11.3 C
London
Wednesday, May 13, 2026
Homeराष्ट्रीयजजों की नियुक्ति मामला: SC ने कहा- न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए...

जजों की नियुक्ति मामला: SC ने कहा- न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए नामों का चयन बंद करना चाहिए

Published on

नई दिल्ली,

जजों की नियुक्ति के लिए नामों का चयन रोकने की जरूरत पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की तीखी आलोचना की. सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि अगर सरकार खुद समस्या का समाधान नहीं करती है तो वह न्यायिक पक्ष पर आदेश पारित कर सकता है.

न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने कहा, ‘हमने प्रगति रिपोर्ट की कमी पर अटार्नी जनरल (AG) को अपनी चिंता व्यक्त की है. इसका लंबित रहना बड़ी चिंता का मुद्दा है, क्योंकि यह चुनिंदा तरीके से किया जाता है. अटार्नी जनरल का कहना है कि यह मामला सरकार के समक्ष उठाया गया है. हम उम्मीद करते हैं कि स्थिति ऐसी न हो कि कॉलेजियम या यह अदालत कोई ऐसा निर्णय ले जो स्वीकार्य न हो.’

पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘4 नाम लंबित हैं और हाल ही में की गई नियुक्तियां भी चयनात्मक हैं जिस पर हमने पहले भी जोर दिया है. यदि ऐसा किया जाता है तो पारस्परिक वरिष्ठता में गड़बड़ी होती है और इस प्रकार युवा वकीलों को पीठ में शामिल करने के लिए शायद ही अनुकूल हो. दोहराए जाने के बावजूद 5 नाम लंबित हैं. लंबित नामों की इस सूची को बताने की आवश्यकता है. अटार्नी जनरल का कहना है कि सरकार के साथ चर्चा होगी.

सुनवाई के दौरान, पीठ ने बार-बार केंद्र सरकार द्वारा अपनाए गए पिक एंड चूज दृष्टिकोण पर अपनी चिंता व्यक्त की और पंजाब और हरियाणा का उदाहरण दिया और कहा, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के रूप में पांच अधिवक्ताओं की पदोन्नति की सिफारिश की, केंद्र ने क्रम संख्या 1 और 2 में रखे गए नामों को नजरअंदाज करते हुए केवल तीन नामों को मंजूरी दी.

जस्टिस कौल ने कहा, ‘अगर नियुक्तियां चुनिंदा तरीके से की जाएंगी तो इससे वरिष्ठता प्रभावित होगी और युवा वकीलों को बेंच में शामिल करना मुश्किल होगा.’पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी को यह भी बताया कि 14 नाम सरकार के पास लंबित हैं और पांच नाम कॉलेजियम द्वारा बताए जाने के बावजूद लंबित हैं. जस्टिस कौल ने अटॉर्नी जनरल से पूछा, ‘ये तबादले होने ही चाहिए. अन्यथा, यह सिस्टम में एक बड़ी विसंगति पैदा करता है.’

याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से दिशानिर्देश मांगे
सुनवाई के दौरान सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि अब समय आ गया है कि कोर्ट सरकारी बयानों पर भरोसा करने के बजाय सख्ती बरते. अवमानना के लिए विधि सचिव को बुलाया जाए.

मामले में याचिकाकर्ताओं में से एक की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अरविंद दातार ने कहा, इस अदालत के लिए दिशानिर्देश तय करने का समय आ गया है, लेकिन यह इस सरकार या किसी अन्य की समस्या नहीं है, ऐसा होता रहा है. एक बार समयसीमा पूरी हो चुकी है. इस पर बेंच ने दोहराया कि, यह पिक एंड चूज हर कीमत पर रुकना चाहिए.’ पीठ अब इस मामले की आगे की सुनवाई 20 नवंबर को करेगी.अदालत दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें न्यायाधीशों की नियुक्ति और स्थानांतरण के लिए कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी देने में केंद्र द्वारा देरी का आरोप भी शामिल था

Latest articles

भोपाल समेत देशभर के लाखों छात्रों का इंतजार खत्म, CBSE 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 का रिजल्ट जारी

भोपाल। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने आज दोपहर करीब 1:50 बजे 12वीं बोर्ड...

अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक का निधन: पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर लाया गया, विसरा सैंपल सुरक्षित

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन...

शिफ्ट होंगी ईंटखेड़ी और अवधपुरी की शराब दुकानें, ठेकेदारों को एक माह का अल्टीमेटम

भोपाल। ईंटखेड़ी और अवधपुरी स्थित शराब दुकानों को हटाने और अन्य स्थान पर शिफ्ट...

कौशल विकास के लिए गोविंदपुरा के उद्योग और आईटीआई के बीच होगा एमओयू

जिया और कलेक्टर के बीच बैठक भोपाल। गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एसोसिएशन (जीआईए) के सभागार में मंगलवार...

More like this

अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक का निधन: पोस्टमॉर्टम के बाद शव घर लाया गया, विसरा सैंपल सुरक्षित

लखनऊ। सपा प्रमुख अखिलेश यादव के छोटे भाई प्रतीक यादव का बुधवार को निधन...

असम के दूसरी बार मुख्यमंत्री बने हिमंता, 2 बीजेपी और 2 सहयोगी दलों से मंत्री बने, मोदी-शाह मौजूद रहे

गुवाहाटी। हिमंता बिस्वा सरमा लगातार दूसरी बार असम के मुख्यमंत्री बने हैं। असम के...

नीट यूजी 2026 की परीक्षा रद्द, 3 मई को हुई थी आयोजित, पेपर लीक के बाद NTA ने लिया फैसला

नई दिल्ली। नीट यूजी (NEET UG) परीक्षा 2026 से जुड़ी इस वक्त की बड़ी...