नई दिल्ली,
शनिवार को नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की बैठक हो रही है. ये जीएसटी काउंसिल की 52वीं बैठक है. सरकार ने इसमें एक बड़ा फैसला लिया है, जिसके तहत मिलेट्स से बने प्रोडक्ट्स पर लगने वाले टैक्स की दर में कटौती की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, इन उत्पादों पर अब 18 फीसदी की जगह 5 फीसदी जीएसटी लागू होगा.
भारत मना रहा है ‘ईयर ऑफ मिलेट्स’
एएनआई की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि जीएसटी काउंसिल की बैठक में अब मिलेट्स से बने हुए उत्पादों पर वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दर को घटा दिया गया है. भारत 2023 को ‘Year of Millets’ के रूप में सेलिब्रेट कर रहा है. ऐसे समय में यह राहत बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है, जबकि केंद्र सरकार देश में मोटे अनाजों को बढ़ावा देने पर पूरा फोकस कर रही है. गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल की फिटमेंट कमेटी ने बाजरा पाउडर पर छूट की सिफारिश की थी.
आखिर क्या होता है मिलेट्स?
Millets के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट घोषित किया गया है. भारत की तरफ से की गई इस पहल के कारण दुनिया का ध्यान अब मोटे अनाज की ओर केंद्रित हो गया है. मिलेट्स में मोटे और छोटे दोनों वाले अनाज शामिल होते हैं. प्रमुख मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा और रागी का नाम आता है, तो वहीं छोटे अनाजों में कुटकी, कांगनी, कोदो और सांवा शामिल हैं. ये सभी कैल्शियम, आयरन, फाइबर समेत ढेरों पोषक तत्वों के बढ़िया सोर्स हैं.
G-20 में परोसे गए थे मिलेट्स से बने व्यंजन
मिलेट्स से बने प्रोडक्ट्स खाने में तो स्वादिष्ट होते ही हैं, इसके साथ ही ये बैड कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज कंट्रोल करने के साथ ही हार्ट डिसीस और स्ट्रोक जैसी बीमारियों से भी बचाते हैं. आसानी से पचने की वजह से ये पेट के लिए और वजन कम करने के लिए भी अच्छे माने जाते हैं. मिलेट रोग प्रतिरोधी क्षमता को भी बढ़ाते हैं. बीते दिनों भारत में संपन्न हुई जी-20 सम्मेलन में शिरकत करने आए विदेशी मेहमानों को भी मिलेट्स से व्यंजन परोसे गए थे और इन्हें बेहद पसंद किया गया था.
इन मुद्दों पर भी बड़ा ऐलान संभव
GST Counsil की 52वीं बैठक में मिलेट्स पर फैसला हो गया है. वहीं अभी अन्य मुद्दे भी इस बैठक में शमिल किए गए हैं. इसमें सबसे अहम ऑनलाइन गेमिंग (Online Gaming), घुड़दौड़ और कैसीनो पर 28 फीसदी जीएसटी कर के कार्यान्वयन की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है. इसके अलावा कंपनियों को लोन के बदले ऑफर की जाने वाली कॉरपोरेट गारंटी पर जीएसटी लगाने की संभावना भी है. वहीं इंश्योरेंस प्रीमियम पर GST Rates पर क्लारिफिकेशन आ सकता है.
