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कांग्रेस के दिल में यूपी की 21 लोकसभा सीट, अखिलेश क्यों बनेंगे दरियादिल? जानिए इनसाइड स्टोरी

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लखनऊ

इंडिया (I.N.D.I.A.) की बैठक से पहले कांग्रेस ने यूपी में विपक्षी गठबंधन से ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल लेने के लिए फील्डिंग शुरू कर दी है। अखिलेश यादव ने भी संकेत दिए हैं कि वह कांग्रेस के साथ 2024 लोकसभा चुनाव में सीट शेयर कर सकते हैं। एक सवाल के जवाब में अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी को हराना उनका मकसद है, इसलिए सवाल यह नहीं है कि कांग्रेस को कितनी सीटें देनी है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस ने प्रेशर पॉलिटिक्स के तहत यूपी में उन 21 सीटों पर दावा ठोंक रही है, जिसे पार्टी ने 2009 में जीता था। तब मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने केंद्र में दूसरी बार सरकार बनाई थी। मगर पिछले दस साल में गंगा में काफी पानी बह चुका है। राजनीतिक हालात भी बदल गए हैं। ऐसे में 21 सीटों के दावे को मानना समाजवादी पार्टी के लिए आसान नहीं है।

कांग्रेस ने गठबंधन के लिए नया दांव
यूपी विधानसभा चुनाव 2017 में कांग्रेस और सपा ने उत्तरप्रदेश में गठबंधन किया था, मगर बीजेपी की प्रचंड लहर में अखिलेश यादव और राहुल की सियासी दोस्ती कमाल नहीं दिखा सकी। चुनाव के बाद समाजवादी पार्टी ने बताया कि जमीन पर कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की कमी के कारण हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद से अखिलेश कांग्रेस से दूरी बनाकर रहे। कांग्रेस भी उसके बाद के दो चुनावों में समाजवादी पार्टी से दूर ही रही। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे बृजलाल खाबरी समाजवादी पार्टी से समझौते के पक्ष में नहीं थे। गठबंधन का रास्ता खोलने के लिए पार्टी ने वाराणसी में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाले अजय राय को प्रदेश अध्यक्ष बनाया। अजय राय ने पद संभालते ही राहुल गांधी को दोबारा अमेठी से चुनाव मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया। प्रियंका गांधी वाड्रा के चुनाव लड़ने की चर्चा को गर्म कर कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को बता दिया 2024 में पार्टी बिग डील करेगी। इसके साथ ही 2009 में जीती गईं सीटों पर दावेदारी भी कर दी है।

जानिए किन सीटों पर है कांग्रेस की है दावेदारी
2009 में कांग्रेस ने यूपी में 21 सीटें जीतीं थीं। इससे पहले 2004 के चुनाव में कांग्रेस को 12 प्रतिशत वोट मिले थे और पार्टी ने नौ सीटों पर जीत हासिल की थी। पांच साल बाद 2009 में कांग्रेस के मतों के प्रतिशत में 14 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी हुई थी। कांग्रेस को अवध क्षेत्र में सबसे ज्यादा फायदा हुआ था। अवध में कांग्रेस को 9 सीटें हासिल हुई थीं। यूपी के ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी को कड़ी टक्कर दी थी और 16 सीटें जीती थीं। 2009 में समाजवादी पार्टी को रूरल एरिया में 20 सीटें मिली थीं। अब कांग्रेस यूपी की बरेली, लखीमपुर खीरी, धौरहरा, उन्नाव, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, प्रतापगढ़, फर्रूखाबाद, कानपुर, अकबरपुर, झांसी, बाराबंकी, फैजाबाद, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, डुमरियागंज, महराजगंज, कुशीनगर पर दावेदारी कर रही है।

10 साल में कांग्रेस कमजोर मगर सपा ने सुधारी हालत
2009 में समाजवादी पार्टी ने उत्तरप्रदेश में 23 लोकसभा सीटें जीती थीं। वोट प्रतिशत में भी वह कांग्रेस से आगे थी। तब कांग्रेस को 18. 25 फीसदी और समाजवादी पार्टी को 23.26 फीसदी वोट मिले थे। इसके बाद से गंगा में काफी पानी बह चुका है। 2014 के मोदी लहर में कांग्रेस 2 और समाजवादी पार्टी 5 सीटों पर सिमट गई। तब कांग्रेस को यूपी में 7.53 प्रतिशत वोट मिले थे जबकि समाजवादी पार्टी मोदी लहर में भी 22.35 फीसदी वोट हासिल करने में सफल रही। 71 सीट जीतने वाली बीजेपी को 42.63 प्रतिशत वोट मिले थे। 2019 के चुनाव में भी कांग्रेस का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। उसे सिर्फ 4.24 प्रतिशत वोट मिले। राहुल गांधी अमेठी से हार गए और यूपी में सिर्फ सोनिया गांधी ही कांग्रेस की कैंडिडेट रहीं, जिन्हें जीत नसीब हुई। वह अपनी परंपरागत रायबरेली लोकसभा सीट से जीती। बहुजन समाज पार्टी के साथ चुनाव लड़ने वाले समाजवादी पार्टी गठबंधन को 19.43 प्रतिशत वोट मिले थे।

2022 यूपी के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपनी स्थिति मजबूत की जबकि कांग्रेस की हालत और पतली हो गई। 2022 में कांग्रेस उत्तरप्रदेश में सिर्फ 2. 33 प्रतिशत वोट ही हासिल कर सकी। विधानसभा में उसके सदस्यों की संख्या भी दो है। अब अखिलेश कांग्रेस को कितनी दरियादिली दिखाते हैं, एक सितंबर के बाद परतें खुलने लगेंगी।

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