नई दिल्ली,
बिहार में जाति आधारित जनगणना को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट के सामने बिहार सरकार ने अपना रुख रखा. बिहार सरकार ने कहा कि वो अभी डाटा सार्वजनिक नहीं करने जा रही है. सर्वे का डाटा सार्वजनिक ना किए जाने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार 21 अगस्त को सुनवाई करेगा. उस दिन याचिकाकर्ताओं द्वारा राज्य सरकार द्वारा सर्वे किए जाने के अधिकार के सवाल पर भी दलील रखेगा.
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस एस वी एन भट्टी की पीठ के सामने बिहार सरकार ने कहा कि हमने गणना पूरी कर ली है. याचिकाकर्ताओं ने जातिगत सर्वे का डाटा सार्वजनिक करने पर रोक लगाने की मांग की, तो जस्टिस खन्ना ने कहा कि वैसे भी संकलित किए निजी आंकड़े कभी सार्वजनिक नहीं होते. आंकड़ों का विश्लेषण यानी ब्रेकअप ही जारी किया जाता है.
याचिकाकर्ताओं के वकील सीएस वैद्यनाथन ने पुट्टास्वामी मामले में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ये सर्वे निजता के अधिकार का हनन है. सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के वकील से कहा कि इसमें निजता के अधिकार का हनन कैसे हो सकता है?
सर्वे में होते हैं दो तरह के डाटा
सर्वेक्षण में दो तरह के डाटा होते हैं. एक व्यक्तिगत डाटा जो सार्वजनिक नहीं किया जा सकता क्योंकि वहां प्राइवेसी का सवाल है. दूसरा होता है आंकड़ों का विश्लेषण, यानी ब्रेकअप डाटा. ब्रेकअप डाटा को एनलाइज किया जा सकता है. उससे ही बड़ी तस्वीर बनकर सामने आती है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि सर्वेक्षण का ये कोई संवैधानिक आदेश नहीं था. यह तो प्रशासनिक आदेश था.
6 अगस्त तक पूरा हुआ सर्वे
इस सुनवाई के दौरान बिहार सरकार के वकील ने कहा कि सर्वे 6 अगस्त तक पूरा हो गया है. इसे 12 अगस्त को इसकी सूचना वेबसाइट पर अपलोड भी कर दी गई है. याचिकाकर्ता के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं किया जा सकता. किसी वैध उद्देश्य वाले निष्पक्ष और उचित कानून के अलावा नहीं किया जा सकता है. यह सरकार के कार्यकारी आदेश के जरिए नहीं किया जा सकता. किसी को कोई कारण नहीं बताया गया और न ही सूचित किया गया. कोर्ट अब सोमवार को इस मामले पर आगे सुनवाई करेगा.
