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बुंदेलखंड में माधवराव सिंधिया की प्रतिमा का क्यों हो रहा विरोध? जानें इतिहास

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टीकमगढ़

टीकमगढ़ शहर के सर्किट हाउस में करीब 8 माह पूर्व सिंधिया घराने के पूर्व महाराज माधवराव सिंधिया की प्रतिमा लगाई गई थी। प्रतिमा बीजेपी जिला मंत्री विकास यादव ने लगवाई थी। सर्किट हाउस में उनकी प्रतिमा लगते ही क्षत्रिय महासभा और करणी सेना ने विरोध शुरू कर दिया। टीकमगढ़ कलेक्टर को पहला ज्ञापन 20 नवंबर 2022 को सौंपा। ज्ञापन में कहा कि माधवराव सिंधिया का टीकमगढ़ रियासत और टीकमगढ़ के इतिहास में कोई योगदान नहीं है। इसलिए इनकी मूर्ति लगाने का कोई औचित्य सर्किट हाउस में नहीं होता है। प्रतिमा अनावरण की तारीख नजदीक आते ही विरोध बढ़ता जा रहा है। आइए हम आपको बताते हैं कि उनकी प्रतिमा का विरोध क्यों हो रहा है।

माधवराव की प्रतिमा विवाद पकड़ रहा तूल
पांच अगस्त को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान टीकमगढ़ आ रहे हैं। वह माधवराव सिंधिया की प्रतिमा का अनावरण करेंगे। इसके बाद टीकमगढ़ में सर्व समाज के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया। ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष ने कहा कि टीकमगढ़ के इतिहास में माधवराव सिंधिया का कोई योगदान नहीं रहा है। इसलिए इनकी प्रतिमा ना लगाई जाए। साथ ही मुख्यमंत्री इसका अनावरण भी नहीं करें।

रानी कुंवर गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाए
सर्व समाज की मांग है कि टीकमगढ़ रियासत के राजा और शहर को बसाने वाली रानी कुंवर गणेश की प्रतिमा स्थापित की जाए। वहीं, शहर में माधवराव सिंधिया की प्रतिमा लगवाने में बीजेपी नेता विकास यादव ने अहम भूमिका निभाई है। विकास यादव को हमेशा सिंधिया समर्थक माना जाता है। जब ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस में थे तो विकास यादव कांग्रेस की राजनीति टीकमगढ़ जिले में करते थे। जैसे ही सिंधिया ने करवट बदल दी तो विकास यादव भी बीजेपी में आ गए। उन्हें पार्टी ने जिला मंत्री का दर्जा दिया है।

आठ महीने पहले लगवाई थी प्रतिमा
विकास यादव ने कहा कि करीब 8 माह पूर्व मैंने सिंधिया की मूर्ति सर्किट हाउस में सभी नियमों को पालन करते हुए लगवाई है। उनका मानना है कि सिंधिया सर्व समाज के और राष्ट्रीय स्तर के नेता रहे हैं। इसलिए सिंधिया की प्रतिमा टीकमगढ़ सर्किट हाउस में लगना उचित है। वहीं, क्षत्रिय महासभा के जिला अध्यक्ष पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि सिंधिया परिवार या मराठा शासकों का बुंदेलखंड की राजनीति या बुंदेलखंड के इतिहास में कोई योगदान नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर मूर्ति लगती है तो रानी कुंवर गणेश की लगना चाहिए, जिन्होंने टीकमगढ़ को बसाया है। नहीं तो समाज इसका विरोध करेगी।

माधवराव सिंधिया का यहां कोई योगदान नहीं
समाजसेवी और इतिहासकार मनोज चौबे कहते हैं कि टीकमगढ़ के इतिहास में सिंधिया परिवार का कोई योगदान नहीं है लेकिन सिंधिया राष्ट्रीय स्तर के नेता रहे हैं तो मूर्ति लगने में कोई विरोध नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड की बात होती है तो हम महराजा छत्रसाल को याद करते हैं। उन्हीं के नाम से पूरे बुंदेलखंड को जाना जाता है। मुगलों के खिलाफ भी उन्होंने खूब लड़ाई लड़ी है। रियासतकालीन स्थिति को देखेंगे तो माधवराव सिंधिया की भूमिका कोई नहीं रही है।

माराठा साम्राज्य ने की थी मदद
वहीं, इतिहासकार मनोज चौबे ने कहा कि महाराज छत्रसाल जब 79 साल के थे, तब उन्होंने जैतपुर का संग्राम लड़ा था। यह लड़ाई मुगल साम्राज्य से बंगश के खिलाफ थी। वो जब आक्रमण करने आया तो महराज छत्रसाल ने मराठा सम्राज्य से मदद मांगी थी। उस समय बाजी राव पेशवा ने बिना किसी राग द्वेष के महाराज छत्रसाल की मदद की। इसके बाद उन्होंने बंगश को हरा दिया। इतिहास के पन्नों में बुंदेलखंड में यही उनका जिक्र मिलता है।

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