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Tuesday, March 24, 2026
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खत्म होती नौकरियां, बंद होते कारोबार, चीन की बदहाली भारत के लिए चमकने का मौका

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नई दिल्ली

चीन भले अपने मुंह से कुछ न कहे, लेकिन उसकी हालत के बारे में दुनिया जान चुकी है। चीन की अर्थव्यवस्था बुरे दौर से गुजर रही है। जो देश दो साल पहले तक दुनिया का बॉस बनने की कोशिश में जुटा था, आज वो अपने देश की अर्थव्यवस्था को संभाल नहीं पा रहा है। एक तरफ अमेरिका, यूरोप समेत दुनिया के कई देश महंगाई का सामना कर रहे हैं तो वहीं चीन में हालात उलट है। चीन में रियल एस्टेट से लेकर खाने-पीने की चीजों के दाम में लगातार गिरावट आ रही है। चीन में बेरोजगारी चरम पर है। चीन में 20% से ज्यादा युवा बेरोजगार हैं। चीन की इस हालात से अर्थव्यवस्था हिली हुई है। हालांकि भारत के लिए यह एक बड़ा अवसर है।

​क्यों सिकुड़ रही चीन की अर्थव्यवस्था ? ​
साल 1980 से 2020 के बीच चीन की इकॉनमी ने तेजी से ग्रोथ देखा गया, लेकिन अब चीन की अर्थव्यवस्था सिकुड़ती जा रही है। द इकॉनमिस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक चीन के इस हालत के जिम्मेदार चीन की सरकार है। शी जिनपिंग की सरकार ने अपनी विस्तारवादी नीतियों, कर्ज देकर छोटे और गरीब देशों को अपने जाल में फंसाने की चाल और अमेरिका जैसे देशों से दुश्मनी लेकर चीनी अर्थव्यवस्था को इस हालत में पहुंचा दिया।

​चीन के गिरते बाजार से भारत को फायदा​
चीन के गिरते बाजार, लुढ़की इकॉनमी से भारत को फायदा हो सकता है। ये भारत के लिए एक अवसर है। हालांकि चीन की इकॉनमी का नकारात्मव प्रभाव भी पड़ने की आशंका है। फिलहाल आज हम सिर्फ फायदे की बात करेंगे। कोरोना महामारी ने दुनियाभर की इकॉनमी को हिला कर रख दिया। कोरोना महामारी के कारण चीन में होने वाली मौतों का आंकड़ा बाकी देशों से बेहतर था, इसलिए उम्मीद थी कि कोरोना के बाद चीन की अर्थव्यवस्था बेहतर ग्रोथ दिखाएगी, लेकिन उम्मीद के विपरीत चीन में स्थिति बिगड़ती चली गई। एक तरफ जहां चीन फेल हो रहा है तो वहीं दुनिया की निगाहें भारत की ओर टिकी हैं।

​भारत की स्थिति मजबूत​
चीन जहां उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पा रहा तो वहीं भारत आज दुनियाभर के देशों के लिए आंखों का तारा बन रहा है। भारत की मौजूदा जियोपॉलिटिकल स्थिति, वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी बढ़ रही हिस्सेदारी, अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर आ रहे अच्छे बदलाव और दूसरे देशों के साथ मैत्री संबंध भारत की स्थिति को मजबूत कर रहे हैं। जहां चीन के संबंध अमेरिका समेत पश्चिम देशों से तनावपूर्ण रहे हैं तो वहीं भारत की स्थिति यहां भी मजबूत है।

भारत का विशाल वर्क फोर्स
भारत की युवा पीढ़ी उसकी सबसे बड़ी ताकत है। भारत के पास जितना वर्क फोर्स है और जितना आने वाले दिनों में खड़ा होने वाला है, दुनिया में उतने लोग रिटायर होंगे। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2020-2040 तक भारत में सेकेंडरी एजुकेशन हासिल कर चुके 4 करोड़ लोगों का वर्क फोर्स तैयार हो चुका होगा। जबकि इसी समय में चीन में 5 करोड़ लोग रिटायर हो जाएंगे। दुनियाभर की बड़ी कंपनियों की निगाहें भारत के इस वर्कफोर्स पर है। भारत की युवा जेनरेशन को देखकर एप्पल समेत वैश्विक कंपनियां अब चीन के बजाए भारत का रूख कर रही हैं।

मेक इन इंडिया पर जोर देने की जरूरत
भारत में विदेशी कंपनियों के लिए कारोबारी माहौल उन्हें चीन से यहां खींच रहा हैं। चीन में कारोबार में जिस तरह से सरकारी दखल है, वो बहुत कंपनियों को पसंद नहीं। चीनी उद्योगपति जैक मा इसके बारे में खुलकर विरोध कर चुके हैं। चीनी सरकार का कारोबार में दखल विदेशी कंपनियों को रास नहीं आ रहा है। चीन की गिरती अर्थव्यवस्था भारत के लिए एक अवसर है। भारत की वैश्विक सप्लाई चेन में उसकी बढ़ती हिस्सेदारी उसे चीन के एक विक्लप के तौर पर लाकर खड़ा कर रही है। विदेशी कंपनियों के लिए भारत चीन का विकल्प बनता जा रहा है। भारत मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में चीन की जगह ले सकता है। हालांकि इसे सुनिश्चित करने के लिए भारत को अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूत करना होगा। रोजगार के नए अवसर पैदा करने होगें। सप्लाई चेन को मजबूत करना होगा। भारत को चीन पर निर्भरता कम कर मेक इन इंडिया पर बल देना होगा।

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