमित शाह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि गहलोत सरकार भ्रष्टाचार करने में नंबर-1 पर है. आज आपको हिसाब मांगने का मौका है कि राजस्थान सचिवालय के अंदर मिला दो करोड़ रुपया और एक किलो सोना किसका है? इस सरकार ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ने का काम किया है. गहलोत जी ने जितने वादे किए थे, वो सब तोड़ दिए हैं.
‘अशोक गहलोत केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं’
गृह मंत्री ने पिछले साल हुए कन्हैयालाल हत्याकांड का भी जिक्र किया और और कहा कि आखिर क्यों उन्हें सुरक्षा नहीं दी गई? डंके की चोट पर कहता हूं अगर, स्पेशल कोर्ट में इस मामले की सुनवाई की होती तो हत्यारे फांसी पर लटक चुके होते. अशोक गहलोत केवल वोट बैंक की राजनीति करते हैं.
‘विधानसभा और लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत निश्चित’
शाह ने कहा, ‘मेवाड़ की ये भूमि त्याग, बलिदान और भक्ति की भूमि है. मैं इस पवित्र भूमि से गहलोत जी को कहना चाहता हूं कि 2023 में बीजेपी विजय के सारे रिकॉर्ड तोड़कर प्रचंड बहुमत के साथ सरकार बनाने वाली है. आज की इस सभा का नजारा बता रहा है कि 2023 विधानसभा व 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी की प्रचंड विजय निश्चित है’.
‘कोई गहलोत जी को इस जनसभा का वीडियो दिखा दे’
उन्होंने कहा कि गहलोत जी इधर-उधर घूम रहे हैं कोई उन्हें इस जनसभा का वीडियो दिखा दे तो उन्हें भी मालूम पड़ जाएगा कि उनकी सरकार के जाने का समय हो गया है. अपने संबोधन के दौरान शाह ने कश्मीर का भी जिक्र किया. कहा कि उरी और पुलवामा में पाकिस्तान ने गलती की थी. 10 ही दिन में पाकिस्तान में घुसकर आतंकियों का खात्मा करने का काम मोदी सरकार ने किया.
‘विपक्ष मिलकर अनुच्छेद 370 को वापस लाना चाहता है’
इस दौरान शाह ने लोगों से पूछा, ‘क्या 370 हटनी चाहिए थी कि नहीं? शाह ने कहा कि सारा विपक्ष मिलकर अनुच्छेद 370 को वापस लाना चाहता है. राहुल बाबा कहते थे कि 370 मत हटाओ वरना खून की नदियां बह जाएंगी, लेकिन 370 हटाने के बाद किसी की कंकड़ फेंकने की हिम्मत नहीं हुई.’
‘गहलोत का लक्ष्य अपने बेटे वैभव को सीएम बनाने का है’
शाह ने कहा, ‘गहलोत का लक्ष्य अपने बेटे वैभव को सीएम बनाने का है. 10 साल यूपीए सरकार चली. आदिवासियों बच्चों को पढ़ाने के लिए सिर्फ 90 स्कूल थे. बीजेपी ने 500 से ज्यादा स्कूल बना दिए. जनजाति मंत्रालय का बजट पहले एक हजार करोड़ था, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे बढ़ाकर 15 हजार करोड़ कर दिया.
