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पाकिस्‍तान, मालदीव… दुनिया को ड्रोन और घातक हथियार बेचकर मालामाल हो रहा तुर्की, मिली बड़ी कामयाबी

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तुर्की ने हथियार बनाने और बेचने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। तुर्की अब दुनिया का 11वां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक देश बन गया है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (एसआईपीआरआई) की 11 मार्च की रिपोर्ट में ये जानकारी दी गई है। इंस्टीट्यूट के आंकड़ों के अनुसार, 2014-2018 की तुलना में 2019-2023 में तुर्की का हथियार निर्यात दोगुना हो गया। 2019 से 2023 की अवधि में तुर्की के हथियारों के निर्यात में 106 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसने तुर्की को दुनिया के प्रमुख हथियार निर्यातकों की कतार में ला दिया है। मालदीव ने भी तुर्की से टीबी 2 हमलावर ड्रोन खरीदे हैं। यह मुद्री निगरानी के लिए हैं। ये ड्रोन यूक्रेन में तबाही मचा चुके हैं।

हथियार निर्यातक देशों में तुर्की से आगे अब अमेरिका, फ्रांस, रूस, इटली, दक्षिण कोरिया, चीन, जर्मनी, ब्रिटेन, स्पेन और इजरायल हैं। हथियार निर्यातकों के इन 10 शीर्ष देशों के बाद दुनिया का 11वां सबसे बड़ा हथियार निर्यातक तुर्की है। तुर्की ने संयुक्त अरब अमीरात को सबसे ज्यादा 15 प्रतिशत हथियार निर्यात किए। उसके बाद कतर को 13 प्रतिशत और पाकिस्तान को 11 फीसदी हथियार भेजे हैं। तुर्की 6.3 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ उप-सहारा अफ्रीका में चौथा सबसे बड़ा हथियार आपूर्तिकर्ता भी बना है। रिपोर्ट में कहा गया है कि 2014-2018 की अवधि में तुर्की का आयात 29 प्रतिशत कम हुआ।

भारत सबसे बड़ा आयातक
रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका के हथियारों के निर्यात में 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई और कुल हथियार निर्यात में उसकी हिस्सेदारी 34 प्रतिशत से बढ़कर 42 प्रतिशत हो गई। अमेरिका और पश्चिमी यूरोपीय देशों का संयुक्त निर्यात 2019-2023 में सभी हथियारों के लिए 72 प्रतिशत था। इसकी वजह ये थी कि यूरोप ने 2014-2018 से अपने हथियारों के निर्यात को दोगुना कर दिया। इस समयावधि में भारत, सऊदी अरब, कतर, यूक्रेन और पाकिस्तान 2019 से 2023 के बीच पांच सबसे बड़े हथियार आयातक थे। कुल वैश्विक हथियार आयात में 9.8 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ भारत पहले स्थान पर पहुंच गया। इससे पहले 2014-2018 की अवधि में सऊदी अरब पहले स्थान पर रहा।

यूक्रेन पर आक्रमण के बाद जारी प्रतिबंध के कारण रूस की निर्यात मात्रा 53 प्रतिशत कम हो गई। निर्यातक 2019-2023 की अवधि में एक स्थान गिरकर तीसरे नंबर पर आ गया। जहां 2019 में 31 देशों ने मॉस्को से हथियार खरीदे, वहीं 2023 तक यह संख्या घटकर 12 रह गई। भारत और चीन ने इस अवधि में रूस से सबसे अधिक मात्रा में हथियार हासिल किए। एसआईपीआरआई एक अंतरराष्ट्रीय संस्थान है जो संघर्ष, आयुध, हथियार नियंत्रण और निरस्त्रीकरण में अनुसंधान पर काम करता है।

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