नई दिल्ली,
फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कानूनी गारंटी को लेकर केंद्र के साथ चार दौर की वार्ता विफल होने के बाद किसान एक बार फिर अपना आंदोलन तेज करने जा रहे हैं. किसानों ने ऐलान कर दिया है कि बुधवार से वे फिर दिल्ली कूच करने का प्रयास शुरू करेंगे. उधर, पंजाब-हरियाणा और हरियाणा-दिल्ली बॉर्डरों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. साथ ही हरियाणा के सात जिलों में लगे इंटरनेट बैन को बढ़ा दिया गया है.
इस बीच आंदोलन कर रहे किसान शंभू बॉर्डर पर प्रशासन द्वारा बनाई गई सीमेंट की दीवारों को तोड़ने के लिए कई पोकलेन मशीनें (Poclain Machine) ले आए हैं. इन मशीनों से किसान दीवार तोड़कर दिल्ली कूच करने का प्रयास करेंगे. वहीं हरियाणा पुलिस ने पंजाब पुलिस ने इस पोकलेन मशीन को जब्त करने के लिए पत्र लिखा है. इस पत्र का संज्ञान लेकर गृह मंत्रालय ने भी पंजाब सरकार को सुरक्षा व्यवस्था बिगाड़ने वाले उपद्रवियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने के निर्देश दिए हैं. हरियाणा की अंबाला पुलिस ने पोकलेन मशीनें लेकर आ रहे अज्ञात ड्राइवरों के खिलाफ केस भी दर्ज कर लिया है.
हरियाणा डीजीपी ने पंजाब पुलिस को लिखा पत्र
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) शत्रुजीत कपूर ने अपने पंजाब समकक्ष गौरव यादव को एक तत्काल पत्र लिखा है. इसमें कहा गया है कि पंजाब पुलिस बैरिकेड्स को नुकसान पहुंचाने के लिए दोनों बॉर्डरों पर डेरा डाले किसानों द्वारा लाए गए अर्थमूविंग उपकरणों को जब्त करने के लिए कहा है. हरियाणा डीजीपी ने कहा कि ऐसे उपकरण सुरक्षा बलों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं और ऐसे उपकरणों के मालिकों को इन्हें प्रदर्शनकारी किसानों को उपलब्ध कराने के खिलाफ सख्त चेतावनी दी जानी चाहिए क्योंकि यह एक आपराधिक कृत्य होगा.
उधर, पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने किसानों को बस आदि से दिल्ली जाने के निर्देश दिए हैं. कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के मुताबिक ट्रैक्टर-ट्रॉलियों को राजमार्गों पर नहीं चलाया जा सकता है, इसलिए किसान बस या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करके दिल्ली जा सकते हैं.
गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार को दिए सख्त निर्देश
आंतरिक रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 1200 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों, 300 कारों, 10 मिनी-बसों और अन्य छोटे वाहनों के साथ राजपुरा-अंबाला रोड पर शंभू बॉर्डर पर लगभग 14000 लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति दी गई है. इसी तरह, राज्य ने ढाबी-गुजरान बैरियर पर लगभग 500 ट्रैक्टर ट्रॉलियों के साथ लगभग 4500 व्यक्तियों की विशाल सभा की अनुमति दी है.
गृह मंत्रालय ने पंजाब सरकार से कहा कि पिछले कुछ दिनों से राज्य में कानून एवं व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति चिंता का विषय रही है, क्योंकि ऐसा लगता है कि विरोध की आड़ में उपद्रवियों/कानून तोड़ने वालों को पथराव करने, भीड़ जुटाने और पड़ोसी राज्यों में अशांति और अव्यवस्था फैलाने के स्पष्ट इरादे से सीमा पर भारी मशीनरी ले जाने की खुली छूट दे दी गई है.
कृषि मंत्री ने किसानों से फिर की अपील
केंद्रीय कृषि मंत्री अर्जुन मुंडा ने एक बार फिर किसानों से अपील की है. उन्होंने कहा कि मैं किसानों के विरोध में शामिल सभी लोगों से अपील करना चाहता हूं कि हम शांति और बातचीत के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं. पूरा देश शांति चाहता है. हम सभी समाधान चाहते हैं. हमने बातचीत जारी रखने की कोशिश की. हमें पता चला कि उन्होंने (किसानों) प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है. मैं सभी संगठनों से अपील करना चाहता हूं.
रविवार को विफल रही किसानों से चौथे दौर की वार्ता
रविवार आधी रात तक चली किसानों और सरकार के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी विफल रही. इस बैठक में मंत्रियों के एक पैनल ने किसानों से पांच फसलें – मूंग दाल, उड़द दाल, अरहर दाल, मक्का और कपास पर पांच साल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदने का प्रस्ताव रखा. लेकिन किसानों ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है कि यह किसानों के हित में नहीं है.
MSP पर एक दिवसीय सत्र बुलाए पीएम: किसान मजदूर मोर्चा
‘दिल्ली चलो’ मार्च फिर से शुरू होने की पूर्व संध्या पर यानी मंगलवार शाम को किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंढेर ने कहा कि केंद्र को फसलों के लिए एमएसपी पर कानून लाने के लिए एक दिवसीय संसद सत्र बुलाना चाहिए. किसान मजदूर मोर्चा संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के साथ मिलकर ‘दिल्ली चलो’ आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है.
शंभू सीमा बिंदु पर पत्रकारों से बात करते हुए, पंधेर ने कहा, “हम मांग करते हैं कि एमएसपी की गारंटी के लिए एक कानून लाया जाए. अगर प्रधानमंत्री में इच्छाशक्ति है, तो संसद का एक दिवसीय सत्र बुलाया जा सकता है. कोई भी विपक्षी दल इसका विरोध नहीं करेगा.”पंढेर ने कहा कि किसानों की तीन बड़ी मांगें हैं- सभी फसलों के लिए एमएसपी पर कानूनी गारंटी, स्वामीनाथन आयोग द्वारा अनुशंसित “सी2 प्लस 50 प्रतिशत” फॉर्मूले का कार्यान्वयन और कृषि लोन माफी. सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक किसानों पर कुल 18.5 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.
