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परमाणु धमकी स्वीकार नहीं… G20 घोषणा पत्र के 37 पन्नों में यूक्रेन का 4 बार जिक्र

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नई दिल्ली,

देश की राजधानी नई दिल्ली में जी20 समिट जारी है. इसी बीच खबर आई कि नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर सभी देशों की सहमति बन गई है. पीएम मोदी ने खुद इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि “हमारे टीम के हार्ड वर्क से और आप सभी के सहयोग से नई दिल्ली जी20 लीडर्स घोषणा पत्र पर आम सहमति बन गई है.” जी20 शिखर सम्मेलन का पहला सत्र ‘वन अर्थ’ था तो दूसरा सत्र, ‘वन फैमिली’ रहा. इसी बीच जी20 लीडर्स घोषणा पत्र की अहम जानकारियां सामने आईं. कई खास बातों के बीच इसमें जो ध्यान देने वाली एक बड़ी बात थी, जो कि यूक्रेन को ध्यान में रखकर की गई थी.

घोषणापत्र में 4 बार हुआ यूक्रेन का जिक्र
गौरतलब है कि इस वक्त रूस और यूक्रेन युद्ध में लगे हुए हैं. दोनों देशों के बीच बीते तकरीबन ढाई साल से टकराव बना हुआ है. जी20 समिट के दौरान यह मुद्दा भी खास तौर पर उठा है, जिसमें कहा गया कि ‘आज का यह दौर बेशक युद्ध का नहीं है.’ घोषणापत्र के जारी हुए पन्नों पर ध्यान दें तो 37 पन्नों की इस घोषणा में चार बार यूक्रेन का जिक्र हुआ है. घोषणापत्र में कहा गया कि, हम गहरी चिंता के साथ अपार मानवीय पीड़ा और उस बुरे असर पर ध्यान दिलाना चाहते हैं, जो कि दुनिया भर में युद्ध और संघर्ष की वजह से पड़ता है.

परमाणु उपयोग की धमकी स्वीकार्य नहीं
यूक्रेन में युद्ध के संबंध में बाली में हुई चर्चा को याद करते हुए कहा कि, सभी राज्यों को संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुरूप, सभी राज्यों को खतरे से बचना चाहिए और या क्षेत्रीय अखंडता के विरुद्ध क्षेत्रीय अधिग्रहण के लिए बल का प्रयोग और करने से भी दूर रहना चाहिए. किसी राज्य की संप्रभुता या राजनीतिक स्वतंत्रता पर आंच नहीं आनी चाहिए और जोर देते हुए कहा गया कि परमाणु का उपयोग या उपयोग की धमकी दिया जाना भी स्वीकार नहीं किया जाएगा. परमाणु हथियारों की धमकी से बचने का आह्नान किया गया.

यूक्रेन युद्ध के मानवीय कष्टों के प्रभावों पर डाला प्रकाश
घोषणापत्र में कहा गया कि, हमने यूक्रेन में युद्ध के मानवीय कष्टों और नकारात्मक प्रभावों पर प्रकाश डाला. वैश्विक खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, बड़े वित्तीय स्थिरता के संबंध में, मुद्रास्फीति और विकास, इन सभी के लिए युद्धों ने देशों के नीतिगत माहौल को जटिल बना दिया है. विशेष रूप से विकासशील और अल्प विकसित देश जो अभी भी इससे उबर रहे हैं, उनके लिए बड़ी मुश्किलें हैं. कोविड-19 महामारी के कारण आर्थिक व्यवधान ने कई देशों की प्रगति को बेपटरी किया है.

इस्तांबुल समझौतों के प्रयासों की सराहना
घोषणा पत्र में कहा गया कि, हम तुर्की और संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता वाले इस्तांबुल समझौतों के प्रयासों की सराहना करते हैं. इसमें रूसी संघ और तुर्की के बीच समझौता ज्ञापन शामिल है, जिसका प्रमुख उद्देश्य रूसी खाद्य उत्पादों और उर्वरकों को बढ़ावा देना है. संयुक्त राष्ट्र का सचिवालय विश्व बाज़ारों और अनाज के सुरक्षित परिवहन पर पहल के लिए काम कर रहा है, और यूक्रेनी बंदरगाहों से खाद्य पदार्थों को पूर्ण, समय पर, और सुरक्षित तरीके से पहुंचाने के लिए कदम उठाया जा रहा है. इसके साथ ही, रूसी संघ और यूक्रेन से खाद्य पदार्थों और उर्वरकों की तत्काल और अबाधित वितरण को सुनिश्चित करने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं. इसका मुख्य उद्देश्य विकासशील और अल्प विकसित देशों, विशेषकर अफ़्रीका में, मांग को पूरा करने में मदद करना है.

सैन्य विनाश और हमलों को रोकने का आग्रह
इस संदर्भ में, हम खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा को बनाए रखने के महत्व पर जोर दे रहे हैं. हमने सैन्य विनाश या अन्य हमलों को रोकने का आग्रह किया है, जो प्रासंगिक बुनियादी ढांचे पर हो सकते हैं. हमने संघर्षों से पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव के बारे में भी गहरी चिंता व्यक्त की है, जो नागरिकों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकते हैं और मौजूदा सामाजिक-आर्थिक कमज़ोरियों को और बढ़ा सकते हैं. ये कमज़ोरियाँ और प्रभावी मानवीय प्रतिक्रिया में बाधा डाल सकती हैं.

हम सभी राज्यों से क्षेत्रीय सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों को बनाए रखने का आग्रह करते हैं. यह कानून अखंडता और संप्रभुता, अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून और बहुपक्षीय प्रणाली की मान्यता करता है, जो शांति और स्थिरता की रक्षा करता है. संघर्षों का शांतिपूर्ण समाधान और संकटों के समाधान के साथ-साथ कूटनीति और संवाद भी महत्वपूर्ण हैं.

हम अपने में एक हो जाने का प्रयास करते हैं ताकि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर युद्ध के प्रतिकूल प्रभाव को संबोधित कर सकें, और हम सभी प्रासंगिक और रचनात्मक पहलों का स्वागत करते हैं जो व्यापक, न्यायपूर्ण, और यूक्रेन में स्थायी शांति और मैत्रीपूर्ण और अच्छे पड़ोसी संबंधों को बढ़ावा देने में मदद करेंगे. यह हमारी एक पृथ्वी, एक परिवार, और एक भविष्य की भावना में राष्ट्र के सभी उद्देश्यों और सिद्धांतों को कायम रखने का संकल्प है. आज का दौर बेशक युद्ध का दौर नहीं है.

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