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क्या खटाई में पड़ गया फ्रांस के साथ स्कॉर्पीन पनडुब्बी का सौदा? संयुक्त बयान में जिक्र तक नहीं

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नई दिल्ली

पीएम मोदी का फ्रांस दौरा खत्म हो चुका है। इस दौरे पर 26 राफेल मरीन फाइटर प्लेन को लेकर सौदे की काफी चर्चा रही। दौरे के अंत में पीएम मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रो ने संयुक्त बयान जारी किया। हालांकि, दोनों देशों को संयुक्त बयान से एक चीज काफी हैरान करने वाली रही। भारत में तीन और स्कॉर्पीन पनडुब्बियों के निर्माण के लिए हस्ताक्षर वाले एमओयू का संदर्भ शनिवार सुबह जारी द्विपक्षीय बयान के बाद वाले वर्जन से हटा दिया गया था। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या भारत के साथ स्कॉर्पीन पनडुब्बी का सौदा खटाई में पड़ गया है?

विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर था अपलोड
एक आधिकारिक सूत्र ने दावा किया कि विदेश मंत्रालय की वेबसाइट पर पहले की बातचीत का कुछ पाठ थोड़ी देर के लिए अपलोड किया गया था। यह “किसी भी तरह से सहमत पाठ नहीं था। उन्होंने कहा, वेबसाइट पर अब स्वीकृत पाठ वही है जो फ्रांसीसी सरकार की तरफ से प्रकाशित किया गया है। राफेल के उल्लेख गायब होने के बारे में पूछे जाने पर, विदेश सचिव विनय मोहन क्वात्रा ने कहा था कि रक्षा साझेदारी के मेट्रिक्स एक अधिग्रहण या गैर-अधिग्रहण से परिभाषित नहीं होते हैं।

डॉक्यूमेंट के बाद वाले वर्जन से लाइनें गायब
होराइजन 2047 डॉक्यूमेंट में शुक्रवार रात कहा गया था कि भारत और फ्रांस पी-75 कार्यक्रम के तहत तीन अतिरिक्त पनडुब्बियों के निर्माण के लिए मझगांव डॉकयार्ड लिमिटेड और (फ्रांसीसी) नौसेना समूह के बीच समझौता ज्ञापन का स्वागत करते हैं। फाइटर प्लेन इंजन के संयुक्त विकास के लिए, दस्तावेज़ में कहा गया था कि इस वर्ष के अंत से पहले सफरान और डीआरडीओ के बीच इस परियोजना पर एक रोडमैप तैयार किया जाएगा। हालांकि, ये लाइनें दस्तावेज के बाद के संस्करण से गायब हो गईं।

80 हजार करोड़ रुपये का सौदा
हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर दी थी कि दोनों प्रस्तावित राफेल-एम और स्कॉर्पीन खरीद निश्चित रूप से अभी भी समझौते से बहुत दूर हैं। इन समझौते की अनुमानित लागत 80,000 करोड़ रुपये (लगभग 9 बिलियन यूरो) होगी। हालांकि, रक्षा मंत्रालय की तरफ से इन्हें मंजूरी दी जा चुकी है। चूंकि वास्तविक अनुबंधों पर हस्ताक्षर लंबी तकनीकी-वाणिज्यिक बातचीत और फिर सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति की अंतिम मंजूरी के बाद ही किए जाने हैं। इसमें एक साल से अधिक का समय लग सकता है।

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