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बांधवगढ़ में 7 महीने में 11 टाइगर की मौत: आपसी संघर्ष में मर रहे हैं, इंसानों की जान लेने से भी नहीं चूक रहे

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बांधवगढ़

बाघों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर मध्यप्रदेश के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व पार्क में 7 महीनों में 11 बाघों की मौत हो चुकी है। बीते 3 महीने में 7 बाघों की मौत हुई है। 4 मौतें तो बीते डेढ़ महीने के अंदर हुई है। हर महीने औसतन दो से भी ज्यादा बाघों की मौत वाइल्ड लाइफ में औसत से ऊपर एक्स्ट्रीम की कैटेगरी में आता है। इन मौतों को एक्स्पर्ट्स बहुत ही चिंताजनक मानते हैं।

बीते एक महीने में इंसानों पर बाघ के हमले की भी कई घटनाएं सामने आई हैं। पिछले एक सप्ताह में तीन घटनाएं ऐसी सामने आई हैं, जिसमें एक की मौत और दो गंभीर रूप से घायल हुए हैं। यानी एक तरफ बाघ मर रहे हैं, दूसरी तरफ वे इंसानों पर हमला कर रहे हैं। क्या यह बहुत ही सामान्य सी बात है? या इन घटनाओं को रोकने में वन विभाग विफल हो रहा है?

मार्च के बाद हर महीने दो बाघों की मौत
नेशनल टाइगर कन्वर्जेशन अथॉरिटी का रिकॉर्ड कहता है कि बांधवगढ़ में बाघों की सबसे ज्यादा मौतें पिछले 10 सालों में हुई हैं। 2012 से 2022 के बीच बांधवगढ़ में अलग-अलग कारणों से 66 बाघों की मौत हुई है। 2023 में भी मार्च से अब तक 11 मौतें हुई हैं। सबसे पहले इसी साल 2 मार्च को 18 माह की मादा शावक RF-374 की खितौली रेंज में मौत हुई थी। जांच में मौत का कारण आपसी संघर्ष यानी टेरिटोरियल फाइट बताया गया। जब जंगली जानवर अपने इलाके के लिए आपस में लड़ते हैं उसे टेरिटोरियल फाइट कहते हैं।

दूसरी मौत 1 अप्रैल को मग्धी रेंज में हुई थी। जांच में इसका कारण अब तक अज्ञात है। तीसरी मौत पनपथा बफर रेंज में एक नर बाघ शावक की हुई, जिसकी उम्र 3-4 माह थी। 3 अप्रैल को हुए इस मौत को जांच में बाघ द्वारा हमला बताया गया। पनपथा बफर में ही अगले महीने 8 मई को 10-11 वर्ष के एक वयस्क बाघ की मौत हो जाती है। इसका भी कारण आपसी संघर्ष बताया गया।

पांचवीं मौत 18 मई को टाइगर रिजर्व के कोर जोन ताला रेंज में हुई। यहां भी टेरिटोरियल फाइट में एक मादा बाघ शावक की मौत हो गई। जुलाई में दो मौतें मानपुर बफर जोन में सिर्फ 5 दिनों के अंतराल पर हुई। इसमें 2-3 वर्ष की एक मादा बाघ की मौत का कारण अज्ञात बताया गया और दूसरे नर बाघ की मौत का कारण प्राकृतिक था। अगस्त में भी दो मौतें हुईं। 10 अगस्त को पनपथा बफर में सात माह के शावक और 27 अगस्त को मग्धी में 4 वर्ष की मादा बाघ का शव मिला। मगर वन विभाग के कान तब खड़े हो गए जब 16 सितंबर को मानपुर रेंज में सिर कटा हुआ एक बाघ का शव मिला। फिर उसके दो दिन बाद ही ताला रेंज के चरण गंगा नदी के किनारे 5 वर्ष के वयस्क नर बाघ का शव मिला।

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