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तिब्‍बत को आजादी दो… दिल्‍ली की सड़कों पर उतरे तिब्‍बती तो बौखलाया चीन, भारत के खिलाफ उगला जहर

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बीजिंग

तिब्बती लोगों ने रविवार, 10 मार्च को चीन के खिलाफ दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन किया। भारत में भी कई शहरों में चीन के खिलाफ प्रदर्शन किया गया। तिब्बती समुदाय के लोग 10 मार्च को राष्ट्रीय विद्रोह दिवस के रूप में मनाते हैं, इस दिन चीन के खिलाफ तिब्बती लोग अलग-अलग तरीके से विरोध जताते हैं। अपने खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर चीन की प्रतिक्रिया आई है। भारत में चीन के दूतावास के प्रवक्ता वांग जियाजियान ने सोशल मीडिया पर विरोध प्रदर्शनों के लिए गुस्सा जाहिर करते हुए इन लोगों को एजेंडे के तहत प्रदर्शन करने वाला बताया है।

वांग जियाजियान ने कहा, “तथाकथित “तिब्बती निर्वासित सरकार, तिब्बती स्वतंत्रता” को आगे बढ़ाने के एजेंडे के साथ एक पूर्ण अलगाववादी राजनीतिक समूह है। यह पूरी तरह से चीन के संविधान और कानूनों का उल्लंघन करने वाला एक अवैध संगठन है। इसे दुनिया के किसी भी देश की ओर से मान्यता नहीं दी गई है। ऐसे संगठन के “बयान” अफवाहें फैलाते रहते हैं और तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करते रहते हैं। चीन में अलगाव पैदा करने का उनका ये एक विफल प्रयास है।

शीजांग को बताया चीन का अभिन्न अंग
वांग ने कहा है कि शीजांग (तिब्बत) प्राचीन काल से ही चीन का अभिन्न अंग रहा है। आज के समय में शीजांग के आर्थिक विकास, स्थिरता, जातीय एकजुटता, धार्मिक सद्भाव, सांस्कृतिक जीवन शक्ति को संरक्षित किया जा रहा है। उसके पारिस्थितिक पर्यावरण और जीवन-स्तर में सुधार हो रहा है। शीजांग स्वायत्त क्षेत्र के सभी जातीय समूहों के लोग चीन की केंद्र सरकार और क्षेत्रीय सरकार की नीतियों का खुले दिल से समर्थन करते हैं। भारत का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि कुछ देश और मीडिया को शीजांग से संबंधित मुद्दों के बहाने चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है। इसे बंद कर देना चाहिए और तिब्बती स्वतंत्रता की बात करने वाली ताकतों को चीन विरोधी अलगाववादी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कोई समर्थन नहीं देना चाहिए।

राष्ट्रीय विद्रोह दिवस को तिब्बत के लोग तिब्बत में चीन की उपस्थिति के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं। ये 10 मार्च, 1959 के तिब्बती विद्रोह की याद में मनाया जाता है। 10 मार्च, 1959 को हजारों तिब्बती लोग चीन के कब्जे के विरोध में सड़कों पर उतरे थे। 1959 के विद्रोह को याद करते हुए दुनिया भर में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोग सड़कों पर उतरते हैं।

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