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Thursday, January 15, 2026
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बीएचईएल के एक ठेकेदार यूनियन नेता सोशल मीडिया पर छाये

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बीएचईएल भोपाल के एक ठेकेदार नेता की अजब कहानी है । सिर्फ भोपाल यूनिट ही नहीं बल्कि अन्य यूनिटों में भी यूनियन की आढ़ में ठेकेदारी में भी करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं लेकिन प्रबंधन से गठजोड़ के चलते कई यूनियनें उनके खिलाफ आवाज उठा चुकी हैं पर उनका बाल बांका नहीं कर पाये। यही कारण है कि जीरो नंबर पर होने के बाद भी अपने धंधे को कतिपय अफसरों के मिलकर लगातार बड़ाते आ रहे हैं हाल ही में यह सोशल मीडिया पर छा गये हैं।

नंबर वन यूनियन के एक नेता ने तो उन्हें सोशल मीडिया पर जमकर धो डाला। इसके चलते एक बार फिर वह चर्चाओं में आ गये । दरअसल यह ठेकेदार यूनियन जब से यह ठेका ले रही है तब से नंबर वन थी । सोशल मीडिया पर छाये यूनियन के मुखिया ने अपने परिवार के बेटे बहू को प्रतिवर्ष 13 -14 करोड़ के ठेके लेने में पूरी ताकत लगा दी । जब वह सत्ता में थी तब कर्मचारियों का इसेंटिव व इन्सलरी प्रबंधन से मिलकर कोरोना काल में बंद करवा दिया था, कैंटीन के खाने का रेट बड़ा दिया, वो भी एक दौर था कि ना समय पर मिठाई मिलती थी ना समय पर गिफ्ट मिलता था आज उन्हें कर्मचारियों की समस्या दिखाई दे रही है ।

कांग्रेस की हिमायत करने वाली यह यूनियन इसके परिवार के 13 -14 करोड़ के बेटे बहू के ठेके और जब उन ठेको का पैसा नहीं निकल पाता तो वह प्रबंधन पर यूनियन का दबाव बनाकर पैसा निकालने का कार्य करती है उस यूनियन के एक नेता भेल को-ऑपरेटिव में भी पद पर है उस संस्था को तो बर्बाद कर ही दिया है और अभी भी वह उस को-आपरेटिव के चैक पर छुप-छुप कर साइन करते हैं बुरी बात यह है कि उस सोसायटी के खुद के कर्मचारियों को वहां महीनों से पेमेंट नहीं मिल रही है । वह वेतन के लिये दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। सोशल मीडिया में तो यहां तक कह डाला कि सच्चाई जाननी है तो उस उस नेता से जाकर जरूर मिलिये जो कभी कर्मचारियों के बीच में दिखाई देता था लेकिन आजकल अपनी यूनियन के ठेकों को भेल कारखाने में ंसर्वाधिक ठेके लेने के लिए अपने सिपहसालार की कार में घूमते हुए कंपनी में देखा जाता है ।

बेचारे सिपहसालार को स्पेशल पास के लेने के कारण उस पर पैसा खर्च करना पड़ता है । इनके कार्यकाल में कैंटीन का पैसा बढ़ गया और अभी वह और पैसे बढ़ाने के मूड में है । सालों चुनाव नहीं होने दिया कर्मचारियों को उनके अधिकार से वंचित रखा उन्हें ढाई साल में परमानेंट होने पर मजबूर किया जबकि अन्य यूनिटों में 1 साल में परमानेंट होते हैं ठेकेदार का जमीर आज अपने ठेकों के लिए जाग चुका है और उसके चरण दास आज भी कारखाने में ठेकेदार नेता का गुणगान करते हैं। यह बातें सोशल मीडिया पर जमकर चल रही हैं और भेल कर्मी व अधिकारी चटकारे लेकर पढ़ रहे हैं।

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