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यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर ने बंद की जापानी पत्रकार की बोलती, कहा- फायदा देख सिद्धांत बदलते हैं पश्चिमी देश, चीन पर घेरा

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टोक्यो:

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर इस समय जापान के दौरे पर हैं। यहां उनसे जापान के एक पत्रकार ने सवाल किया कि भारत यूक्रेन पर हमले के लिए रूस की आलोचना क्यों नहीं करता है। जापान के पत्रकार ने भारत के रुख पर इशारे में हमला करते हुए ये सवाल किया गया तो जयशंकर ने भी इसका करारा जवाब दिया। रूस की आलोचना नहीं करने के सवाल पर भारयतीय विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के क्षेत्र पर दूसरे देश ने कब्जा कर लिया है लेकिन दुनिया ने इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। अब भारत के रुख का सबको बहुत ध्यान है। एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों पर तगड़ा कटाक्ष करते हुए कहा कि लोग सिद्धांतवादी भी मौके के हिसाब से बनते हैं। जब सिद्धांत उनके उपयुक्त होते हैं तो उन्हें मानते हैं और जब ये उनके अनुकूल नहीं होते तो इसे अनदेखा कर देते हैं।

एस जयशंकर शुक्रवार को जापान में निक्केई फोरम को संबोधित करने के बाद सवालों के जवाब भी दिए। इसी दौरान एक जापानी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा कि आप संप्रभुता के सम्मान करने की बात कहते हैं लेकिन यूक्रेन पर रूस ने हमला किया तो भारत ने इसकी आलोचना नहीं की। क्या ये आपका दोहरा मानदंड नहीं है। इस पर जयशंकर ने कहा कि दुनिया एकदम सीधी नहीं बल्कि बहुत जटिल है। विश्व राजनीति में कुछ होता है तो कुछ देश अपने हिसाब से मुद्दा और सिद्धांत चुनते हैं और उनको सर्वोपरि कर देते हैं क्योंकि यह उनके हित में होता है।

हमारी जमीनों पर कब्जे दुनिया को क्यों नहीं दिखते हैं: जयशंकर
चीन और पाकिस्तान का नाम लिए बिना एस जयशंकर ने आगे कहा, आजादी के तुरंत बाद ह हमने पड़ोसियों की आक्रामकता झेली। हमारी जमीनों पर कब्जे किए गए और हमने अपनी सीमा को बदलते देखा। आज भी भारत के कुछ हिस्से पर दूसरे देशों का कब्जा है। इस पर हमने कभी नहीं देखा कि दुनिया सिद्धांतों को लेकर खड़ी हुई हो। जयशंकर ने साथ ही ये भी कहा कि उनके जवाब को ये ना माना जाए कि वह किसी और के साथ नाइंसाफी की वकालत कर रहे हैं क्योंकि हमारे साथ ऐसा हुआ है। जयशंकर ने यूक्रेन युद्ध पर कहा कि हमारा रुख साफ है। हमारे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति पुतिन से स्पष्ट कहा कि भारत युद्ध में भरोसा नहीं करता है। हम बैठकर बातचीत से विवादों और संघर्ष का हल निकालने के पक्ष में रहे हैं। यूक्रेन-रूस के विवाद में भी हम बातचीत के पक्ष में हैं।

एस जयशंकर ने जापान में भी एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र में सुधार की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में हुई थी। उस समय करीब 50 सदस्य देश थे। वहीं आज 200 सदस्य देश हैं।अगर किसी संगठन में चार गुना सदस्य बढ़ जाते हैं तो साफ कि सुधार जरूरी है। जयशंकर ने कहा कि इसमें ना तो लैटिन अमेरिकी देशों का प्रतिनिधित्व है और ना ही अफ्रीकी देशों का। क्या ये इतने बड़े संगठन के लिए आदर्श स्थिति कही जा सकती है।

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