नई दिल्ली,
एसकेएम ने 21 फरवरी 2024 को पूरे भारत में एनडीए-भाजपा सांसदों के खिलाफ बड़े पैमाने पर काले झंडे दिखाकर विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है. पंजाब एसकेएम ने 20-22 फरवरी 2024 को भाजपा के सांसदों, विधायकों, मंत्रियों और जिला अध्यक्षों के खिलाफ 3 दिनों के दिन और रात के सामूहिक विरोध का आह्वान किया है.
नई दिल्ली में होगी SKM की बैठक
भविष्य की कार्ययोजना तय करने के लिए एसकेएम एनसीसी और आम सभा की 21-22 फरवरी, 2024 को नई दिल्ली में बैठक होगी. किसानों ने अपील की है कि, किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, राष्ट्र विरोधी कानून बनाकर चुनावी बांड और बदले में लाभ के कॉर्पोरेट भ्रष्टाचार को उजागर करें.
किसानों ने किया है ‘दिल्ली चलो’ का ऐलान
बता दें कि, किसानों ने अपनी मांगों को लेकर ‘दिल्ली चलो मार्च’ का ऐलान किया था, लेकिन पंजाब से चले किसानों को हरियाणा के शंभू बॉर्डर पर रोक लिया गया. शंभू बॉर्डर पर डेरा डाले हुए किसानों को छह दिन हो चुके हैं. इस बीच आज चंडीगढ़ में किसान नेताओं और सरकार के बीत चौथे दौर की वार्ता होनी है. इससे पहले हुई तीन दौर की वार्ताओं में सहमति नहीं बन पाई है.
किसानों-सरकार के बीच हो चुकी हैं तीन बैठकें
इससे पहले किसान नेताओं और सरकार के बीच 8, 12 और 15 फरवरी को मीटिंग हुई है, लेकिन इनमें कोई सफलता नहीं मिली. दरअसल किसान फसलों के न्यूनत समर्थन मूल्य (MSP) की गारंटी पर कानून की मांग पर अड़े हुए हैं. किसानों की सरकार से 13 प्रमुख मांगें हैं, जिनमें से सरकार की ओर 10 मांगों को मान लिया गया है. बात सिर्फ तीन मांगों पर अटकी हुई है. ये मांगें हैं- न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) गारंटी कानून, किसानों की कर्ज माफी और 60 साल से अधिक उम्र के किसानों को पेंशन.
किसानों को प्रदर्शन शुरू किए छह दिन बीते
आज होने वाली बैठक से पहले इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा, “शंभू बॉर्डर पर डटे हुए हमें छह दिन हो गए हैं और आज वार्ता भी हो रही है, जब सरकार से हमने वार्ता की है तो सरकार ने कहा कि हमें समय तो हम केंद्र के साथ उनके बड़े मंत्रियों से बात करके इसका हल निकालेंगे.
किसान बोले- हमें कभी नहीं मिले उचित दाम
जिस तरह आप जानते हैं कि 27 रुपये में हम प्रतिदिन गुजारा करते हैं. लगातार किसान और मजदूर की हालत बिगड़ रही है. जो हम लागत खर्चा लगा रहे हैं कि बीज, खाद, खेती मशीनगरी, मजदूर के खर्चों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन जो हमें फसलों के दाम दिए जाते हैं, वो हमें कभी भी उचित नहीं मिले. जैसे हम एमएसपी, कम से कम जो सहायता मूल्य दिया जाता है, इसके नाम से स्पष्ट होता है कि हमें कभी भी उचित नहीं मिला.”
