5.5 C
London
Thursday, March 19, 2026
HomeUncategorizedमाता-पिता की मृत्यु के बाद सिर क्यों मुंडवाते हैं, जानें हिंदू धर्म...

माता-पिता की मृत्यु के बाद सिर क्यों मुंडवाते हैं, जानें हिंदू धर्म में क्या है मान्यता

Published on

हिंदू धर्म में जन्म से लेकर मृत्यु तक हर एक के साथ कोई न कोई रीति-रिवाज जुड़े हुए हैं। घर में किसी बच्चे का जन्म होता है, तो इस नवजीवन के आने की खुशी में कई तरह के प्रयोजन किए जाते हैं। बच्चे की छठी मनाना, नामकरण, हवन-पूजा जैसे कई संस्कार पूरे किए जाते हैं। इसी तरह हर मंगल कार्य जैसे नया व्यापार, नया घर या फिर कोई वाहन खरीदने से भी कोई न कोई रीति-रिवाज जुड़ा हुआ है। बात करें, जीवन के बाद मृत्यु की, तो मृत्यु के बाद मनुष्य इस संसार को त्यागकर चला जाता है लेकिन उसके घर-परिवार के लोग उसकी मुक्ति के लिए आवश्यक कई संस्कारों को पूरा करते हैं, जिससे कि इस संसार को छोड़ चुके उनके परिजन की आत्मा तृप्त हो सके। इन संस्कारों में से एक है सिर मुंडवाना। हिंदू धर्म में माता-पिता या किसी करीबी की मृत्यु के बाद सिर मुंडवाया जाता है। आइए, जानते हैं हिंदू धर्म में इसका क्या है महत्व।

गरुड़ पुराण के अनुसार मृत्यु के बाद लगता है पातक
गरुड़ पुराण के अनुसार जिस तरह घर में किसी बच्चे का जन्म होने के बाद सूतक लग जाता है, उसी तरह जिस घर में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है, वहां सूतक लग जाता है। सूतक लगने के बाद मृत व्यक्ति के परिजनों को 13 दिनों तक पातक के नियमों का पालन करना पड़ता है। इस दौरान कई कार्यों को वर्जित माना जाता है। जैसे, मंगल कार्यों, नए चीजें खरीदना, नए कपड़े पहनना, रसोई में खाना पकाने आदि चीजें वर्जित मानी जाती हैं। इन्हीं नियमों में मुंडन भी शामिल होता है। बालों को भौतिक संसार से संपर्क और मोह से जोड़कर देखा जाता है। माता-पिता या फिर किसी अपने की मृत्यु के बाद उनके प्रति शोक या दुख को प्रकट करने के लिए सिर मुंडवाया जाता है, जिससे कि व्यक्ति का ध्यान कुछ दिनों के लिए सांसरिक मोह से हट सके। सिर मुंडवाकर मृतक के प्रति श्रद्धा और शोक को व्यक्ति किया जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार सिर मुंडवाने के बाद सूतक समाप्त हो जाता है।

आत्मा से संपर्क तोड़ने का माध्यम है मुंडन
माना जाता है कि बाल नकारात्मक ऊर्जा को भी आर्कषित करते हैं। इसका अर्थ यह है कि जब तक मृत व्यक्ति का अंतिम संस्कार और 13वीं नहीं हो जाती, वह फिर से अपने परिजनों के साथ संपर्क बनाने की कोशिश करती है। इस कारण से आत्मा का जीवन से हर तरह का संपर्क तोड़ने के लिए किसी के मरने के बाद मुंडन कराया जाता है।

स्वच्छता का भी रखा जाता है ध्यान
किसी के मरने के बाद मुंडन कराने का एक वैज्ञानिक पहलू यह भी है कि किसी के मरने के बाद स्वच्छता का भी बहुत ध्यान रखा जाता है। मृतक के आसपास या फिर श्मशान घाट में कई तरह के बैक्टीरिया होते हैं, इसलिए इनसे बचने के लिए कई तरह के नियमों का पालन किया जाता है। स्वच्छता और पवित्रता बनाए रखने के इन नियमों में मुंडन को भी शामिल किया जाता है।

Latest articles

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दी नव संवत्सर और राजस्थान दिवस की शुभकामनाएं; प्रदेशभर में उत्साह का माहौल

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेशवासियों को नव संवत्सर, चैत्र नवरात्र स्थापना (19 मार्च) और...

नव संवत्सर प्रकृति के नवसृजन का उत्सव; युवा पीढ़ी को ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का बोध कराना जरूरी: राज्यमंत्री श्रीमती गौर — प्रकृति के साथ संतुलन...

भोपाल राज्यमंत्री श्रीमती कृष्णा गौर ने बुधवार को गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष (विक्रम संवत...

एडीजी को घर के बाहर अज्ञात बदमाशों ने दी धमकी, पुलिस ने दो आरोपियों को दबोचा

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस के एडीजी (ट्रेनिंग) राजाबाबू सिंह के साथ उनके त्रिलंगा स्थित निवास पर...

इंदौर में बड़ा हादसा: 15 सिलेंडरों के धमाके और जाम हुए डिजिटल लॉक ने ली 8 जानें

इंदौर इंदौर के ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में बुधवार तड़के हुए इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे...

More like this

समय पर खर्च करें केंद्रीय निधि, ताकि विकास की गति बनी रहे: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य के विकास में केंद्रीय सहायता प्राप्त योजनाओं...

मप्र में टैक्स फ्री हुई फिल्म ‘शतक’ — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले— राष्ट्रसेवा और आत्मनिर्भर भारत का देती है संदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हिंदी फिल्म ‘शतक’ को मध्य प्रदेश में टैक्स फ्री...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में ‘राज-उन्नति’ की दूसरी बैठक — 84,282 करोड़ रुपये की परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा, लापरवाही पर सख्त कार्रवाई...

भोपाल मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में ‘राज-उन्नति’ कार्यक्रम की दूसरी उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित...