नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह इस बात को सुनिश्चित करें इंडियन कोस्ट गार्ड में महिलाओं को परमानेंट कमीशन दिया जा सके। महिलाओं को परमानेंट कमीशन देने के मामले में पीछे नहीं छोड़ा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि अगर आप (केंद्र की मोदी सरकार) नहीं करेंगे तो हम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुाई वाली बेंच के सामने अटॉर्नी जनरल ने कहा कि शॉर्ट सर्विस कमीशन से परमानेंट कमीशन देने में कुछ ऑपरेशनल दिक्कतें हैं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि 2024 में इस तरह की बातों का मतलब नहीं रह गया है। महिलाओं को नहीं छोड़ा जा सकता है।
एक मार्च तक टली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आप इस मामले में नहीं करेंगे तो हम करेंगे। अदालत ने कहा कि इस मामले को आप देखें। सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन कोस्ट गार्ड में महिला ऑफिसरों को परमानेंट कमीशन नहीं देने के मसले पर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी जताई और कहा कि अगर आप इस मामले में नहीं करेंगे तो हम करेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई एक मार्च के लिए टाल दी है।सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की इस बात को लेकर खिंचाई की थी कि इंडियन कोस्ट गार्ड द्वारा महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया।
महिलाओं के परमानेंट कमीशन की मांग
सुप्रीम कोर्ट में एक महिला अधिकारी की ओर से अर्जी दाखिल कर परमानेंट कमीशन की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप जहां नारी शक्ति की बात कर रहे हैं तो आपको यहां इसे दिखाना चाहिए। आपको ऐसी पॉलिसी लानी चाहिए जो महिलाओं को निष्पक्ष तरीके से देखे। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा था कि क्या आपने (केंद्र) बबीता पुनिया का जजमेंट नहीं देखा। नेवी में जब महिलाएं हो सकती हैं तो फिर कोस्ट गार्ड में क्यों नहीं। सीमा पर महिलाएं रक्षा में लगी हुई हैं तो कोस्ट गार्ड पर क्यों नहीं। पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या केंद्र अभी भी पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रही है जबकि सुप्रीम कोर्ट ने थल, जल और वायु सेना में महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन देने संबंधित जजमेंट दे चुका है। सुप्रीम कोर्ट एक मार्च को आगे की सुनवाई करेगा।
