नई दिल्ली
भारत और एशिया के सबसे बड़े रईस मुकेश अंबानी ने लगातार तीसरे साल कोई सैलरी नहीं ली। उन्हें फाइनेंशियल ईयर 2022-23 के लिए कोई सैलरी नहीं मिली है। इस तरह देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन पिछले तीन साल से बिना किसी वेतन के अपनी कंपनी में काम कर रहे हैं। कोविड महामारी के चलते जब अर्थव्यवस्था और बिजनेस प्रभावित हो रहे थे, तब कंपनी हित में मुकेश अंबानी ने स्वेच्छा से अपना वेतन छोड़ दिया था। रिलायंस की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गाय है कि वित्त वर्ष 2022-23 में अंबानी का पारिश्रमिक शून्य था। अंबानी ने कोरोना महामारी की शुरुआत के बाद जून 2020 से अपना वेतन ना लेने का फैसला किया था। कोरोना की शुरुआत से पहले तक अंबानी को सालाना 15 करोड़ रुपये सैलरी मिल रही थी।
साल 2008-09 से लेकर 2019-20 तक 15 करोड़ रुपये ही वेतन लिया था। अंबानी ने अपना वेतन इसी आंकड़े पर सीमित कर रखा था। उनकी सैलरी पिछले लगातार 12 सालों से इसी स्तर पर थी। हालांकि कंपनी में कई लोगों की सैलरी उनसे कहीं ज्यादा है। विगत तीन वर्षों में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की भूमिका के लिए मुकेश अंबानी ने वेतन के अलावा किसी भी प्रकार के भत्ते, अनुलाभ, सेवानिवृत्ति लाभ, कमीशन या स्टॉक ऑप्शनंस का लाभ भी नहीं लिया। इससे पहले व्यक्तिगत उदाहरण पेश करते हुए अंबानी ने अपनी सैलरी 15 करोड़ रु तक सीमित कर दी थी। वे 2008-09 से 15 करोड़ की सैलरी ले रहे थे।
सबसे ज्यादा सैलरी
रिलायंस इंडस्ट्रीज में निखिल मेसवानी की सैलरी वित्त वर्ष 2022-23 में पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 1 करोड़ रुपये बढ़कर 25 करोड़ रु सालाना पहुंच गई। 25 करोड़ रुपये वार्षिक वेतन पर हितल मेसवानी भी कंपनी में काम कर रहे हैं। ऑयल और गैस बिजनेस से जुड़े पी एम प्रसाद का वेतन 2021-22 में 11.89 करोड़ था जो 2022-23 में बढ़कर 13.5 करोड़ हो गया।
