11.4 C
London
Sunday, March 15, 2026
Homeराजनीतिमुस्कुराहट, नमस्ते, ठहाके... मोदी के खिलाफ 'स्पेशल 26' की हर तस्वीर में...

मुस्कुराहट, नमस्ते, ठहाके… मोदी के खिलाफ ‘स्पेशल 26’ की हर तस्वीर में छिपा है समीकरण, समझिए

Published on

नई दिल्ली

सियासत का ऊंट कभी भी, किसी भी करवट बैठ सकता है। जिस नेता को आप कल तक दूसरे नेता पर बरसते हुए देखे होंगे आज उसी के साथ मुस्कुराते हुए तस्वीर आ सकती है। कभी नहीं जाएंगे… कहने वाले कब चले जाएंगे, जनता भी कन्फ्यूज हो जाती है। बहरहाल, 2024 के चुनावी समर की पिच इसी तरह से तैयार हो रही है। पार्टियां दो खेमों में बंट चुकी हैं। एक तरफ भाजपा पुराने साथियों को जोड़कर फिर से NDA को मजबूत करने पर फोकस कर रही है। दूसरी तरफ राहुल गांधी की छवि को चमकाने के साथ ही कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के ‘बूस्टर’ से मोदी-शाह के करिश्माई चेहरे को चुनौती देने की जुगत में है। उसे बीजेपी के खिलाफ ‘स्पेशल 26’ तैयार की है। दिल्ली में आज भगवा दल के सहयोगी जुट रहे हैं तो बेंगलुरु में United We Stand के पोस्टर से काफी कुछ साफ हो चुका है। मेजबान कांग्रेस ने खुद को बीच में रखा है, बाकी सहयोगियों को आसपास जोड़े रखा है। वैसे, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे कह रहे हैं कि पार्टी की रुचि सत्ता या प्रधानमंत्री पोस्ट में नहीं है। काफी समय बाद सोनिया गांधी इस तरह से ऐक्टिव हुई हैं। खबर है कि आज विपक्षी फ्रंट का नाम फिर से UPA रखा जा सकता है और सोनिया गांधी को इसका अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इस बीच तस्वीरें आ रही हैं।

आज की मुख्य बैठक से ठीक पहले जब विपक्षी नेता एक दूसरे से मिल रहे थे तो उनके हाव-भाव को भी पढ़ा गया। उनकी मुस्कुराहट, हाथ मिलाना, हाथ जोड़ना, कानाफूसी, गले लगना और सिटिंग अरेंजमेंट भी संकेत देते गए। आइए विपक्षी एकजुटता के मंच से आई इन तस्वीरों को पढ़ते हैं और समझने की कोशिश करते हैं कि क्या 2024 में विपक्षी मोर्चा इतना आसान होने वाला है जैसा दिख रहा है?

​उद्धव के पास दूसरा विकल्प क्या है?​
हां, महाराष्ट्र की सियासत 365 दिन में जिस तरह अपनी धुरी पर घूम जाती है उसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता। उद्धव ठाकरे कांग्रेस और एनसीपी के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे। अचानक पार्टी टूटी, सत्ता छूटी और अब सहयोगी NCP में भी ‘खेल’ हो गया है। ऐसे माहौल में 2024 का चुनाव लड़ना है तो अकेले मैदान में उतरने की गलती कोई भी खिलाड़ी नहीं करेगा। सोनिया से उद्धव ने गंभीर मंत्रणा की है।

साथ तो हैं पर महत्वाकांक्षा का क्या?
बंगाल की भूमि बगावती तेवर वाली रही है। ममता बनर्जी का भी सियासी इतिहास भी देख लीजिए। उनकी अपनी महत्वाकांक्षा है। पिछले चुनाव में भाजपा ने जोर लगा दिया लेकिन ममता के किले को हिला नहीं पाए। कांग्रेसी खेमे में ममता भले दिख रही हों, पर 2024 में राहुल को पीएम कैंडिडेट बनाने के लिए उनकी रजामंदी मिलना आसान नहीं है। बंगाल में वह सत्ता में हैं और कांग्रेस उन पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ती। कांग्रेस चाहेगी कि ममता राहुल गांधी को पीएम कैंडिडेट के तौर पर स्वीकार करें जबकि TMC के भीतर से ममता के पक्ष में भी आवाजें उठती रही हैं। वह खुद को किसी से कम नहीं समझती हैं। ऐसे में उनकी महत्वाकांक्षा का क्या होगा, समय बताएगा।

​​नमस्ते मैडम…​
यह तस्वीर दिलचस्प है। ऐसा लगता है कि बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने राहुल गांधी को नेता मान लिया है। कुछ महीनों में शायद उन्होंने घूमकर समझ लिया है कि पीएम के बारे में सोचना भी है तो किसी ग्रुप में जाना ही होगा। नीतीश और ममता दोनों क्षेत्रीय क्षत्रप हैं। दोनों भले ही कांग्रेस के खेमे में दिख रहे हैं लेकिन पीएम कैंडिडेट पर रजामंदी के सवाल पर उनका रुख क्या होगा, इस पर अब भी अटकलें लगाई जा रही हैं। सत्ता का सुख कौन नहीं चाहेगा भला।

इस बार माया नहीं, महबूबा हैं
2019 के चुनाव से पहले कर्नाटक में ही विपक्षी एकजुटता के मंच से ऐसी तस्वीर मायावती और सोनिया की आई थी। इस बार कांग्रेस के खेमे में मायावती नदारद हैं, हां महबूबा मुफ्ती जरूर हैं। जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 खत्म होने और केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला जैसे नेताओं के लिए स्कोप बहुत कम बचा है।

​​लालू हों और हंसी-ठहाका न हो​
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों का सामना कर रहे लालू परिवार के लिए कांग्रेस के साथ जाना मजबूरी भी है। बिहार में नीतीश के साथ आकर सरकार में तो शामिल हो गए लेकिन लालू जानते हैं कि बच्चों के लिए सियासत की राह आसान करनी है तो दिल्ली तक पहुंच बनानी होगी। फिलहाल परिस्थितियां ऐसी हैं कि एनडीए में उनके लिए जगह नहीं दिखती। बेंगलुरु में लेफ्ट के नेता सीताराम येचुरी और डी. राजा से हाथ मिलाते समय लालू ने अपने अंदाज में कुछ कहा तो सभी के चेहरे खिल उठे। उधर, लेफ्ट का जनाधार जिस तरह से घट रहा है, उसके नेताओं को लगने लगा है कि अस्तित्व को बचाए रखने के लिए कांग्रेस के खेमे में रहना जरूरी है। दूसरा पक्ष तो इन्हें स्वीकार करेगा भी नहीं। पहले भी कांग्रेस के साथ लालू और लेफ्ट की अच्छी जमी है।

​​फिर साथ आए दो लड़के​
जब राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने यूपी चुनाव 2017 में एकसाथ प्रचार किया था तो ‘दो लड़कों’ की काफी चर्चा हुई थी। 2022 में कांग्रेस से तालमेल नहीं हुआ क्योंकि अखिलेश यादव को खुद पर भरोसा था। वह आज भी यूपी में दूसरे नंबर पर हैं लेकिन राष्ट्रीय पटल पर पीछे की कतार में हैं। ऐसे में राहुल-सोनिया के साथ आने के अलावा दूसरा विकल्प भी नहीं दिखता है।

​ये मुस्कुराहट सशर्त है​
हां, आम आदमी पार्टी ने दिल्ली और पंजाब में कांग्रेस की सियासी जमीन को ही हथियाकर सत्ता हासिल की है। पहले तो लग रहा था कि वह विपक्षी एकजुटता में नहीं आएंगे क्योंकि राज्यों की कांग्रेस टीमें AAP को साथ लाने के पक्ष में नहीं थीं। केजरीवाल चाहते थे कि दिल्ली अध्यादेश पर कांग्रेस उसका सपोर्ट करे। ऐन मौके पर कांग्रेस ने 2024 को देखते हुए अध्यादेश पर केजरीवाल को सपोर्ट किया तभी दिल्ली के सीएम मुस्कुराते हुए बेंगलुरु पहुंचे। कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने भी हंसकर उनका स्वागत किया।

Latest articles

खण्डेलवाल परिवार के दुख में शामिल हुए सांसद आलोक शर्मा, दी श्रद्धांजलि

भारतीय जनता पार्टी भोपाल लोकसभा के सांसद श्री आलोक शर्मा ने शनिवार को भारतीय...

नंबर टू उद्योगपति लेंगे राजधानी की सबसे कीमती जमीन, भेल का भी नंबर लग सकता है!

भोपाल! भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार देश के ‘नंबर टू’ उद्योगपति अब भोपाल की फिजाओं में...

बीएचईएल थ्रिफ्ट सोसायटी की बैठक: सदस्यों को मिलेगा 6.25% ब्याज, उपहार में एक्सरसाइज बाइक देने पर विचार

भेल, भोपाल। बी.एच.ई.एल. थ्रिफ्ट एंड क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड, पिपलानी, भोपाल की प्रबंधकारिणी समिति की...

कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में DBT प्रायोजित व्याख्यान श्रृंखला संपन्न: जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य पर हुई चर्चा

भोपाल। भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) के सहयोग से भोपाल के कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ...

More like this

कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी में DBT प्रायोजित व्याख्यान श्रृंखला संपन्न: जैव प्रौद्योगिकी के भविष्य पर हुई चर्चा

भोपाल। भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (DBT) के सहयोग से भोपाल के कॉर्पोरेट इंस्टीट्यूट ऑफ...

कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी ने डब्ल्यूसीएल की परियोजनाओं का किया उद्घाटन

केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री G. Kishan Reddy ने Western Coalfields Limited (डब्ल्यूसीएल)...

महिला समाज और राष्ट्र की प्रगति का आधार, सर्वांगीण विकास के लिए सरकार प्रतिबद्ध — मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि महिला शक्ति न केवल परिवार, बल्कि समाज...