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‘भारत ने हमें निराश किया’, जब इस काम को लेकर रूस हो गया था भारत के खिलाफ, फ्रांस ने दिया था साथ

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नई दिल्ली,

फ्रांस दौरे के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वहां के सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया गया है. पीएम मोदी यह सम्मान पाने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं. अपनी यात्रा के पहले दिन ही पीएम मोदी ने फ्रांस में प्रवासी भारतीयों की एक सभा को संबोधित किया. उन्होंने फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के साथ मिलकर दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर भी किया जिसमें से एक अहम समझौता यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) डील है. इस समझौते के बाद अब भारतीय फ्रांस में भी UPI पेमेंट कर सकेंगे.

अपने रणनीतिक रिश्तों की 25वीं सालगिरह मना रहे भारत और फ्रांस की दोस्ती काफी पुरानी है. फ्रांस ऐसे वक्त में भी भारत का साथ देता आया है जब अमेरिका, रूस समेत दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियों ने भारत का साथ छोड़ दिया था. ऐसा ही एक उदाहरण है- 1998 का परमाणु परीक्षण जब भारत ने पोखरण में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया था.

फ्रांस संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों में एकमात्र ऐसा देश था जिसने न केवल परमाणु परीक्षण को लेकर भारत पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों की अवहेलना की बल्कि भारत के साथ खड़ा भी रहा. ऐसे मुश्किल वक्त में फ्रांस ने भारत का साथ दिया था. फ्रांस ने तब कहा था कि एशिया में कोई देश हमारा पार्टनर है तो वह भारत है.

तत्कालीन फ्रांसीसी राष्ट्रपति जैक्स शिराक ने सार्वजनिक रूप से भारत के परमाणु परीक्षण का समर्थन किया और उन्होंने अमेरिकी प्रतिबंधों को खारिज कर दिया. परमाणु परीक्षण से नाराज अमेरिका ने भारत को दी जाने वाली मानवीय सहायता को छोड़कर सभी तरह की सहायता पर रोक लगा दी थी.भारत के परमाणु परीक्षण पर करीबी दोस्त रूस ने भी अपने आधिकारिक बयान में कहा था, ‘भारत का परमाणु परीक्षण परमाणु अप्रसार संधि (NPT) को मजबूत करने के विश्व समुदाय के प्रयासों के विपरीत है.’

तत्कालीन रूसी राष्ट्रपति बोरिस येलस्तिन ने कहा था, ‘भारत ने निश्चित रूप से हमें निराश किया है लेकिन मुझे लगता है कि हम राजनयिक प्रयासों से भारत के रुख में बदलाव ला सकते हैं.’ हालांकि, रूस ने ये भी कहा था कि भारत पर परमाणु परीक्षण को लेकर कड़े प्रतिबंध लगाना सही नहीं है.

फ्रांस ने मुश्किल वक्त में भारत को दिए हथियार
पोखरण परीक्षण से चार महीने पहले जनवरी 1998 में फ्रांसीसी राष्ट्रपति शिराक एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए थे जिसके बाद दोनों देशों ने अपने रणनीतिक संबंध स्थापित किए.परमाणु परीक्षण को लेकर कई देशों ने भारत को हथियार बेचना बंद कर दिया जिसे फ्रांस ने एक बड़े अवसर के तौर पर लिया. फ्रांस ने अमेरिकी प्रतिबंधों की अनदेखी करते हुए भारत को हथियार बेचना शुरू किया और अब वो रूस के बाद भारत का दूसरा सबसे बड़ा रक्षा हथियार आपूर्तिकर्ता बन गया है. फ्रांस भारत को एयरफ्रांस, सबमरीन जैसे अहम रक्षा हथियार सप्लाई करता है.

जब अमेरिका, रूस ने मना किया तब भारत को फ्रांस ने दिया था यूरेनियम
पोखरण परमाणु परीक्षण से पहले भी फ्रांस ने भारत का साथ दिया था. 1982 में अमेरिका ने भारत के तारापुर न्यूक्लियर प्लांट के लिए यूरेनियम की आपूर्ति बंद कर दी थी.यूरेनियम के अभाव में भारत अपना न्यूक्लियर प्लांट नहीं चला सकता था. ऐसे वक्त में रूस ने भी भारत का साथ नहीं दिया था. तब फ्रांस मदद को आगे आया और उसने भारत को यूरेनियम की सप्लाई की थी.

‘कंधे से कंधा मिलाकर चलेंगे भारत-फ्रांस’
साल 2018 में जब राष्ट्रपति मैक्रों भारत आए थे तब दोनों देशों के बीच 14 अहम समझौते हुए थे. इनमें सबसे अहम समझौता दोनों देशों की सेनाओं के बीच एक-दूसरे के लॉजिस्टिर के इस्तेमाल में सहयोग देना था. इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिहाज से यह समझौता बेहद अहम माना गया.

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