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Tuesday, May 5, 2026
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‘उस दिन यहूदी कुछ नहीं करते’ इजरायल पर हमले के लिए हमास ने क्‍यों चुना शनिवार? पूर्व राजनयिक ने समझाया

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नई दिल्‍ली

इजरायल और फिलिस्तीनी आतंकी संगठन हमास के बीच शनिवार से ही जंग छिड़ गई है। हमास के अब तक के सबसे बड़े हमले में सैकड़ों इजरायली जान गंवा चुके हैं। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। इजरायल पर रॉकेटों से ये आतंकी हमला शनिवर की सुबह हुआ। उगते सूरज के साथ इजरायल में चारों तरफ धमाकों की गूंज सुनाई देने लगी। अब ये गूंज शांत होने का नाम नहीं ले रही है। सवाल यह उठता है कि हमास ने हमले के लिए यही समय क्यों चुना? इस हमले ने इजरायल की छवि को कैसे धक्‍का पहुंचाया है? आगे वह क्‍या करने वाला है? पूर्व राजनयिक महेश सचदेव ने इसका जवाब दिया है।

महेश सचदेव ने इजरायल पर हमास के हमले पर चिंता जताई है। उन्‍होंने कहा कि इससे बहुत सारी परिस्‍थ‍ितियां बदल जाती हैं। पहली बात यह है कि इजरायल के बारे में कहा जाता था कि मध्‍य पूर्व में अगर पत्‍ता भी हिलता है तो उसे पता चल जाता है। इस हमले के बाद यह साबित हो गया कि इसमें अतिश्‍योक्ति है।

पूर्व ड‍िप्‍लोमैट ने बताया क्‍यों चुना गया यही समय?
पूर्व राजनयिक ने आगे कहा कि हमास ने इजरायल पर हमला करने के लिए बहुत ध्‍यान से समय चुना। इसके लिए शनिवार को दिन लिया गया। इजरायल में इस दिन को शप्‍त कहते हैं। इस दिन इजरायली खाना नहीं खाते हैं। इसमें यहूदियों के लिए कुछ भी करना मना है। यहां तक इस दिन उनके लिए फ्रिज का दरवाजा खोलना भी मना होता है।

महेश सचदेव ने कहा कि दूसरा शनिवार को ही यहूदियों का एक त्‍योहार था। इस त्‍योहार में वो पूरे दिन अपने धार्मिक ग्रंथ तोरा को पढ़ते हैं। यह दिन इसी के लिए समर्पित होता है। तीसरा, इजरायल के अंदर विवाद चल रहा है। इसमें सरकार चाहती है कि अदालतों पर अंकुश लगाया जाए। वहीं, जनता इसके विरोध में है। चूंकि सरकार का संसद में बहुमत है तो इस बिल को पास करा लिया गया है। अब वहां सुप्रीम कोर्ट खुद वैधानिक हनन पर विचार कर रहा है। लोगों का प्रदर्शन जारी है। इस तरह से कह सकते हैं कि देश विभाजित है। यह विभाजन इस कदर का है कि इजरायली सेना के रिजर्व अधिकारियों ने बिल के खिलाफ ट्रेनिंग में जाने से मना कर दिया है। इस कारण इजरायल की सैनिक क्षमता पर भी आघात पहुंचा हुआ है।

50 साल पहले अस्‍त‍ित्‍व म‍िटाने के ल‍िए हुआ था हमला
सचदेव ने कहा कि शनिवार को इन परिस्थितियों में हमला किया गया। 6 अक्‍टूबर 1973 को भी इजरायल पर ऐसा ही हमला मिस्र और सीरिया ने किया था। उस दिन भी यहूदियों का त्‍योहार था। उसी का प्रतिबिंब इस हमले में दिखता है। इजरायल पर जो हमला 50 साल पहले हुआ था वो उसके अस्तित्‍व को मिटाने के लिए था। अब जो हमास ने किया है वो बहुत छोटे पैमाने पर है। हालांकि, यह बहुत नाटकीय तरीके से किया गया है। इसका सैनिक परिणाम आगे साफ है। इजरायल बहुत शक्तिशाली है। निश्चित तौर पर इजरायल हमास को पीछे धकेल देगा। यह भी हो सकता है कि इजरायल गाजा में सैन्‍य दखलअंदाजी भी करे। फिलहाल, वहां उसके कोई सैनिक नहीं थे। वहां उसकी बस्तियां भी नहीं हैं। अगर उसने गाजा की ओर रुख किया तो और ज्‍यादा हिंसा होगी।

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